जब भी हम ‘महारानी’ शब्द सुनते हैं तो हमारे दिमाग में अकसर ऐसी रानियों की छवि उभरती है, जो बेहतरीन आभूषणों से सजी, लंबे घूंघट में, एक सुंदर घोड़े पर सवार और उनके पीछे-पीछे एक महल में सेवक होते हैं। राजघराने के बारे में हमारी धारणा काफी हद तक अतीत से जुड़ी है। जिसे रामायण, महाभारत और अन्य ऐतिहासिक श्रृंखलाओं में दिखाया गया है। लेकिन आज हम आपको उन ‘महारानियों’ से मिलवाते हैं जो अभी भी अपनी शाही उपाधियां तो रखती हैं लेकिन प्रगति के रास्तों को अपनाती हैं। साथ ही वे परंपराओं और रीति-रिवाजों को कायम रखते हुए अपनी विरासत को भी संरक्षित करती हैं वे ऐसा मॉर्डन एप्रोच और आगे की सोच वाली मानसिकता के साथ करती हैं।
युवा FICCI महिला संगठन का ‘रीगल एम्पावरमेंट’
यंग फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन (YFLO) ने हैदराबाद में एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में राजघरानों से जुड़े लोग एक साथ आए और इस कार्यक्रम ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। 4 राजसी राजकुमारियों और एक महाराजा ने एक यूनिक सेशन ‘द रीगल एम्पावरमेंट: ए कॉन्फ्लुएंस ऑफ इंडियन रॉयल्टीज’ में भाग लिया।
हाल ही में हैदराबाद के होटल लीला में वाईएफएलओ की अध्यक्ष रिद्धि जैन की अध्यक्षता में आयोजित की गई वाईएफएलओ 2024-25 के ग्रैंड फिनाले सेशन ‘रीगल एम्पावरमेंट: ए कॉन्फ्लुएंस ऑफ इंडियन रॉयल्टीज’में गुजरात के बड़ौदा की महारानी राधिकाराजे गायकवाड़, बालासिनोर की नवाबजादी आलिया सुल्ताना बाबी, पंजाब के नाभा की रानी प्रीति सिंह, ओडिशा के ढेंकनाल की राजकुमारी मीनल कुमारी सिंह देव और उदयपुर के महाराज कुमार साहिब डॉ.लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ शामिल हुए।
महाराजा डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कही ये बात
कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले एकमात्र महाराजा डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बताया कि कैसे महिला सशक्तीकरण उनके पूर्वजों के जीन में शामिल था। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उनके पूर्वज राजस्थान के मेवाड़ राजवंश के महाराणा शंभू सिंह ने सन 1865 में इस क्षेत्र में पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया था।
महारानी राधिकाराजे गायकवाड़- रॉयल फैमिली ऑफ बड़ौदा, गुजरात
राधिकाराजे गायकवाड़ भारत की सबसे प्रोग्रेसिव महारानी में से एक हैं। वह बड़ौदा के गायकवाड़ राजवंश के मानद महाराजा समरजीत सिंह गायकवाड़ की पत्नी हैं। राधिकाराजे गायकवाड़ विरासत संरक्षण में विशेषज्ञ हैं और टेक्सटाइल रिवाइवल की चैंपियन हैं। उन्हें मिलियनेयर एशिया मैगजीन में भी विशेष स्थान दिया गया है। वह वांकानेर राज्य के शाही परिवार से आती हैं और महाराजा से विवाहित हैं।
महारानी का पैतृक महल- लक्ष्मी विलास
वे एक असाधारण महल में रहते हैं, जिसे विशेषज्ञ दुनिया का सबसे महंगा निजी घर मानते हैं, जिसकी कीमत 25,000 करोड़ रुपये है। लक्ष्मी विलास पैलेस को बड़ौदा पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। यह ब्रिटेन के रॉयल बकिंघम पैलेस से चार गुना बड़ा है। लक्ष्मी विलास गुजरात के वडोदरा (तब बड़ौदा) के पूर्व शासक गायकवाड़ राजघराने का पैतृक घर है।
रानी प्रीति सिंह – रॉयल फैमिली ऑफ नाभा, पंजाब
