खून से सनी दीवारें, लाशों से भरा कुआं; 10 मिनट 1650 राउंड फायरिंग, 105 साल बाद भी हरे Jallianwala Bagh हत्याकांड के जख्म

Jallianwala Bagh Massacre Memoir: आज इतिहास के उस काले दिन को याद करते हैं, जिस दिन अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग में नरसंहार किया था। बैसाखी का मेला देखने आई भीड़ पर पार्क के दरवाजे बंद करके अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई थीं। दीवारें खून से सन गई थीं और कुआं लाशों से भर गया था। आज भी उस हत्याकांड की यादें जेहन में ताजा हैं।

Jallianwala Bagh Massacre 105th Anniversary

Jallianwala Bagh Massacre 105th Anniversary

Jallianwala Bagh Massacre 105th Anniversary: खून से सनी दीवारें, लाशों से भरा कुआं, दनादन चलती गोलियां, चीखते चिल्लाते बच्चे-महिलाएं…डेढ़ महीने का बच्चा भी उन निर्दयी अंग्रेजों को नजर नहीं आया था। लोगों से खचाखच पार्क भरा था और चारों ओर के दरवाजे बंद करके अंग्रेज उनके ऊपर 10 मिनट तक फायरिंग करते रहे। करीब 1650 राउंड फायरिंग हुई थी। ताबड़तोड़ बिना रूके हुई गोलीबारी में करीब 1500 लोग मारे गए और 2000 से ज्यादा लोग गंभीर घायल हुए।

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महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग गोलियों से बचने के लिए कुएं में कूद गए। आज भी वह खूनी कुआं पार्क में बना है। दीवारों पर गोलियां के निशान हैं। सरकारी कागजों में सिर्फ 484 लोगों के मरने का रिकॉर्ड है, लेकिन भारत देश के इतिहास में दर्ज उस काले दिन के जख्म आज 105 साल बाद भी ताजा हैं। जी हां, आज Jallianwala Bagh नरसंहार की बरसी है। 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के त्योहार पर अंग्रेजों ने पंजाब के अमृतसर जिले में स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) के पास बने पार्क में नरसंहार किया था।

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क्या हुआ था 13 अप्रैल 1919 के दिन?

बैसाखी का त्योहार था। जलियांबाग में मेला लगा था और एक राजनीतिक कार्यक्रम भी इस मेले में करने की प्लानिंग क्रांतिकारियों की थी। अंग्रेजों के रॉलेट एक्ट (‎Rowlatt Act 1919) का विरोध जताना था। बच्चे-महिलाएं और बुजुर्ग मेला घूम रहे थे कि क्रांतिकारियों के मेले में जुटने की खबर मिलते ही ब्रिगेडियर जनरल डायर (General Dyer) 90 सैनिकों की टुकड़ी लेकर आ गया। उसने बाग के चारों दरवाजे बंद करवा दिए।

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बाग में जुटी भीड़ पर चेतावनी दिए बिना अंधाधुंध फायरिंग करवाई। आदेश था- जहां ज्यादा लोग दिखें, गालियों से छलनी कर दो। पूरे अमृतसर में गोलियों की आवाजें और लोगों की चीखें गूंजी। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं सब मारे गए। मरने वालों में डेढ़ महीने का बच्चा भी था। इस नरसंहार ने भगत सिंह पैदा किया। ऊधम सिंह के सीने में बदले की आग लगाई। महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया। इसी नरसंहार ने भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।

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क्या था अंग्रेजों का काला कानून रोलेट एक्ट?

जलियांवाला बाग नरसंहार अंग्रेजों के काले कानून Rowlatt Act के कारण हुआ था। यह एक्ट 8 मार्च 1919 को ब्रिटिश सरकार ने पारित किया था। सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर यह एक्ट पास हुआ था। इसके तहत ब्रिटिश सरकार को भारत में हो रही राजनीतिक गतिविधियों का दमन करने का अधिकार मिला था। इसके तहत किसी भी शख्स को बिना केस चलाए करीब 2 साल तक जेल में रखा जा सकता था।

पंजाब समेत पूरे भारत में इस एक्ट का विरोध हुआ था। एक्ट के विरोध में महात्मा गांधी ने 6 अप्रैल 1919 को ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ शुरू किया था, जो राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में पूरे देश में उभर रहा था। 9 अप्रैल, 1919 को पंजाब में 2 क्रांतिकारी नेताओं, सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू को गिरफ्तार करके अंग्रेजों ने जेल में डाल दिया था। इस बीच अंग्रेजों ने मार्शल लॉ लागू कर दिया। ब्रिगेडियर जनरल डायर को पंजाब में कानून व्यवस्था संभालने के लिए नियुक्त किया गया। इसके लिए वह जालंधर से अमृतसर आया।

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ब्रिटिश सरकार को मांगनी पड़ी माफी

जलियांवाला बाग नरसंहार पर पूरी दुनिया ने शोक जताया, लेकिन ब्रिटेन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। न कभी माफी मांगी गई और न ही दुख जताया गया। हालांकि 1997 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ भारत दौरे पर आईं तो उन्होंने जलियांवाला बाग जाकर नरसंहार में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी थी। 2013 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन (David Cameron) भी श्रद्धांजलि देने स्मारक पर आए थे।

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उन्होंने विजिटर्स बुक में भी लिखा था कि ब्रिटेन के इतिहास की यह सबसे शर्मनाक घटना थी। वहीं नरसंहार के बाद विरोध की आग भड़की तो दबाव में आकर नरसंहार की जांच के लिए हंटर कमीशन बनाया गया। जनरल डायर को डिमोट करके कर्नल बनाया गया। साथ ही उन्हें ब्रिटेन वापस भेजा गया। भारतीयों के विरोध जताने पर 1920 में जनरल डायर को नौकरी से रिजाइन देना पड़ा। 7 साल बाद 1927 में ब्रेन हेमरेज होने से जनरल डायर की मौत हो गई।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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