'अंतिम यात्रा' पर भी जातिवाद, आखिर Odisha में शमशान घाट को लेकर क्यों छिड़ा विवाद?

Odisha Crematorium Controversy: इंसान की अंतिम यात्रा जातिवाद में फंस गई है। ओडिशा में शमशान घाट को लेकर विवाद छिड़ा है। अल्टीमेटम तक दे दिया गया है, जानिए मामला…

Controversial Crematorium

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Odisha Crematorium Controversy Brahmin VS Dalit: इंसान और विवादों का हमेशा से ही नाता रहा है, लेकिन इस बार विवाद की वजह इंसान की ‘अंतिम यात्रा’ है, जो जातिवाद में फंस गई है। दरअसल, ओडिशा में एक शमशान घाट को लेकर विवाद छिड़ा है। ब्राह्मण और दलित आमने-सामने हैं और दलितों ने ब्राह्मणों और शमशान घाट की देखभाल करने वाले निकाय को अल्टीमेटम दे दिया है कि वे अपनी हरकतों से बाज आएं और बोर्ड हटा लें, नहीं तो वे सड़कों पर उतरेंगे। आंदोलन छेड़ेंगे और उसके परिणामस्वरूप जो होगा, उसके लिए सरकार व जिला प्रशासन जिम्मेदार होंगे।

 

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1928 में बना शमशान घाट, निकाय करता संचालन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओडिशा के केद्रपाड़ा में नगर पालिका ने हजारीबागीचा इलाके में बले शमशान घाट के एंट्री गेट पर बोर्ड लगा दिया है। इस बार बोर्ड पर लिखा है कि यहां सिर्फ ब्राह्मणों के अंतिम संस्कार होंगे। सरकारी फंड जारी करके शमशान घाट का नवीनीकरण किया गया और इसके बाद नगर पालिका ने शमशान घाट के गेट पर ऑफिशियल बोर्ड भी लगा दिया। तर्क दिया गया कि 1928 में बने शमशान घाट में सिर्फ ब्राह्मणों के अंतिम संस्कार होते हैं। अन्य जातियों के लोग अंतिम संस्कार करने के लिए दूसरे शमशान घाट में जाते हैं। इसका दलितों ने विरोध जताया है और अल्टीमेटम तक दे दिया है।

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जातिगत भेदभाव बढ़ाने, अधिकारों का उल्लंघन का आरोप

दलितों ने का कहना है कि 1950 में जाति असमानता को संविधान के तहत गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया था, इसके बावजूद ब्राह्मण आज तक उस प्रथा को जारी रखे हुए हैं। वहीं ओडिशा दलित समाज की जिला इकाई के अध्यक्ष नागेंद्र जेना ने कहा कि मुझे यह जानकर काफी हैरानी हुई कि नगर पालिका काफी समय से केवल ब्राह्मणों के लिए शमशान घाट का रखरखाव कर रही है। वह ऐसा करके कानून तोड़ रही है। जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दे रही है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ‘केवल ब्राह्मणों’ का शमशान घाट, ऐसा कहना सभी जातियों के लोगों को संविधान के अनुसार मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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2019 में आए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया

वहीं केंद्रपाड़ा नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी प्रफुल्ल चंद्र बिस्वाल से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि हां मामला संज्ञान में आया है। हम इसकी जांच कर रहे हैं। कथित जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। बैठक बुलाई गई है, जिसमें शमशान घाट पर फैसला लिया जाएगा। बता दें कि मद्रास उच्च न्यायालय ने 2019 में एक गांव में दलितों के लिए अलग शमशान घाट के लिए जमीन आवंटित करने पर तमिलनाडु सरकार की आलोचना की थी। अदालत ने इसके पीछे तर्क दिया था कि दलितों के लिए एक अलग श्मशान घाट उपलब्ध कराने का मतलब जातिगत असमानता को बढ़ावा देना है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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