क्या 2029 में धरती फट जाएगी? एस्ट्रॉयड Apophis को लेकर ISRO ने दिया ताजा अपडेट

Earth Apophis Asteroid Collision: एस्ट्रॉयड अपोफिस के साल 2029 में धरती से टकराव को लेकर इसरो ने ताजा अपडेट दिया है। इसे लेकर नासा ने भी एक घोषणा की है। दोनों एजेंसियां पर एस्ट्रॉयड की कड़ी निगरानी कर रही हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से बात करते हैं…

Earth Asteroid Collision

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Apophis Asteroid Latest Update: क्या साल 2029 में धरती पर तबाही मचेगी? क्या धरती फट जाएगी और दुनिया खत्म हो जाएगी? यह सवाल अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के दिमाग में उथल पुथल मचा रहा है, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने अलर्ट दिया है कि 13 अप्रैल 2029 को 450 फीट चौड़ा और 350 मीटर लंबा एस्ट्रॉयड धरती से टकरा सकता है। इस एस्ट्रॉयड का नाम 99942 अपोफिस है, जो साल 2004 में मिला था।

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यह इस समय धरती की ओर बढ़ रहा है। 13 अप्रैल 2029 को यह एस्ट्रॉयड धरती से सिर्फ 32000 किलोमीटर (20000 मील) दूर होगा। इसरो का नेटवर्क फॉर स्पेस ऑबजेक्ट ट्रेकिंग (NETRA) सिस्टम इसकी लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। इस एस्ट्रॉयड को मिस्त्र के देवता ‘गॉड ऑफ कैओस’ यानी तबाही के देवता, अराजकता का देवता कहा जाता है। इसके धरती से टकराने पर तबाही मचने की आशंका जताई गई है, लेकिन अब इसरो ने इसे लेकर ताजा अपडेट दिया है।

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एस्ट्रॉयड को लेकर नासा-इसरो का अपडेट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहले अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने इसके धरती से टकराने की संभावनाओं को खारिज किया था। अब इसरो ने भी टकराव की संभावनाओं से इनकार कर दिया है। खुद इसरो चीफ सोमनाथ ने बताया है कि साल 2029 में एस्ट्रॉयड अपोफिस धरती से टकराएगा नहीं, बल्कि नुकसान झेलेगा, क्योंकि जब यह धरती से पास से गुजरेगा तो धरती की ग्रैविटी में होगा। जब यह धरती से बगल से गुजरेगा तो उस पर तूफान आएगा, भूकंप के झटके महसूस होंगे।

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लैंडस्लाइड होने से यह छिल जाएगा। कहा जाए तो धरती के बगल से गुजरने पर उसे काफी नुकसान होगा। साथ ही नासा ने घोषणा की है कि जब अपोफिस धरती के पास से गुजरेगा तो नासा का OSIRIS-APEX स्पेसक्राफ्ट 18 महीने तक इसकी स्टडी करेगा। अपोफिस को अमेरिका की किट पीक नेशनल ऑब्जर्वेटरी ने तलाश था। इसकी ट्रैकिंग और इसके ऑर्बिट की मैपिंग करने में गोल्टस्टोन डीप स्पेस कम्युनिकेशन और द ग्रीक बैंक टेलीस्कोप से मिले हाई रेजोल्यूशन रडार डेटा ने मदद की।

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एस्ट्रॉयड अपोफिस के बारे में जानकारियां

एस टाइप का एस्ट्रॉयड और सिलिकेट मैटेरियल से बना, जिसमें लोहा और निकल का मिश्रण है। इसका साइज मूंगफली जैसा है। यह 3 फुटबाल स्टेडियम, INS विक्रमादित्य और नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम जितना बड़ा है। 13 अप्रैल 2029 को 30 मार्च 2036 को यह एस्ट्रॉयड धरती के काफी करीब होगा। एपोफिस की खोज 19 जून 2004 को खगोलविदों रॉय टकर, डेविड थोलेन और फैब्रीज़ियो बर्नार्डी ने अमेरिका के एरिज़ोना में किट पीक नेशनल ऑब्ज़र्वेटरी में की थी।

रडार इमेजिंग से पता चला है कि एपोफ़िस अपनी सबसे लंबी धुरी पर लगभग 450 मीटर (1500 फीट) बड़ा है और यह साइज 5 फुटबाल स्टेडियमों के बराबर और एम्पायर स्टेट बिल्डिंग से भी ऊंचा है। इसकी सबसे छोटी धुरी की माप लगभग 170 मीटर है और इस साइज में यह अंडे के आकार का है, जो अरोकोथ जैसा दिखता है। यदि एपोफिस पृथ्वी से टकराता है तो यह विनाश का कारण बनेगा। इसके टकराव से पैदा होने वाली ऊर्जा परमाणु विस्फोट से पैदा होने वाली 1000 मेगाटन से अधिक TNT के बराबर होगी। अपोफिस धरती से सैटेलाइट से भी नहीं टकराएगा।

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इस एस्ट्रॉयड को धरती के पास से गुजरते हुए यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया से देखा जा सकेगा। जहां यह आकाश में घूमते हुए एक चमकीले तारे के रूप में नजर आएग। साल 2036 में इसे बिना दूरबीन के देखना संभव नहीं होगा।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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