CISF ने देश के हवाई अड्डों की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए IIT रोपड़ के साथ एक समझौता किया है. इस साझेदारी का उद्देश्य तकनीकी सहयोग से हवाई अड्डों के डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित बनाना और खतरों से निपटना है. नागरिक उड्डयन क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत और अभेद्य बनाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के एयरपोर्ट सेक्टर ने IIT रोपड़ के साथ एक अहम समझौते पर साइन किए हैं. इस समझौते के तहत CISF के जवानों को साइबर सुरक्षा में ट्रेंड करने के लिए 6 हफ्ते की खास ट्रेनिंग दी जाएगी.

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इसका क्या है मकसद?

-हवाई अड्डों के महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे को साइबर हमलों से बचाना.
-नई तकनीक और अनुसंधान का इस्तेमाल करके सुरक्षा प्रणाली को बेहतर करना.
-C.I.S.F कमांडो को आधुनिक साइबर खतरों से निपटने के लिए ट्रेनिंग देना.

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सुरक्षा की नई चुनौतियां और CISF की तैयारी

आपको बता दें कि साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के DsGP/IsGP सम्मेलन में रखे गए विजन में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और राज्य पुलिस संगठनों के भीतर एक समर्पित साइबर कमांडो कैडर विकसित करने पर जोर दिया गया था. CISF के DG प्रवीर रंजन के नेतृत्व में, बल ने उभरते हुए साइबर खतरों को पहचानने, उनसे निपटने और उनका तुरंत समाधान करने के लिए खास जवानों की एक टीम तैयार करने का बीड़ा उठाया है. हवाई अड्डे हमारे देश के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों में से एक हैं. ऐसे में यहां होने वाला कोई भी साइबर क्राइम बड़े पैमाने पर सुरक्षा, संचालन और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है. इसी खतरे को देखते हुए यह विशेष कैडर तैयार किया जा रहा है.

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