इयरफोन एक इलेक्ट्रिक उपकरण है, जिसकी मदद से लोग गाने सुन सकते हैं। इन दिनों हर किसी के कानों में आपको यह पहने हुए दिख जाएंगे। इयरफोन लोगों की सहूलियत के लिए बनाया गया उपकरण था जिसकी मदद से वे गाना पर्सनल लेवल पर सुन सकें या फिर किसी निजी काम को दूसरों से सुरक्षित रखकर कर सकें। मगर किसी भी चीज का इस्तेमाल ज्यादा हो जाए, तो उसके नुकसान झेलने ही पड़ते हैं। इयरफोन्स के अधिक इस्तेमाल से कान डैमेज हो सकते हैं और दिमाग पर भी असर हो सकता है, मगर क्या आप जानते हैं अगर हम एक इयरफोन के पेयर को और लोगों के साथ शेयर करते हैं और यूज करते हैं, तो यह भी हमारे लिए सही नहीं है। जी हां, डॉक्टर अदितिज धमिजा बताते हैं कि ऐसे इयरफोन यूज करने से कान में संक्रमण और कई गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।
Earphone शेयर करने के जोखिम क्या हैं?
इयरफोन शेयर करने से कानों में बैक्टीरिया और वायरस से होने वाले फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
एक ही इयरफोन का उपयोग अगर कई लोग करेंगे, तो उससे कानों में गंदगी और मलबा भी दूसरे लोगों तक ट्रांसफर हो सकता है।
कान के अंदर का इन्फेक्शन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकता है।
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Earphone शेयर करने के नुकसान
कान में संक्रमण होना।
कान का पर्दा फटना, जिसे इयरड्रम रपचर भी कहते हैं।
कान में दर्द और सूजन होना।
सुनने में समस्या।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
कौन-कौन सी बीमारियों का रिस्क?
इयरफोन से होने वाली कान की बीमारियों में इयर इंफेक्शन (Otitis externa), हेयर फॉलिकल इन्फेक्शन और हेडफोन ईयर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, बार-बार इयरफोन्स का इस्तेमाल करने से कान के अंदर मौजूद सेंसिटिव एरियाज को नुकसान हो सकता है, जिससे सुनने में दिक्कत पैदा हो सकती है।
22 वर्षीय पीड़ित की बाल-बाल बची जान
डॉक्टर अदितिज ने बताया कि उनके पास एक 22 साल का युवा पुरुष पहुंचा था। उसके कान में हल्का दर्द था और उसे हल्का बुखार भी था। उसने इसे अनदेखा किया, लेकिन दर्द बढ़ता ही चला गया। फिर, एक रात उसके कान में भयंकर दर्द और पीले रंग का तरल पदार्थ रिसने लगा। जांच करने के बाद से पता चला कि उसके कान का परदा फट गया था। इसे इयरड्रम रप्चर भी कहते हैं, जिसका प्रमुख कारण इयरफोन शेयर करके यूज करना था।
Eardrum Rupture कैसी स्थिति है?
इयरड्रम रप्चर यानी कान का पर्दा फटना होता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें कान की नली को मध्य कान से अलग करने वाली एक पतली झिल्ली में छेद या वह फट जाता है, जिससे सुनने की क्षमता में कमी या परेशानी हो सकती है। कान का पर्दा फटने वाली स्थिति को टिम्पेनिक झिल्ली भी कहते हैं। कान के पर्दे फटने के लक्षणों में कान का संक्रमण, अचानक कानों में प्रेशर पड़ना और कान में चोट लगना शामिल है। कानों का संक्रमण शेयरिंग वाले इयरफोन्स यूज करने से भी हो सकता है।
क्या बोले डॉक्टर?
कर्नाटक के डॉक्टर अदितिज धमिजा बताते हैं कि इयरफोन सिर्फ संगीत सुनने के लिए नहीं हैं, वे कानों के बीच बैक्टीरिया भी फैलाते हैं। इससे होने वाला संक्रमण मास्टॉयड हड्डी तक फैल सकता है, जो दिमाग से जुड़ी होती है। अगर इलाज समय पर न किया जाए, तो बैक्टीरिया मस्तिष्क तक पहुंच सकता है, जिससे जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
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संक्रमण होने के कुछ लक्षण
अगर कोई अपने इयरफोन को शेयर करता है और उसे कभी अचानक कान में दर्द, सूजन, बदबू या सुनने में परेशानी महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इन संकेतों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।
डॉक्टर ने दिए कुछ बचाव के उपाय
- बिना सही साफ-सफाई के इयरफोन कभी भी किसी के साथ शेयर न करें।
- कोशिश करें कि आप किसी के साथ भी इसे शेयर न करें।
- बैक्टीरिया के निर्माण से बचने के लिए इन्हें नियमित रूप से साफ करें।
- अगर आपको लगातार कान में दर्द या कोई डिस्चार्ज महसूस हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- अपने कानों की भी नियमित रूप से सफाई करें।
- ऐसे लोगों को इयरफोन न दें, जिन्हें कान का कोई संक्रमण या स्किन इंफेक्शन की समस्या रहती है।
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Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।