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Meta Layoffs 2026: मार्क जुकरबर्ग का बड़ा फैसला, मेटा में फिर होगी छंटनी; AI बना कर्मचारियों की विदाई का कारण

Tech World Crisis: मेटा में छंटनी का दौर एक बार फ‍िर शुरू होने वाला है। मार्क जुकरबर्ग की AI-First नीति ने कर्मचारियों की नौकरी लेनी शुरू कर दी है। पूरी ड‍िटेल यहां जानें

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फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) के गलियारों से एक बार फिर बुरी खबर सामने आ रही है। सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने साल 2026 के लिए कंपनी की नई रणनीति का खुलासा करते हुए बड़े पैमाने पर छंटनी (Layoffs) का संकेत दिया है। इस बार छंटनी की मुख्य वजह कंपनी का AI-First विजन बताया जा रहा है।

AI के कारण जा रही हैं नौकरियां?

मीड‍िया रिपोर्ट के अनुसार, मेटा अपने ऑपरेशंस को पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित बनाने की तैयारी में है। जुकरबर्ग की इस नई रणनीति का सीधा असर उन विभागों पर पड़ रहा है जहां काम को AI के जरिए ऑटोमेट किया जा सकता है। कंपनी अब उन भूमिकाओं को कम कर रही है जो मैन्युअल डेटा प्रोसेसिंग या बेसिक कोडिंग से जुड़ी हैं। जुकरबर्ग ने इसे Year of Efficiency का अगला चरण बताते हुए कहा है कि कंपनी अब कम कर्मचारियों के साथ अधिक तकनीकी आउटपुट चाहती है।

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किन विभागों पर गिरेगी गाज?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, छंटनी का सबसे ज्यादा असर तीन सेक्टर्स पर पड़ सकता है। कंपनी की लेयर्स को कम करने के लिए मिडल मैनेजमेंट में प्रबंधकीय पदों पर कटौती जारी रहेगी। इसके अलावा कंटेंट मॉडरेशन में कटौती होगी। AI टूल्स के बेहतर होने के बाद मैन्युअल मॉडरेशन टीम में कमी की जा सकती है। रिक्रूटमेंट और HR में भी जॉब्‍स कट देखने को म‍िल सकती है। हायरिंग फ्रीज होने के चलते मानव संसाधन विभाग में भी छंटनी की संभावना है।

मार्क जुकरबर्ग का विजन 2026
जुकरबर्ग का मानना है कि भविष्य पूरी तरह से जेनेरेटिव एआई (Generative AI) और मेटावर्स के एकीकरण पर टिका है। कंपनी अरबों डॉलर के निवेश को अब कर्मचारियों की सैलरी के बजाय AI इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटिंग पावर (Nvidia Chips) पर खर्च करना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य की मेटा एक लीन (Lean) और तकनीकी रूप से अधिक उन्नत संस्था होगी।

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टेक इंडस्ट्री में मची खलबली
मेटा की इस घोषणा ने पूरी टेक दुनिया को डरा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मेटा जैसा दिग्गज AI के नाम पर कर्मचारियों को निकाल रहा है, तो अन्य कंपनियां भी इसी राह पर चल सकती हैं। यह छंटनी इस बात का संकेत है कि अब सिर्फ डिग्री ही नहीं, बल्कि AI के साथ काम करने की क्षमता ही नौकरी बचा पाएगी।

First published on: Apr 27, 2026 02:57 PM

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