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सोशल मीडिया के इस खतरनाक चैलेंज ने ली 9 साल की बच्ची की जान, कहीं आपका बच्चा तो नहीं देख रहा ये ट्रेंड?

एक वायरल वीडियो…और कुछ ही मिनटों में सब खत्म! 9 साल की बच्ची ने मजाक समझकर ऐसा चैलेंज किया, जिसने उसकी जान ले ली. आखिर क्या है ये खतरनाक ट्रेंड, जिससे हर पैरेंट को सतर्क रहने की जरूरत है?

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Written By: Mikita Acharya Updated: Mar 20, 2026 16:10
जानलेवा बना सोशल मीडिया ट्रेंड.

Dangerous Social Media Challenge: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले कुछ चैलेंज मजाक नहीं, जानलेवा भी साबित हो सकते हैं. टेक्सास की एक 9 साल की बच्ची की मौत ने इस खतरे को फिर से सामने ला दिया है. मासूम जिज्ञासा और एक वीडियो की नकल ने एक खुशहाल परिवार की दुनिया उजाड़ दी. यह घटना हर माता-पिता के लिए चेतावनी है कि बच्चों की ऑनलाइन दुनिया पर नजर रखना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.

खतरनाक चैलेंज ने ली जान

टेक्सास के एक परिवार की 9 साल की बेटी, जैकलिन के ब्लैकवेल, की मौत एक सोशल मीडिया चैलेंज में हिस्सा लेने के दौरान हो गई. यह ब्लैकआउट या चोकिंग चैलेंज कहलाता है, जिसमें बच्चे सांस रोकने की कोशिश करते हैं, जब तक वे बेहोश न हो जाएं. इसी खतरनाक कोशिश में उसकी जान चली गई.

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वीडियो देखकर आया था आइडिया

बच्ची ने यह चैलेंज सोशल मीडिया पर देखा था. उसने अपनी दादी को भी यह वीडियो दिखाया था, जिन्होंने उसे ऐसा कभी न करने की सलाह दी थी. लेकिन बच्चों की जिज्ञासा कई बार उन्हें जोखिम भरे कदम उठाने पर मजबूर कर देती है.

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खामोशी ने खड़ा किया शक

घटना वाले दिन सुबह बच्ची स्कूल जाने से पहले घर के बाहर खेलने गई थी. उसके पिता को अचानक अजीब सी खामोशी महसूस हुई. जब उन्होंने जाकर देखा, तो बेटी बेहोश हालत में मिली. पिता कहना है कि वह पल उनकी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव था. उन्होंने तुरंत बच्ची को बचाने की कोशिश की, उसे रस्सी से हटाया और CPR भी दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. यह हादसा उनके लिए एक ऐसा सदमा बन गया, जिसे वह कभी भूल नहीं पाएंगे.

कैसे रखें बच्चों का ध्यान

  • आज के जमाने में बच्चो को मोबाइल से दूर रखना आसान नहीं है. लेकिन उन पर नजर रखी जा सकती है ये देखा जा सकता है कि वो फोन में क्या कर रहे हैं और किस तरह का कंटेट कन्ज्यूम कर रहे हैं.
  • इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि बच्चों के साथ खुला संवाद और समय पर निगरानी कितनी जरूरी है. बच्चों को डराने के बजाय उनसे बात करें, उनके व्यवहार को समझें 
  • बच्चों की आपनी प्राइवेट होती है. लेकिन अगर बच्चा बहुत ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा है और उसके व्यवहार में भी बदलाव है तो उसके फोन की जांच करें.

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है. अगर थोड़ी सी सतर्कता बरती जाए, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है. 

ये भी पढ़ें- जानलेवा ऑनलाइन गेम्स से ऐसे रखें अपने बच्चों को सुरक्षित

First published on: Mar 20, 2026 04:10 PM

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