ऑपरेशन सिंदूर में शहीद जवानों के नाम छिपाए गए थे? कांग्रेस के आरोपों पर रक्षा मंत्रालय ने दिया जवाब, सेना का स्पष्टीकरण भी आया
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों को सम्मान न देने के आरोप लगाए थे. जिसके बाद रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी है. मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि देश ने इन शहीदों को सबसे पहले मौके पर ही सम्मान दिया था और उनकी याद को हमेशा सम्मान और श्रद्धा के साथ याद रखा जाएगा.
Edited By : Versha Singh|Updated: Jun 28, 2026 08:46
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कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों को सम्मान न देने के आरोप लगाए थे. जिसके बाद रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी है. मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि देश ने इन शहीदों को सबसे पहले मौके पर ही सम्मान दिया था और उनकी याद को हमेशा सम्मान और श्रद्धा के साथ याद रखा जाएगा.
पवन खेड़ा ने लगाए थे आरोप
बता दें कि यह विवाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के एक आरोप से शुरू हुआ था. खेड़ा ने शुक्रवार और शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों की कुर्बानी को एक साल तक छिपाकर रखा और उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया. उन्होंने शुक्रवार को एक खबर का लिंक भी शेयर किया था. इस आरोप के जवाब में रक्षा मंत्रालय ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में गलत तरीके से यह बताया गया कि इन छह जवानों की कुर्बानी को अभी हाल में पहली बार सामने लाया गया है.
शहीदों को बहुत पहले ही सम्मान दे दिया गया था- मंत्रालय
मंत्रालय ने साफ किया कि देश ने इन शहीदों को बहुत पहले ही सम्मान दे दिया था. 11 मई 2025 को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन्स ने इन जवानों को श्रद्धांजलि दी थी और उनकी कुर्बानी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था.
मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा कि 14 अगस्त 2025 को जारी किए गए प्रेस रिलीज में भी भारतीय जवानों को वीरता पुरस्कार देने की चर्चा की गई थी और वह उसमें भी छपी थी. सेना के सोशल मीडिया पेज पर भी इनकी तारीफ की गई थी. इसी साल 15 जनवरी को जयपुर में हुई आर्मी डे परेड में सेना प्रमुख ने तीन जवानों के परिवारों को सेना मेडल दिया था. वहीं वायुसेना प्रमुख ने 8 अक्टूबर 2025 को एक समारोह में यह सम्मान दिया था.
मंत्रालय ने यह भी बताया कि इन छह जवानों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल की दीवार पर लिखे जा चुके हैं. इनमें सेना के पांच जवान सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं.
बता दें कि पिछले साल पहलगाम आंतकी हमले का बदला लेने के लिए 22 अप्रैल, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था. मंत्रालय ने कहा कि शहीदों के नाम मेमोरियल पर लिखने की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसका पूरी सावधानी से पालन किया जाता है. मंत्रालय ने इस विवाद को गलत और अफसोसजनक बताया.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए सैनिकों को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बाद रक्षा मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद अब सेना ने भी सफाई दी है. सेना ने कहा है कि यह पहला मौका नहीं है जब इन सैनिकों की शहादत को मान्यता दी गई है. इससे पहले भी इनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया है. इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पिछले वर्ष संसद में दिए गए बयान को लेकर उठाये जा रहे सवालों पर कहा कि इस बारे में कही जा रही बातें जानबूझकर गुमराह करने वाली और तथ्यों के हिसाब से गलत हैं.
सोशल मीडिया की खबरें गलत
सेना ने शनिवार को सोशल मीडिया एक पोस्ट में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ खबरें चल रही हैं. इन खबरों में गलत तरीके से यह कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान छह बहादुर सैनिकों की सर्वोच्च शहादत को हाल ही में पहली बार मान्यता दी गयी या लोगों के सामने लाया गया.
सेना ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाता है कि देश ने इन शहीद नायकों को बहुत पहले ही, यानी उन खबरों के आने से काफी समय पहले ही श्रद्धांजलि दे दी थी. तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक ने पिछले साल 11 मई को आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन बहादुर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उन्हें विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ड्यूटी पर उनकी शहादत को मान्यता दी.