रानी प्रीति सिंह ने महिलाओं के अधिकारों पर अपने परिवार के प्रगतिशील रुख को हाईलाइट किया। उन्होंने अपने परदादा के विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहित करने के साहसिक निर्णय के बारे में चर्चा की जो उस जमाने में एक ऐसी प्रथा थी जिसके बारे में लोग सुनना भी पसंद नहीं करते थे। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, रानी प्रीति सिंह ने कहा कि ‘मैं नाभा के शाही परिवार से आती हूं, जो पंजाब की एक रियासत है। इस रियासत को गुरु गोबिंद सिंह का आशीर्वाद प्राप्त है। हमारे पूर्वजों ने उनके दो बड़े साहिबजादों का अंतिम संस्कार किया था और उनसे दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया था, जिससे हमारी विरासत की शुरुआत हुई। सेवा (निस्वार्थ सेवा) सिख धर्म का मूल मंत्र है और इसने पीढ़ियों से मेरे परिवार के लोगों के द्वारा किए कार्यों का मार्गदर्शन किया है। मेरे सबसे प्रेरक पूर्वजों में से एक मेरे परदादा थे, जिन्होंने 130-135 साल पहले नाभा पर शासन किया था। उन्होंने प्रगतिशील सुधार लागू किए, जिसमें छह महीने के भीतर विधवा पुनर्विवाह को अनिवार्य बनाने वाला एक अभूतपूर्व कानून भी शामिल था। यह उस समय के लिए एक क्रांतिकारी कानून था।’
नवाबजादी आलिया सुल्ताना बॉबी – ‘डायनासोर राजकुमारी’, रॉयल फैमिली ऑफ बालासिनोर
नवाबजादी आलिया सुल्ताना बॉबी गुजरात के बालासिनोर के दिवंगत नवाब साहेब की बेटी हैं। वह एक शौकिया प्लेनटॉलोजिस्ट (जीवाश्म विज्ञानी) और कंजर्वेशनिस्ट (संरक्षणवादी) हैं। इतिहास को संरक्षित करने के अपने जुनून के लिए उन्होंने खुद को दुर्लभ डायनासोर के जीवाश्मों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया है। अतीत में डायनासोर उनके पूर्वजों की भूमि पर रहते थे। सुल्ताना बॉबी ने इन विलुप्त प्रजातियों के कीमती अवशेषों की रक्षा करने का बीड़ा उठाया है। वह बालासिनोर के पास राहियोली में जीवाश्म स्थल के संरक्षण के लिए अथक प्रयास करती हैं। सुल्ताना बॉबी ‘डायनासोर राजकुमारी’ या ‘डॉ. डायनासोर’ के नाम से मशहूर हैं। यह उपनाम उन्हें मीडिया और आगंतुकों द्वारा प्यार से दिया गया है। वह विरासत संरक्षण और वैज्ञानिक जिज्ञासा का प्रतीक बन गई हैं।
राजकुमारी मीनल कुमारी सिंह देव – रॉयल फैमिली ऑफ ढेंकनाल, ओडिशा
मीनल कुमारी सिंह देव ढेंकनाल पैलेस की मालकिन हैं। यह पैलेस 200 साल पुराना एक घर है, जिसे उन्होंने हेरिटेज होमस्टे में बदल दिया है। वह एक सशक्त फैशन मूवमेंट का भी नेतृत्व करती हैं। आज की तारीख में उन्होंने ढेंकनाल पैलेस को एक संपन्न हेरिटेज होमस्टे में बदल दिया है,जहां मेहमानों का स्वागत किया जाता है ताकि वे इसके समृद्ध इतिहास का अनुभव कर सकें। लेकिन उनके प्रयास इससे कहीं आगे तक जाते हैं। उन्होंने 45 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले सभी कारीगरों को एक साथ लाया है, जिससे पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने के लिए समर्पित एक जीवंत समुदाय का निर्माण हुआ है। हाथ से पेंट किए गए पट्टचित्र और जटिल ढोकरा आर्ट से लेकर सूती और रेशमी साड़ियों पर खूबसूरती से बुने गए इकत डिजाइन,ब्रास ज्वैलरी और मेटल कास्टिंग के साथ वह सुनिश्चित कर रही हैं कि अतीत के ये आर्ट मॉर्डन वर्ल्ड में भी जीवंत और फलते-फूलते रहें।
हेरिटेज होमस्टे के मैनेजमेंट के अलावा वह सक्रिय रूप से कारीगरों को सशक्त बनाती हैं। उन्होंने महाराजा भगीरथ महेंद्र बहादुर फाउंडेशन की स्थापना की ताकि उन्हें शिक्षा और अपने शिल्प को प्रदर्शित करने के लिए सार्थक मंच प्रदान किया जा सके। अपने ब्रांड के माध्यम से वह इक्कत टेक्सटाइल और डोकरा आर्ट को पूरे जोश के साथ बढ़ावा देती हैं। वह इन पारंपरिक शिल्पों को प्रदर्शनियों और सहयोगों के माध्यम से बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचाती हैं।
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