Maulana Mahmood Madani: जामिया उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलlना महमूद मदनी ने बड़ा बयान दिया और सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने जिहाद की चेतावनी भी दी है. मौलना मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम कहलाने का हक नहीं है, क्योंकि अदालत सरकार के दबाव में काम कर रही है. जिहाद शब्द का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन जब तक जुल्म होगा, तब तक जिहाद होगा और जहां उत्पीड़न होगा, वहां जिहाद होगा.
Bhopal, Madhya Pradesh: Islamic scholar Maulana Mahmood Madani says, "Law and order in a country, and the creation of a crime-free society are impossible without justice, absolutely impossible. Sadly, it must be said that over the past few years, especially after verdicts in… pic.twitter.com/DEHhkaFnpo
---विज्ञापन---— IANS (@ians_india) November 29, 2025
इस्लाम को बदनाम करने की बात कही
मध्य प्रदेश के भोपाल में नेशनल गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि जिहाद पवित्र रहा है और रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी जैसे कई मामलों में संविधान की अनदेखी करते हुए फैसला किया. संविधान का पालन करने वाली कोर्ट सुप्रीम है, वरना सुप्रीम कहलाने की हकदार नहीं. जिहाद, इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसी इस्लाम की पवित्र अवधारणाओं को दुर्व्यवहार, अव्यवस्था और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है.
मुसलमानों को पहुंचाई जा रही है ठेस
मौलान मदनी ने कहा कि लव जिहाद, भूमि जिहाद, शिक्षा जिहाद और थूक जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके मुसलमानों को गहरी ठेस पहुंचाई जाती है और उनके धर्म का अपमान किया जाता है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार और मीडिया में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने में कोई शर्म महसूस नहीं करते, न ही उन्हें पूरे समुदाय को ठेस पहुंचाने की परवाह है. हलाल की अवधारणा को बदनाम किया जा रहा है.
Bhopal, Madhya Pradesh: Islamic scholar Maulana Mahmood Madani says, "…SIR is also being carried out, and it is a very important issue. If we keep a close watch on it, we can avoid despair, because despair is poison for any community and if a community is alive, then there is… pic.twitter.com/pIkaL1jIpe
— IANS (@ians_india) November 29, 2025
मौलाना ने हलाल का मतलब बताया
हलाल का मतलब सिर्फ रस्मी वध नहीं है, बल्कि यह एक मुसलमान की पूरी जीवन शैली का प्रतिनिधित्व करता है. देश के मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील और चिंताजनक हैं. दुख की बात है कि एक खास समुदाय को जबरन निशाना बनाया जा रहा है. उनके धर्म, पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने के लिए व्यवस्थित और संगठित प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें भीड़ द्वारा हत्या, बुलडोजर कार्रवाई, वक्फ संपत्तियों पर कब्जा और धार्मिक मदरसों के खिलाफ नकारात्मक अभियान शामिल हैं.










