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क्या है DIGIPIN और Know Your DIGIPIN, सही एड्रेस और पिन कोड जानना कैसे हुआ आसान?

अब अपना सही एड्रेस और पिन कोड जानना और भी आसान होने वाला है। संचार मंत्रालय ने डाक विभाग 27 मई 2025 को Know Your DIGIPIN और Know Your PIN Code नाम के दो प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं। इससे पार्सल पहुंचाना और भी आसान हो जाएगा। यह कदम नेशनल जियोस्पैशियल पॉलिसी 2022 के तहत उठाया गया है। आइए जानते हैं इन दोनों प्लेटफॉर्मों के बारे में...

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Edited By : News24 हिंदी Updated: May 29, 2025 11:48
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यूजर्स के लिए यह बड़ी काम की खबर है। आप इस खबर को बिल्कुल भी स्किप मत करें। आप इस खबर को नीचे तक जरूर पढ़ें। बता दें कि अब अपना सही एड्रेस और पिन कोड जानना और भी आसान होने वाला है। संचार मंत्रालय ने डाक विभाग 27 मई 2025 को Know Your DIGIPIN और Know Your PIN Code नाम के दो प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं। ये प्लेटफॉर्म न सिर्फ एड्रेस की सटीक पहचान में मदद करेंगे, बल्कि डिलीवरी को भी आसान बनाएंगें। यह कदम नेशनल जियोस्पैशियल पॉलिसी 2022 के तहत उठाया गया है।

क्या है DIGIPIN?

DIGIPIN की बात करें तो यह एक डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर(Digital Postel Index Numbar), एक डिजिटल और जियो-कोड किया गया एड्रेस सिस्टम है। इसे IIT हैदराबाद और ISRO के NRSC के साथ मिलकर बनाया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से हर जगह को एक खास डिजिटल कोड प्रदान किया जाएगा, जिससे पार्सल पहुंचाना काफी आसान हो जाएगा।

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क्या है Know Your DIGIPIN?

बता दें कि DIGIPIN मोबाइल की लोकेशन ऑन करके या लोकेशन के कोऑर्डिनेट डालकर जान सकते हैं। इससे पता बिल्कुल सटीक रहेगा और आपको आसानी मिलेगी। डिलिवरी और सरकारी सेवाएं समय पर मिलेंगी। सरकार और आम लोग दोनों ही इसका लाभ उठा सकते हैं।

जानें DIGIPIN कैसे करता है काम?

अगर इसकी बात करें तो यह आपके मौजूदा एड्रेस के साथ जोड़ दिया जाएगा, जिसे GIS टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया है। बता दें कि यह एक ओपन सोर्स सिस्टम है, जिसे कोई भी GitHub से डाउनलोड कर सकता है।

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क्या है Know Your PIN Code पोर्टल?

इस पोर्टल की बात करें तो यह पोर्टल सेटेलाइट तकनीक से देशभर के पोस्टल एरिया की मैपिंग का पता लगाएगा। लोग अपनी लोकेशन के आधार पर सही पिनकोड जान सकते हैं। यूजर इसमें फीडबैक भी दे सकते हैं, जिससे पिनकोड डेटाबेस और बेहतर होगा। इन डिजिटल टूल्स के आने से अब एड्रेस की पहचान सिर्फ नाम या गली नंबर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर लोकेशन का एक डिजिटल एड्रेस होगा। इससे ई-कॉमर्स, आपदा प्रबंधन और सरकारी सेवाओं में बेहतर प्लानिंग और तेज डिलीवरी संभव होगी।

First published on: May 29, 2025 11:48 AM

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