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सूरज का ‘गुस्सा’ बढ़ाएगा भारत की टेंशन! ISRO ने जारी की चेतावनी- हो सकता है बड़ा ‘रेडियो ब्लैकआउट’
वैज्ञानिकों को सूरज के पास एक अजीब सी हलचल दिखाई दी है, जिससे दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं. वहीं, भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सहित देश भर की एजेंसियों ने संभावित रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति पर कड़ी नजर रखी हुई है.
वैज्ञानिकों को सूरज के पास एक अजीब सी हलचल दिखाई दी है, जिससे दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं. वहीं, भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सहित देश भर की एजेंसियों ने संभावित रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति पर कड़ी नजर रखी हुई है. जब तेज सौर तूफान पृथ्वी की ओर आते हैं तो वे सैटेलाइट्स को खराब कर देते हैं, टेलीविजन सिग्नल में रुकावट डालते हैं और रडार और पावर ग्रिड को प्रभावित करते हैं.
ISRO के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 50 से ज्यादा चालू भारतीय सैटेलाइट्स पर लगातार नजर रखी जा रही है क्योंकि बढ़ी हुई सौर गतिविधि से कम्युनिकेशन, नेविगेशन और सैटेलाइट पेलोड में रुकावट आने का खतरा है.
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) के डायरेक्टर अनिल कुमार ने NDTV को बताया, 'रेडियो ब्लैकआउट की पूरी संभावना है. ISRO की सभी सैटेलाइट्स पर बहुत करीब से नजर रखी जा रही है.' उन्होंने आगे कहा, 'कम्युनिकेशन में कोई भी दिक्कत आने पर तुरंत उस पर काम किया जाएगा.'
उन्होंने कहा कि ग्राउंड स्टेशनों ने पहले ही मिशन कंट्रोल सेंटर्स को अलर्ट जारी कर दिए हैं और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत जवाब देने के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार हैं.
क्यों गुस्सा हुआ सूरज?
सूरज में मौजूदा हलचल एक्टिव रीजन 14366 नाम के मैग्नेटिक रूप से जटिल सनस्पॉट क्लस्टर के अचानक तेज होने से शुरू हुई है. पिछले कुछ दिनों में, इस रीजन में बार-बार विस्फोट हुए, जिससे चार बहुत तेज सोलर फ्लेयर्स निकले, जिसमें एक X8.1-क्लास फ्लेयर भी शामिल है, जो 2026 का अब तक का सबसे शक्तिशाली फ्लेयर है.
NASA ने कन्फर्म किया कि ये फ्लेयर्स 1 फरवरी और 2 फरवरी के बीच अपने चरम पर थे, जिसमें सबसे तेज X8.1 विस्फोट 1 फरवरी को हुआ था. स्पेस वेदर मॉनिटरिंग एजेंसियों ने बताया कि यह घटना अक्टूबर 2024 के बाद से सबसे चमकदार सोलर फ्लेयर थी और 1996 से रिकॉर्ड किए गए टॉप 20 सबसे शक्तिशाली फ्लेयर्स में से एक है, जब मॉडर्न सैटेलाइट मॉनिटरिंग शुरू हुई थी.
सभी विस्फोटों को नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने कैप्चर किया, जो लगातार सूरज की सतह पर होने वाली विस्फोटक घटनाओं पर नजर रखती है. सूरज हर 11 साल में या उसके आस-पास तेज एक्टिविटी के साइकल से गुजरता है, और यह सोलर तूफान की एक्टिविटी इसी सोलर मैक्सिमा का हिस्सा है.
पृथ्वी और भारत पर क्या होगा इसका असर?
इतनी तीव्रता वाले सोलर फ्लेयर्स से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के बहुत बड़े धमाके होते हैं जो रोशनी की गति से पृथ्वी तक पहुंचते हैं. हालांकि ये जमीन पर इंसानों को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन ये पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल की इलेक्ट्रिकली चार्ज्ड परत, आयनोस्फीयर को बुरी तरह से डिस्टर्ब कर सकते हैं.
ये गड़बड़ियां हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो कम्युनिकेशन ब्लैकआउट, नेविगेशन सिग्नल में रुकावट, सैटेलाइट के लिए रेडिएशन एक्सपोजर में बढ़ोतरी और ध्रुवों के पास हाई-एल्टीट्यूड एविएशन के लिए जोखिम पैदा करती हैं. इन तेज तूफानों के कारण तेज अरोरा एक्टिविटी होती है.
भारत की पहली खास सोलर ऑब्ज़र्वेटरी, आदित्य-L1, अब आने वाले तूफान पर नजर रखने में अहम भूमिका निभा रही है. पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर, पृथ्वी-सूर्य L1 लैग्रेंज पॉइंट पर मौजूद आदित्य-L1 भारत को सौर विस्फोटों का सीधा नजारा दिखाता है, इससे पहले कि उनका असर हमारे ग्रह तक पहुंचे.
आदित्य-L1 से मिले डेटा से वैज्ञानिकों को रियल टाइम में सोलर रेडिएशन, मैग्नेटिक फील्ड और एनर्जेटिक पार्टिकल्स को मापने में मदद मिल रही है, जिससे ISRO पहले से चेतावनी जारी कर पा रहा है और जरूरी स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा कर पा रहा है.