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों को सम्मान न देने के आरोप लगाए थे. जिसके बाद रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी है. मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि देश ने इन शहीदों को सबसे पहले मौके पर ही सम्मान दिया था और उनकी याद को हमेशा सम्मान और श्रद्धा के साथ याद रखा जाएगा.
पवन खेड़ा ने लगाए थे आरोप
बता दें कि यह विवाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के एक आरोप से शुरू हुआ था. खेड़ा ने शुक्रवार और शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों की कुर्बानी को एक साल तक छिपाकर रखा और उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया. उन्होंने शुक्रवार को एक खबर का लिंक भी शेयर किया था. इस आरोप के जवाब में रक्षा मंत्रालय ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में गलत तरीके से यह बताया गया कि इन छह जवानों की कुर्बानी को अभी हाल में पहली बार सामने लाया गया है.
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शहीदों को बहुत पहले ही सम्मान दे दिया गया था- मंत्रालय
मंत्रालय ने साफ किया कि देश ने इन शहीदों को बहुत पहले ही सम्मान दे दिया था. 11 मई 2025 को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन्स ने इन जवानों को श्रद्धांजलि दी थी और उनकी कुर्बानी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था.
मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा कि 14 अगस्त 2025 को जारी किए गए प्रेस रिलीज में भी भारतीय जवानों को वीरता पुरस्कार देने की चर्चा की गई थी और वह उसमें भी छपी थी. सेना के सोशल मीडिया पेज पर भी इनकी तारीफ की गई थी. इसी साल 15 जनवरी को जयपुर में हुई आर्मी डे परेड में सेना प्रमुख ने तीन जवानों के परिवारों को सेना मेडल दिया था. वहीं वायुसेना प्रमुख ने 8 अक्टूबर 2025 को एक समारोह में यह सम्मान दिया था.
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Media reports that the supreme sacrifice of six bravehearts during #OperationSindoor have been acknowledged or brought to public notice for the first time only recently are incorrect. The nation paid homage to these fallen heroes at the earliest opportunity, well before the…
— Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) June 27, 2026
मंत्रालय ने यह भी बताया कि इन छह जवानों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल की दीवार पर लिखे जा चुके हैं. इनमें सेना के पांच जवान सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं.
बता दें कि पिछले साल पहलगाम आंतकी हमले का बदला लेने के लिए 22 अप्रैल, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था. मंत्रालय ने कहा कि शहीदों के नाम मेमोरियल पर लिखने की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसका पूरी सावधानी से पालन किया जाता है. मंत्रालय ने इस विवाद को गलत और अफसोसजनक बताया.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए सैनिकों को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बाद रक्षा मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद अब सेना ने भी सफाई दी है. सेना ने कहा है कि यह पहला मौका नहीं है जब इन सैनिकों की शहादत को मान्यता दी गई है. इससे पहले भी इनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया है. इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पिछले वर्ष संसद में दिए गए बयान को लेकर उठाये जा रहे सवालों पर कहा कि इस बारे में कही जा रही बातें जानबूझकर गुमराह करने वाली और तथ्यों के हिसाब से गलत हैं.
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सोशल मीडिया की खबरें गलत
सेना ने शनिवार को सोशल मीडिया एक पोस्ट में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ खबरें चल रही हैं. इन खबरों में गलत तरीके से यह कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान छह बहादुर सैनिकों की सर्वोच्च शहादत को हाल ही में पहली बार मान्यता दी गयी या लोगों के सामने लाया गया.
सेना ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाता है कि देश ने इन शहीद नायकों को बहुत पहले ही, यानी उन खबरों के आने से काफी समय पहले ही श्रद्धांजलि दे दी थी. तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक ने पिछले साल 11 मई को आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन बहादुर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उन्हें विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ड्यूटी पर उनकी शहादत को मान्यता दी.
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HONOURING THE BRAVEHEARTS
Certain reports circulating in sections of the media and on social media platforms have incorrectly suggested that the supreme sacrifice of six bravehearts during Operation Sindoor have been acknowledged or brought to public notice for the first time…