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‘7 दुर्लभ बीमारियों को इंपोर्ट ड्यूटी की छूट वाली लिस्ट में जोड़ा गया’, निर्मला सीतारमण ने बताई बजट की मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दुर्लभ बीमारियों के इलाज को सस्ता करने और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए बड़ी घोषणाएं की हैं. इससे स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीक में सुधार होगा.

Author Written By: Raja Alam Updated: Feb 1, 2026 16:15

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश की जनता के लिए कई राहत भरे एलान किए हैं. सरकार ने सात और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में काम आने वाली दवाओं को इंपोर्ट ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त कर दिया है जिससे गंभीर मरीजों का इलाज अब काफी सस्ता हो जाएगा. इसके साथ ही विदेश से यात्रा करके लौटने वाले लोगों के लिए बैगेज क्लीयरेंस और निजी सामान पर मिलने वाली ड्यूटी-फ्री सीमा को भी बढ़ा दिया गया है. वित्त मंत्री ने साफ किया कि इन सुधारों का मकसद आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करना और डायरेक्ट टैक्स के जरिए पारदर्शिता लाना है.

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मिशन पर 40 हजार करोड़

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए सरकार ने 40,000 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम की घोषणा की है. यह योजना भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रोत्साहन साबित होगी. साथ ही सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दो बड़ी घोषणाएं की गई हैं जो इंडिया स्टैक और बौद्धिक संपदा (IP) से जुड़े मामलों को और मजबूत करेंगी. सरकार का पूरा ध्यान अब तकनीक के जरिए उत्पादकता बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर है जिससे आने वाले सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सके.

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विदेशी निर्भरता होगी पूरी तरह खत्म

चीन और अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ स्थापित करने का फैसला लिया है. इन कॉरिडोर के जरिए भारत अपने ही देश में मौजूद दुर्लभ खनिजों की पहचान कर उन्हें प्रोसेस करेगा जिससे मैग्नेट और अन्य हाई-टेक सामानों के लिए बाहर से कच्चा माल नहीं मंगाना पड़ेगा. वित्त मंत्री ने बताया कि यह रणनीतिक कदम भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालेगा और हम अपनी जरूरतों के लिए अपने ही संसाधनों का इस्तेमाल कर पाएंगे. इससे न केवल खर्च बचेगा बल्कि सामरिक रूप से भी भारत और ज्यादा मजबूत बनकर उभरेगा.

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छोटे शहरों के विकास के लिए भारी निवेश

सरकार ने अब बड़े महानगरों के बजाय टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास को अपनी प्राथमिकता में रखा है. हर शहर के आधुनिक बुनियादी ढांचे के लिए सालाना 1000 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि छोटे शहरों में भी मेट्रो जैसी सुविधाएं और बेहतर बिजनेस माहौल मिल सके. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल खर्च 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य है. वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि इन ढांचागत सुधारों से न केवल अर्थव्यवस्था स्थिर होगी बल्कि आम आदमी के जीवन स्तर में भी बड़ा सुधार आएगा.

First published on: Feb 01, 2026 04:07 PM

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