भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछले 48 घंटे किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे हैं। चौतरफा बिकवाली के कारण सेंसेक्स (Sensex) में करीब 1,600 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं निफ्टी 50 (Nifty 50) भी अपने अहम सपोर्ट लेवल को तोड़कर 24,150 के नीचे बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए हैं।
बाजार गिरने के 4 कारण
पश्चिम एशिया में युद्ध का तनाव (Geopolitical Tensions):
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। निवेशकों को डर है कि अगर यह युद्ध और खिंचता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है, जिसका असर भारतीय कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (Crude Oil at $100+):
इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार निकल गया है। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से व्यापार घाटा बढ़ने और महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली:
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। वैश्विक अस्थिरता और डॉलर की मजबूती को देखते हुए FIIs सुरक्षित ठिकानों (जैसे गोल्ड या अमेरिकी बॉन्ड) की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बाजार में लिक्विडिटी की कमी हो गई है।
कमजोर तिमाही नतीजे (Q4 Earnings Impact):
कई बड़ी कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं। खासकर आईटी और बैंकिंग सेक्टर की सुस्त ग्रोथ ने निवेशकों के सेंटीमेंट को कमजोर कर दिया है, जिससे इन शेयरों में जमकर मुनाफावसूली (Profit Booking) देखी गई।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। छोटे निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में घबराकर (Panic Selling) शेयर न बेचें, बल्कि अच्छे फंडामेंटल वाली कंपनियों में बने रहें।










