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अभिनेता आमिर खान का मानना है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री गुणवत्ता के मामले में क्षेत्रीय फिल्म इंडस्ट्रीज से पीछे नहीं है। The Hollywood Reporter India से बात करते हुए आमिर ने कहा कि बॉलीवुड ने 1970-80 के दशक की तुलना में काफी सुधार किया है और अभी जो समय चल रहा है, वह इंडस्ट्री के लिए सिर्फ एक मंदी का दौर है।
आमिर खान ने यह स्वीकार किया कि फिल्म निर्माण में हमेशा सुधार की गुंजाइश रहती है, लेकिन उनका मानना है कि हिंदी फिल्मों की गुणवत्ता क्षेत्रीय फिल्मों से कम नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह रहा कि हम बेहतर फिल्ममेकर नहीं बन सकते, जरूर बन सकते हैं और हमें सभी इंडस्ट्रीज से सीखना चाहिए। लेकिन क्या फिल्म निर्माण की गुणवत्ता देशभर में वाकई अलग है? क्या आपको लगता है कि हिंदी फिल्मों की गुणवत्ता तमिल, तेलुगू, मलयालम, बंगाली, मराठी फिल्मों से बहुत अलग है?”
आमिर ने बताया कि जब उन्होंने 1988 में अपना करियर शुरू किया था, तब दर्शकों के लिए मुख्यधारा फिल्मों की परिभाषा कुछ और थी। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं इससे सहमत हूं कि दूसरी फिल्म इंडस्ट्रीज हिंदी से बेहतर फिल्में बना रही हैं। अगर आप हमारी बनाई फिल्मों की गुणवत्ता देखें… मैं 70 और 80 के दशक की बात करूंगा, जब मैं 1988 में आया था। उस समय जो अधिकतर फिल्में बन रही थीं, वो भारतीय सिनेमा का सबसे कमजोर दौर था। लेकिन तब से हमने काफी सुधार किया है। पहले मुख्यधारा सिनेमा का रास्ता बहुत सीमित था। अब अलग-अलग तरह की फिल्में अच्छा कर रही हैं। मुझे लगता है यह एक अच्छा संकेत है। हर क्षेत्र में उतार-चढ़ाव आते हैं और हम फिलहाल एक मंदी से गुजर रहे हैं, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। यह एक चक्र है।”
जब इस बातचीत की क्लिप X पर वायरल हुई, तो कुछ लोगों ने आमिर से सहमति जताई, तो कुछ ने असहमति। एक यूजर ने लिखा, “80 के दशक का उदाहरण देकर खुद को बेहतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।” एक और यूजर ने कहा, “बॉलीवुड को रीमेक्स नहीं, ओरिजिनल कंटेंट की जरूरत है। पहले वो मास्टरपीस बना सकते थे।” एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा,”आमिर को अपनी delulu दुनिया में रहना पसंद है…”
हालांकि, कुछ यूजर्स आमिर से सहमत भी नजर आए। एक ने लिखा, “बॉलीवुड में भी बहुत अच्छा कंटेंट है… लेकिन उनमें से 95% को मेनस्ट्रीम सपोर्ट नहीं करता। हिंदी वेब सीरीज जैसे पंचायत, गुल्लक, शुरुआती मिर्जापुर वाकई शानदार हैं।” दूसरे यूजर ने कहा, “इसमें सच्चाई भी है। कुछ क्वालिटी मूवीज को अब ओटीटी के बाद ऑडियंस नहीं मिलती। पहले मल्टीप्लेक्स ऑडियंस इन फिल्मों को सपोर्ट करती थी, लेकिन अब वो ओटीटी पर शिफ्ट हो गए हैं। यह एक बड़ी चुनौती है।”
आमिर खान आखिरी बार 2022 में लाल सिंह चड्ढा में नजर आए थे। अब वे सितारे जमीन पर और लाहौर 1947 में काम कर रहे हैं, इसके अलावा वे लोकेश कनगराज की फिल्म कुली में एक कैमियो भूमिका में भी दिखेंगे।
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