जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के साथ हुई एक भीषण मुठभेड़ में भारतीय सेना के 7 जवान घायल हो गए हैं. यह घटना किश्तवाड़ के छात्रू इलाके के सोनार क्षेत्र में हुई जहाँ सुरक्षा बल एक सुनियोजित सर्च ऑपरेशन चला रहे थे. दोपहर के समय जब सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम आगे बढ़ रही थी, तभी पहले से घात लगाकर बैठे आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर ने इस मिशन को 'ऑपरेशन त्रिशी-I' नाम दिया है. घायल जवानों को तुरंत वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है जहाँ उनका इलाज चल रहा है. चुनौतीपूर्ण हालात और कठिन रास्तों के बावजूद सेना के जवानों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया है.
आतंकियों के होने की खबर और सुरक्षा घेरा मजबूत
अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा बलों का सामना दो से तीन विदेशी आतंकियों के एक समूह से हुआ है. आशंका जताई जा रही है कि ये आतंकी पाकिस्तान स्थित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए हैं. घेराबंदी तोड़ने की कोशिश में आतंकियों ने न केवल गोलियां चलाईं बल्कि सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड भी फेंके. स्थिति को देखते हुए सेना, सीआरपीएफ और पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया है ताकि घेरे को और ज्यादा सख्त किया जा सके. पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और आतंकियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है. पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच चल रहे इस ऑपरेशन में हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा है.
यह भी पढ़ें: भारत को मिली बड़ी जिम्मेदारी, PM मोदी के कंधे पर मिडिल ईस्ट में शांति का दारोमदार! ट्रंप ने किया इनवाइट
ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से तलाश जारी
आतंकियों को ढेर करने के लिए सुरक्षा बल हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. घने जंगलों और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकी भाग न सकें, इसके लिए आसमान से ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है. साथ ही जमीन पर स्निफर डॉग्स की मदद ली जा रही है ताकि आतंकियों के छिपने के ठिकानों को जल्दी से तलाशा जा सके. सेना ने कहा है कि ऑपरेशन अभी भी जारी है और अतिरिक्त जवानों को मोर्चे पर तैनात किया गया है. सेना और नागरिक प्रशासन के बीच गहरा तालमेल बना हुआ है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी इस कठिन इलाके का फायदा उठाकर लंबी लड़ाई की फिराक में हैं.
गणतंत्र दिवस से पहले आतंकी साजिशों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
जम्मू क्षेत्र में इस साल आतंकियों के साथ मुठभेड़ की यह तीसरी बड़ी घटना है. इससे पहले जनवरी में कठुआ के बिल्लावर इलाके में भी इसी तरह की मुठभेड़ देखने को मिली थी. दिसंबर से ही जम्मू के जंगलों में छिपे करीब तीन दर्जन आतंकियों का सफाया करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है. गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है क्योंकि खुफिया जानकारी मिली है कि पाकिस्तानी हैंडलर घुसपैठ की कोशिशों में लगे हुए हैं. सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और आतंकियों के किसी भी नापाक मंसूबे को कामयाब न होने दिया जाए.
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के साथ हुई एक भीषण मुठभेड़ में भारतीय सेना के 7 जवान घायल हो गए हैं. यह घटना किश्तवाड़ के छात्रू इलाके के सोनार क्षेत्र में हुई जहाँ सुरक्षा बल एक सुनियोजित सर्च ऑपरेशन चला रहे थे. दोपहर के समय जब सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम आगे बढ़ रही थी, तभी पहले से घात लगाकर बैठे आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर ने इस मिशन को ‘ऑपरेशन त्रिशी-I’ नाम दिया है. घायल जवानों को तुरंत वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है जहाँ उनका इलाज चल रहा है. चुनौतीपूर्ण हालात और कठिन रास्तों के बावजूद सेना के जवानों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया है.
आतंकियों के होने की खबर और सुरक्षा घेरा मजबूत
अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा बलों का सामना दो से तीन विदेशी आतंकियों के एक समूह से हुआ है. आशंका जताई जा रही है कि ये आतंकी पाकिस्तान स्थित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए हैं. घेराबंदी तोड़ने की कोशिश में आतंकियों ने न केवल गोलियां चलाईं बल्कि सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड भी फेंके. स्थिति को देखते हुए सेना, सीआरपीएफ और पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया है ताकि घेरे को और ज्यादा सख्त किया जा सके. पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और आतंकियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है. पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच चल रहे इस ऑपरेशन में हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा है.
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ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से तलाश जारी
आतंकियों को ढेर करने के लिए सुरक्षा बल हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. घने जंगलों और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकी भाग न सकें, इसके लिए आसमान से ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है. साथ ही जमीन पर स्निफर डॉग्स की मदद ली जा रही है ताकि आतंकियों के छिपने के ठिकानों को जल्दी से तलाशा जा सके. सेना ने कहा है कि ऑपरेशन अभी भी जारी है और अतिरिक्त जवानों को मोर्चे पर तैनात किया गया है. सेना और नागरिक प्रशासन के बीच गहरा तालमेल बना हुआ है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी इस कठिन इलाके का फायदा उठाकर लंबी लड़ाई की फिराक में हैं.
गणतंत्र दिवस से पहले आतंकी साजिशों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
जम्मू क्षेत्र में इस साल आतंकियों के साथ मुठभेड़ की यह तीसरी बड़ी घटना है. इससे पहले जनवरी में कठुआ के बिल्लावर इलाके में भी इसी तरह की मुठभेड़ देखने को मिली थी. दिसंबर से ही जम्मू के जंगलों में छिपे करीब तीन दर्जन आतंकियों का सफाया करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है. गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है क्योंकि खुफिया जानकारी मिली है कि पाकिस्तानी हैंडलर घुसपैठ की कोशिशों में लगे हुए हैं. सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और आतंकियों के किसी भी नापाक मंसूबे को कामयाब न होने दिया जाए.