Nitin Arora
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India Russia Trade: भले ही भारत को रूस से रियायती दरों पर तेल आयात करना शुरू किए कई महीने हो गए हों, लेकिन भुगतान अभी भी डॉलर में किया जा रहा है। रूस, हालांकि, यूरो या संयुक्त अरब अमीरात दिरहम में व्यापार करने के लिए इच्छुक है। इकोनॉमिक टाइम्स (ईटी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन के कारण व्यापार के लिए भारतीय रुपये को स्थानांतरित करने के लिए अनिच्छुक है।
भारतीय आयातकों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जुलाई में तैयार किया गया रुपया व्यापार तंत्र अभी तक अधिक कर्षण प्राप्त नहीं कर पाया है।
एक विशेषज्ञ ने ईटी को बताया, ‘न तो बैंक और न ही आपूर्तिकर्ता रुपये के भुगतान के लिए उत्सुक हैं। चूंकि रूस को हमारा निर्यात हमारे आयात की तुलना में बहुत कम है, इसलिए आपूर्तिकर्ताओं के पास बहुत अधिक रुपये होंगे और उन्हें नहीं मालूम कि वे इसके साथ क्या करेंगे।’
रूस से बढ़ते आयात ने दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को बढ़ा दिया है और भारतीय ऋणदाता भी रुपये को स्थानांतरित करने के लिए अनिच्छुक हैं क्योंकि उन्हें डर है कि यह अमेरिका से जांच की दिशा उनतक मोड सकता है।
हालांकि रूस ने भारतीय व्यापारियों से दिरहम या यूरो में भुगतान करने को कहा है। एक अधिकारी ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया, ‘अगर हमें डॉलर को बदलना है तो यह फिर रुपया में होगा। हमें यूरो या दिरहम को मजबूत क्यों करना चाहिए?’ उन्होंने कहा कि मुद्रा का चुनाव केवल सरकार ही तय कर सकती है।
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उन्होंने कहा, ‘वित्त मंत्रालय को फैसला करना है कि कौन सी मुद्रा राष्ट्रीय हित में सबसे अच्छी होगी।’ बता दें कि यूएस डॉलर में भुगतान अमेरिका द्वारा अवरुद्ध किया जा सकता है लेकिन दिरहम में भुगतान उद्योग द्वारा सुरक्षित नहीं माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सरकार यूएई की करेंसी में भी ट्रांजैक्शन को ब्लॉक करने के तरीके तलाश रही है।
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