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मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर उठाए सवाल, कहा- कोर्ट को Supreme कहलाने का हक नहीं

मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर उठाए सवाल, कहा- कोर्ट को Supreme कहलाने का हक नहीं

Author Written By: News24 हिंदी Updated: Nov 29, 2025 14:32
Maulana Mahmood Madani
Maulana Mahmood Madani

Maulana Mahmood Madani: जामिया उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलlना महमूद मदनी ने बड़ा बयान दिया और सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने जिहाद की चेतावनी भी दी है. मौलना मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम कहलाने का हक नहीं है, क्योंकि अदालत सरकार के दबाव में काम कर रही है. जिहाद शब्द का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन जब तक जुल्म होगा, तब तक जिहाद होगा और जहां उत्पीड़न होगा, वहां जिहाद होगा.

इस्लाम को बदनाम करने की बात कही

मध्य प्रदेश के भोपाल में नेशनल गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि जिहाद पवित्र रहा है और रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी जैसे कई मामलों में संविधान की अनदेखी करते हुए फैसला किया. संविधान का पालन करने वाली कोर्ट सुप्रीम है, वरना सुप्रीम कहलाने की हकदार नहीं. जिहाद, इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसी इस्लाम की पवित्र अवधारणाओं को दुर्व्यवहार, अव्यवस्था और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है.

मुसलमानों को पहुंचाई जा रही है ठेस

मौलान मदनी ने कहा कि लव जिहाद, भूमि जिहाद, शिक्षा जिहाद और थूक जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके मुसलमानों को गहरी ठेस पहुंचाई जाती है और उनके धर्म का अपमान किया जाता है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार और मीडिया में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने में कोई शर्म महसूस नहीं करते, न ही उन्हें पूरे समुदाय को ठेस पहुंचाने की परवाह है. हलाल की अवधारणा को बदनाम किया जा रहा है.

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मौलाना ने हलाल का मतलब बताया

हलाल का मतलब सिर्फ रस्मी वध नहीं है, बल्कि यह एक मुसलमान की पूरी जीवन शैली का प्रतिनिधित्व करता है. देश के मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील और चिंताजनक हैं. दुख की बात है कि एक खास समुदाय को जबरन निशाना बनाया जा रहा है. उनके धर्म, पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने के लिए व्यवस्थित और संगठित प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें भीड़ द्वारा हत्या, बुलडोजर कार्रवाई, वक्फ संपत्तियों पर कब्जा और धार्मिक मदरसों के खिलाफ नकारात्मक अभियान शामिल हैं.

First published on: Nov 29, 2025 02:13 PM

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