वैज्ञानिकों को सूरज के पास एक अजीब सी हलचल दिखाई दी है, जिससे दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं. वहीं, भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सहित देश भर की एजेंसियों ने संभावित रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति पर कड़ी नजर रखी हुई है. जब तेज सौर तूफान पृथ्वी की ओर आते हैं तो वे सैटेलाइट्स को खराब कर देते हैं, टेलीविजन सिग्नल में रुकावट डालते हैं और रडार और पावर ग्रिड को प्रभावित करते हैं.
|| CESSI FLARE ALERT + SPACE WEATHER ADVISORY ||
CODE ♦️ SEVERE
The Sun has launched multiple solar flares over the past 24 hours, the strongest one being an X8.1 flare at 2026/02/01 23:57 UT (flare light curve below). 1/n + pic.twitter.com/4RW89i5ysp
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— Center of Excellence in Space Sciences India (@cessi_iiserkol) February 2, 2026
ISRO के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 50 से ज्यादा चालू भारतीय सैटेलाइट्स पर लगातार नजर रखी जा रही है क्योंकि बढ़ी हुई सौर गतिविधि से कम्युनिकेशन, नेविगेशन और सैटेलाइट पेलोड में रुकावट आने का खतरा है.
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) के डायरेक्टर अनिल कुमार ने NDTV को बताया, ‘रेडियो ब्लैकआउट की पूरी संभावना है. ISRO की सभी सैटेलाइट्स पर बहुत करीब से नजर रखी जा रही है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘कम्युनिकेशन में कोई भी दिक्कत आने पर तुरंत उस पर काम किया जाएगा.’
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उन्होंने कहा कि ग्राउंड स्टेशनों ने पहले ही मिशन कंट्रोल सेंटर्स को अलर्ट जारी कर दिए हैं और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत जवाब देने के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार हैं.
क्यों गुस्सा हुआ सूरज?
सूरज में मौजूदा हलचल एक्टिव रीजन 14366 नाम के मैग्नेटिक रूप से जटिल सनस्पॉट क्लस्टर के अचानक तेज होने से शुरू हुई है. पिछले कुछ दिनों में, इस रीजन में बार-बार विस्फोट हुए, जिससे चार बहुत तेज सोलर फ्लेयर्स निकले, जिसमें एक X8.1-क्लास फ्लेयर भी शामिल है, जो 2026 का अब तक का सबसे शक्तिशाली फ्लेयर है.
— NOAA Space Weather Prediction Center (@NWSSWPC) February 1, 2026
NASA ने कन्फर्म किया कि ये फ्लेयर्स 1 फरवरी और 2 फरवरी के बीच अपने चरम पर थे, जिसमें सबसे तेज X8.1 विस्फोट 1 फरवरी को हुआ था. स्पेस वेदर मॉनिटरिंग एजेंसियों ने बताया कि यह घटना अक्टूबर 2024 के बाद से सबसे चमकदार सोलर फ्लेयर थी और 1996 से रिकॉर्ड किए गए टॉप 20 सबसे शक्तिशाली फ्लेयर्स में से एक है, जब मॉडर्न सैटेलाइट मॉनिटरिंग शुरू हुई थी.
सभी विस्फोटों को नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने कैप्चर किया, जो लगातार सूरज की सतह पर होने वाली विस्फोटक घटनाओं पर नजर रखती है. सूरज हर 11 साल में या उसके आस-पास तेज एक्टिविटी के साइकल से गुजरता है, और यह सोलर तूफान की एक्टिविटी इसी सोलर मैक्सिमा का हिस्सा है.
पृथ्वी और भारत पर क्या होगा इसका असर?
इतनी तीव्रता वाले सोलर फ्लेयर्स से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के बहुत बड़े धमाके होते हैं जो रोशनी की गति से पृथ्वी तक पहुंचते हैं. हालांकि ये जमीन पर इंसानों को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन ये पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल की इलेक्ट्रिकली चार्ज्ड परत, आयनोस्फीयर को बुरी तरह से डिस्टर्ब कर सकते हैं.
ये गड़बड़ियां हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो कम्युनिकेशन ब्लैकआउट, नेविगेशन सिग्नल में रुकावट, सैटेलाइट के लिए रेडिएशन एक्सपोजर में बढ़ोतरी और ध्रुवों के पास हाई-एल्टीट्यूड एविएशन के लिए जोखिम पैदा करती हैं. इन तेज तूफानों के कारण तेज अरोरा एक्टिविटी होती है.
The Sun emitted a strong solar flare on Feb. 3, peaking at 9:08 a.m. ET. NASA’s Solar Dynamics Observatory captured images of the event, which was classified as X1.5. https://t.co/gHptBKDzqkpic.twitter.com/prkVqTWE8O
भारत की पहली खास सोलर ऑब्ज़र्वेटरी, आदित्य-L1, अब आने वाले तूफान पर नजर रखने में अहम भूमिका निभा रही है. पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर, पृथ्वी-सूर्य L1 लैग्रेंज पॉइंट पर मौजूद आदित्य-L1 भारत को सौर विस्फोटों का सीधा नजारा दिखाता है, इससे पहले कि उनका असर हमारे ग्रह तक पहुंचे.
आदित्य-L1 से मिले डेटा से वैज्ञानिकों को रियल टाइम में सोलर रेडिएशन, मैग्नेटिक फील्ड और एनर्जेटिक पार्टिकल्स को मापने में मदद मिल रही है, जिससे ISRO पहले से चेतावनी जारी कर पा रहा है और जरूरी स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा कर पा रहा है.