Petrol Diesel Price 13 March: मिडिल ईस्ट के समंदर में उठती लपटों और 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाते कच्चे तेल ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 8% से ज्यादा का उछाल आए, तो हर भारतीय के मन में बस एक ही सवाल कौंधता है कि क्या आज सुबह मेरी गाड़ी की टंकी फुल कराना और महंगा हो गया?
आज 13 मार्च 2026 की सुबह जब देश भर की तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी किए, तो सबकी नजरें उन्हीं आंकड़ों पर टिकी थीं. एक तरफ रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर है और दूसरी तरफ ईरान की चेतावनियों ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है. ऐसे में क्या आज आपकी जेब पर महंगाई का नया बोझ बढ़ा है या तेल कंपनियों ने फिलहाल आपको कवच दे रखा है? आइए, देखते हैं कि आपके शहर के पेट्रोल-डीजल के ताजा भाव क्या हैं और समझते हैं कि ग्लोबल ऑयल वॉर के बीच भारत में कब तक कीमतें स्थिर रह सकेंगी.
प्रमुख महानगरों में आज के रेट (प्रति लीटर)
पेट्रोल डीजल के दाम कुछ इस प्रकार हैं आज:
नई दिल्ली – 94.72, 87.62
मुंबई – 104.21, 92.15
कोलकाता- 103.94, 90.76
चेन्नई – 100.75, 92.34
अहमदाबाद – 94.49, 90.17
बेंगलुरु – 102.92, 89.02
हैदराबाद – 107.46, 95.70
जयपुर – 104.72, 90.21
लखनऊ – 94.69, 87.80
पुणे – 104.04, 90.57
चंडीगढ़ – 94.30, 82.45
इंदौर – 106.48, 91.88
पटना – 105.58, 93.80
सूरत – 95.00, 89.00
नासिक –95.50, 89.50
नोट: अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) और स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है.
$100 के पार क्रूड, फिर भी कीमतें स्थिर क्यों?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव और इराक के टैंकरों पर हमले के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 8% से ज्यादा उछली हैं. इसके बावजूद भारत में दाम स्थिर हैं. दरअसल सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों में अच्छा मुनाफा कमाया है, जिसका उपयोग वे अब कीमतों को स्थिर रखने के लिए शॉक एब्जॉर्बर के रूप में कर रही हैं. वहीं भारत सरकार ने कच्चे तेल के अपने रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) और नए देशों (गैर-हॉर्मुज रूट) से तेल आयात बढ़ाकर सप्लाई सुरक्षित कर ली है. दूसरी ओर सरकार नहीं चाहती कि इस संकट के समय में ईंधन की कीमतें बढ़कर आम जनता पर महंगाई का बोझ डालें.
क्या आगे बढ़ सकते हैं दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति और गंभीर होती है और कच्चा तेल $110-$120 के पार जाता है, तो तेल कंपनियों के लिए लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखना मुश्किल हो जाएगा. फिलहाल, अमेरिका द्वारा रूसी तेल की खरीदारी के लिए दिए गए 30 दिनों के लाइसेंस से बाजार को थोड़ी राहत मिली है.