अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लागू कर रहे हैं। जिन देशों के खिलाफ इसे लागू किया जाएगा, उसमें भारत का नाम भी शामिल है। ट्रंप लगातार कहते आए हैं कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर काफी ज्यादा टैक्स लगाता है। वहीं, भारत भी इस टैरिफ से बचने के लिए कदम उठा रहा है। नई दिल्ली की कोशिश डोनाल्ड ट्रंप को यह विश्वास दिलाने की है कि वह अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में सरकार गूगल टैक्स समाप्त करने जा रही है।
इन्हें मिलेगा फायदा
सरकार की योजना 1 अप्रैल यानी ट्रंप टैरिफ के अगले राउंड से ठीक एक दिन पहले गूगल टैक्स पर कैंची चलाने की है। दरअसल, भारत विदेशी कंपनियों द्वारा प्रदान की जाने वाली ऑनलाइन विज्ञापन सेवाओं पर 6% इक्विलाइजेशन शुल्क लगाता है, जिसे 1 अप्रैल से समाप्त करने का प्रस्ताव है। इस शुल्क को आमतौर पर गूगल टैक्स कहा जाता है। सरकार के इस कदम से गूगल, मेटा और X जैसी अमेरिकी कंपनियों को लाभ होगा। यह प्रस्ताव वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा लोकसभा में पेश किए गए वित्त विधेयक 2025 में संशोधनों का एक हिस्सा है।
पहले दी 2% की राहत
इससे पहले सरकार ने पिछले साल गूगल, मेटा और अमेजन जैसी कंपनियों द्वारा भारतीय व्यवसायों को प्रदान की जाने वाली डिजिटल सेवाओं पर 2 प्रतिशत शुल्क हटा दिया था, क्योंकि इससे नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। हालांकि, 6 प्रतिशत शुल्क जारी रहा। अब जब अमेरिका 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लागू कर रहा है, तो भारत अधिक उदार हो गया है और 6% शुल्क हटाने की तैयारी कर रहा है। यह शुल्क 2016 में लागू किया गया था। हालांकि, भारत का यह कदम ट्रंप को खुश कर पाता है या नहीं यह देखने वाली बात होगी। इस बीच एक अमेरिकी टीम टैरिफ के मुद्दे पर बातचीत के लिए भारत पहुंच चुकी है।
वेनेजुएला के खिलाफ फरमान
उधर, डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल या गैस खरीदने वाले देशों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान करके खलबली मचा दी है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक तनाव के मद्देनजर डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने यह फैसला लिया है। ट्रंप का कहना है कि कोई भी देश जो वेनेजुएला से तेल और या गैस खरीदता है, उसे अमेरिका के साथ व्यापार पर 25% टैरिफ देना होगा। ट्रंप पहले से ही वेनेजुएला पर कई प्रतिबंध लगा चुके हैं। उनका आरोप है कि वेनेजुएला ने अमेरिका में अपराधियों को भेजा है। अमेरिका, वेनेजुएला को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहता है, इसलिए यह फरमान सुनाया है।
भारत पर ऐसे होगा असर
अमेरिका के वेनेजुएला को लेकर उठाए गए कदम से भारत की भी मुश्किल बढ़ सकती है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और वह वेनेजुएला से भी कच्चा तेल आयात करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2023 में भारत ने इस देश से 191,600 बैरल प्रति दिन (BPD) तेल खरीदा था। जनवरी 2024 में भारत का आयात बढ़कर 254,000 BPD हो गया। यह आंकड़ा वेनेजुएला के कुल तेल निर्यात का 50% है। ऐसे में अब यदि भारत वेनेजुएला से तेल खरीदना जारी रखता है तो उसे अमेरिका के साथ किए जाने वाले व्यापार पर 25% अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है, जो जाहिर है उसके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ होगा।
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