इंसानियत शर्मसार! पति की जान बचाने के लिए बेची किडनी, फिर 'मसीहा' डॉक्टर ने ही लगा दिया 31 लाख का चूना

केस दर्ज होने के बावजूद मुख्य आरोपी डॉक्टर अब तक गिरफ्त से बाहर है. आरोप है कि वह खुलेआम अपने क्लिनिक में मरीज देख रहा है, जबकि पुलिस अभी तक किसी भी आरोपी को पकड़ नहीं पाई है. (वसंत चौहान की रिपोर्ट)

Thane

मुंबई से सटे उल्हासनगर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो भरोसे, रिश्तों और इंसानियत, तीनों को एक साथ कठघरे में खड़ा कर देता है. शहर के चिंचपाड़ा इलाके की रहने वाली दीपाली चव्हाण ने अपने पति की जान बचाने के लिए खुद अपनी किडनी दान कर दी, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने इस पूरे घटनाक्रम को दर्दनाक धोखाधड़ी में बदल दिया.

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किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दीपाली के पति की तबीयत फिर बिगड़ गई. संक्रमण ने हालत गंभीर कर दी. ऐसे नाजुक वक्त में, जब परिवार को सहारे की जरूरत थी, उनका भरोसेमंद फैमिली डॉक्टर गौरव धर्मा नायर ‘मसीहा’ बनकर सामने आया. उसने भरोसा दिलाया कि वह अपने संपर्कों के जरिए एक नया किडनी डोनर उपलब्ध कराएगा और इलाज का इंतजाम कर देगा.

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डॉक्टर ने दीपाली की मुलाकात मोसमी बिस्वास, जयदेव बिस्वास और अन्य लोगों से कराई. इन लोगों ने डोनर और ऑपरेशन की आड़ में धीरे-धीरे पैसे मांगने शुरू किए. 2 जुलाई 2025 से 7 मार्च 2026 के बीच, दीपाली से कैश और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 31 लाख 67 हजार 860 रुपये वसूल लिए गए. हर बार नई उम्मीद दी गई, लेकिन न तो कोई डोनर सामने आया और न ही ऑपरेशन की नौबत आई.

जब उम्मीद की आखिरी डोर भी टूट गई, तब दीपाली को एहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित ठगी का शिकार हो चुकी है. इसके बाद उसने विट्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने डॉक्टर समेत कुल 7 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार ओडिशा के भुवनेश्वर तक फैले हो सकते हैं, जहां एक अस्पताल में संदिग्ध लेन-देन के संकेत मिले हैं. इससे यह आशंका गहरा गई है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित किडनी रैकेट हो सकता है.

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हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केस दर्ज होने के बावजूद मुख्य आरोपी डॉक्टर अब तक गिरफ्त से बाहर है. आरोप है कि वह खुलेआम अपने क्लिनिक में मरीज देख रहा है, जबकि पुलिस अभी तक किसी भी आरोपी को पकड़ नहीं पाई है. ऐसे में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

पीड़ित परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है, उन्हें उम्मीद है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाएगी. साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी इसी तरह अपने जाल में फंसाया है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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