Saturday, December 3, 2022
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राजस्थान में बगावत के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हो सकते हैं दिग्विजय सिंह

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कांग्रेस अध्यक्ष बनने के संभावित दावेदार के रूप में उभरे हैं। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने कहना है, क्योंकि राजस्थान में एक अभूतपूर्व विद्रोह के मद्देनजर अगले महीने के आंतरिक चुनाव को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने में महज दो दिन शेष हैं।

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75 वर्षीय सिंह केरल में पार्टी की भारत जोड़ी यात्रा में भाग ले रहे थे, लेकिन गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने के लिए तैयार हैं। अध्यक्ष पद के लिए पूर्व पसंदीदा, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बगावत से कांग्रेस आलाकमान आहत है। कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवार गहलोत की आज पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात हो सकती है।

एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए गहलोत ने राजस्थान में हुए टकराव को छोटी-मोटी घटना बताते हुए कहा कि वह सोनिया गांधी के अनुशासन में काम करेंगे। उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि जैसा सोनिया गांधी चाहेंगी उसी मुताबिक फैसले होंगे।

उन्होंने कहा, ”पार्टी की परंपरा 50 सालों से देख रहा हूं। नंबर वन जो होता है कांग्रेस अध्यक्ष, इंदिरा जी के वक्त से देख रहा हूं, राजीव जी के वक्त से देख रहा हूं, नरसिम्हा राव या अभी सोनिया गांधी जी हैं, हमेशा कांग्रेस में इतना अनुशासन है। इसलिए आज पार्टी संकट में, अगर 44 या 55 (लोकसभा सीटों) पर आ गए तब भी देश में यदि कोई नेशनल पार्टी है तो एकमात्र कांग्रेस पार्टी है। उसकी नेता सोनिया गांधी हैं। सोनिया गांधी जी के अनुशासन में पूरे देश की कांग्रेस है।”

वर्तमान में केवल पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा है कि वह 30 सितंबर को नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी तिरुवनंतपुरम के सांसद को एकमात्र दावेदार बनने से बचाना चाहती है। एक नेता ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा, “इसलिए गहलोत वहां (राजस्थान में) रह सकते हैं और दिग्विजय सिंह लड़ाई में अधिक ताकत हासिल करेंगे।”

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भारत जोड़ी यात्रा के साथ कांग्रेस जमीनी स्तर पर पार्टी में जान फूंकने की कोशिश में जुटी हुई है। पार्टी में ऊर्जा का संचार करना और वंशवाद की राजनीति की आलोचना को कुंद करने के लिए आंतरिक लोकतंत्र का प्रदर्शन करना था। गांधी परिवार ने घोषणा की कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।

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