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​​’रॉकी हैंडसम’ की रिलीज को 9 साल पूरे, निशिकांत कामत ने जॉन अब्राहम से करवाया बेस्ट परफॉरमेंस

​​'रॉकी हैंडसम' आज ही के दिन 9 साल पहले सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इसे जॉन अब्राहम के करियर की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है।

Author Edited By : Ishika Jain Updated: Mar 25, 2025 12:33
Rocky Handsome
Rocky Handsome File Photo

सुभाष के झा’

​​’रॉकी हैंडसम’ जॉन अब्राहम के करियर की बेस्ट परफॉरमेंस में से एक है। निशिकांत कामत के डायरेक्शन में बनी ​​’रॉकी हैंडसम’ की रिलीज को आज 9 साल पूरे हो गए हैं। साल 2020 में निशिकांत कामत का निधन हो गया था, वो बॉलीवुड के कामयाब डायरेक्टर्स में से एक थे। उनका जॉन अब्राहम को छोड़कर मुंबई में शायद ही कोई दोस्त था, जिनके साथ उन्होंने ‘फाॅर्स’ और ​​’रॉकी हैंडसम’ जैसी मूवीज की थीं। निशिकांत कामत ऐसे डायरेक्टर थे, जो जॉन की शारीरिकता के साथ-साथ उनकी भावनात्मक शक्तियों को भी समझते थे।

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रॉकी को नहीं है किसी बात डर

फिल्म में कबीर/रॉकी के पास जीने के लिए कुछ नहीं है, उसका कोई परिवार नहीं है और इसलिए उसे किसी बात का डर नहीं है। लेकिन एक दिन सब बदल जाता है। एक लड़की बिन बुलाए फिश करी रॉकी के घर में लाती है और उसकी लाइफ में बहुत कुछ बदल जाता है। फिल्म में देखने को मिलता है कि नाओमी की दखलंदाजी से किसी भी तरह के इमोशनल सरेंडर के प्रति रॉकी के प्रतिरोध को दर्शाती है। वो आत्म-विनाश का इंतजार कर रहा शख्स है।

मां डबल-क्रॉस करने पर ड्रग डीलर करता है किडनैप

चाइल्ड आर्टिस्ट दीया चालवाड की एक्टिंग बेहद जबरदस्त है। उन्होंने बहुत कॉन्फिडेंस के साथ एक्टिंग की है। इन दोनों के बीच का रिश्ता लिखे गए सीन में शाइन करता है, जो उस दर्द को दिखाता है, जो इनको भाग्य पर छोड़ दिए जाने पर भुगतना पड़ता है। एक सीक्वेंस है, जहां नाओमी रॉकी को बताती है कि कैसे उसकी नशेड़ी मां उसे ‘डस्टबिन’ कहकर बुलाती है। रॉकी सिर्फ सुनता है। कहानी के पहले 20 मिनट में इन दोनों के बीच सारी बॉन्डिंग होती है। एक बार जब नाओमी को ड्रग डीलर किडनैप कर लेता है, जिसे नाओमी की मां डबल-क्रॉस करती है, कहानी में मूड बदलने के लिए कामत हमें ये दिखाने के लिए गियर बदलते हैं कि हमारा सिनेमा अपनी स्वदेशीता को त्यागे बिना कैसे कोरियाई हो सकता है।

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डायरेक्टर ने भी की जबरदस्त एक्टिंग

डायरेक्टर निशिकांत कामत सबसे मजबूत दुश्मन के रूप में नजर आते हैं। सिर मुंडा हुआ, नशीली चमकती साफ आंखें, परफेक्ट विलेन दीखते हैं। एक सीन में जहां उनके बॉस (उदय टिकेकर) उनके साथ बुरा बर्ताव करते हैं और उनका अपमान करते हैं, कामत अपनी क्रूरता समाप्त होने के बाद खून थूकते हैं। इसके अलावा पुलिस अधिकारी बने शरद केलकर की परफॉरमेंस भी फैंस को इम्प्रेस करती है। वो उस रोल में गहराई से डूब जाते हैं। निशिकांत कामत आखिर तक मोमेंटम बनाए रखते हैं।

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पुराने जमाने के लगते हैं आइटम सॉन्ग्स

फिल्म कोरियाई ब्रांड के स्टंट से मंत्रमुग्ध कर देती है, नशीली दवाओं के लेन-देन से जुड़े आइटम सॉन्ग्स बेहद पुराने जमाने के लगते हैं। जॉन अब्राहम अपने दुश्मनों पर जमकर निशाना साधते हैं। वो दर्द जताने में भी वैसे ही माहिर हैं। श्रुति हासन के साथ फ्लैशबैक बेहद सुंदर है, लेकिन भगवान के अन्यायपूर्ण तरीकों के बारे में राहत फतेह अली खान के गीत से इसे और भी ज्यादा मजबूती मिलती है। जब तक जॉन को किसी अपने से अलग होते हुए हग मिलती है, तब तक कहानी जमीन पर थकावट से छटपटा रही होती है और हिंसा से छुटकारा पाने का इंतजार कर रही होती है।

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Edited By

Ishika Jain

First published on: Mar 25, 2025 12:33 PM

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