भारी बिकवाली के बीच 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 780 अंक या 0.92% गिरकर 84,180.96 पर आ गया. कैपिटलमार्केट के डेटा से पता चलता है कि यह 26 अगस्त, 2025 के बाद इंडेक्स में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है, जब इंडेक्स को 1.04% का नुकसान हुआ था. निफ्टी 50 दिन के आखिर में 264 अंक या 1.01% की गिरावट के साथ 25,876.85 पर बंद हुआ. BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2% की गिरावट आई. निवेशकों को एक ही सेशन में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सेशन के लगभग 480 लाख करोड़ रुपये से घटकर 472 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया.
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विशेज्ञों के अनुसार रूस से तेल खरीदने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की 500% टैरिफ की धमकी के कारण बाजार का सेंटीमेंट खराब हो गया. रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जो एक जाने-माने डिफेंस हॉक हैं, ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पार्टियों के रूस प्रतिबंध बिल को मंजूरी दे दी है, जिसका इस्तेमाल रूस के तेल खरीदने के लिए भारत, चीन और ब्राजील सहित मॉस्को के व्यापारिक साझेदारों को दंडित करने के लिए किया जा सकता है.
अगर यह पास हो जाता है, तो ग्राहम-ब्लूमेंथल प्रतिबंध बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देगा जो जानबूझकर रूसी तेल या यूरेनियम खरीदते हैं और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा देते हैं. इस कड़े प्रतिबंध पैकेज का मकसद मॉस्को को आर्थिक रूप से कमजोर करना है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन पर रूस के हमले से शुरू हुए युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते पर बातचीत कर रहा है.
ट्रंप की धमकी में क्या है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी देश रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा, उसके उत्पादों पर अमेरिका 500% टैरिफ (आयात शुल्क) लगा देगा. अमेरिका का लक्ष्य रूस की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह अलग-थलग करना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसके फंड को रोकना है. भारत वर्तमान में रूस से भारी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है. यदि अमेरिका 500% टैरिफ लगाता है, तो भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात (IT, फार्मा, टेक्सटाइल) पूरी तरह ठप हो सकता है.










