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CGHS खर्च में प्राइवेट अस्पतालों की बढ़ रही हिस्सेदारी, 4 साल में आंकड़ा 24% से 60% पहुंचा

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को स्वास्थ लाभ देने वाली CGHS को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई बार अस्पताल इस योजना का गलत फायदा उठा लेते हैं। इसकी निगरानी के लिए कोई तंत्र नहीं है कि क्या उपचार आवश्यक था, क्या इससे व्यक्ति के स्वास्थ्य में कोई सुधार हुआ?

Author Edited By : Neeraj Updated: Apr 1, 2025 11:42

केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत प्राइवेट अस्पतालों में इलाज बढ़ रहा है। वित्तवर्ष 2019-20 में CGHS के पैनल में शामिल प्राइवेट हॉस्पिटलों को रीइंबर्समेंट की दर 24% थी, जो 2023-24 में लगभग 60% हो गई है। संसद में एक प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी से यह बात सामने आई है।

इतनी हुई लाभार्थियों की संख्या

संसद में हाल ही में दिए गए उत्तर और सीजीएचएस वेबसाइट के आंकड़ों से पता चलता है कि सीजीएचएस लाभार्थियों की संख्या 2019-20 में 34.2 लाख से बढ़कर 2023-24 में 47.6 लाख हो गई है, यानी इसमें 39% की वृद्धि हुई है। इस अवधि में निजी अस्पतालों को इलाज पर आए खर्चे के रीइंबर्समेंट में लगभग 300% की वृद्धि हुई है। यह 935 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,646 करोड़ रुपये हो गया है।

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मिलती रही हैं गड़बड़ी की खबरें 

21 मार्च को एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने पिछले साल दिसंबर में सीजीएचएस मुख्यालय द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों को जारी की गई सलाह का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि कुछ स्वास्थ्य सेवा संगठन बिल जमा करते समय धोखाधड़ी की गतिविधियों में लिप्त हैं और उसे लाभार्थियों से अधिक शुल्क लेने, उपचार से इनकार करने आदि से जुड़ी शिकायतें मिली हैं। बता दें कि पिछले साल यह बात सामने आई थी कि सीजीएचएस और प्राइवेट हॉस्पिटलों के बीच बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। पैसे लेकर सीजीएचएस मानकों को पूरा ना करने वाले अस्पतालों को भी सीजीएचएस पैनल में शामिल किया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई बार अस्पताल इस योजना का गलत फायदा उठा लेते हैं। इसकी निगरानी के लिए कोई तंत्र नहीं है कि क्या उपचार आवश्यक था, क्या इससे व्यक्ति के स्वास्थ्य में कोई सुधार हुआ?

यह चिंताजनक बात

2019-20 और 2023-24 के बीच सीजीएचएस पर कुल खर्च 54% बढ़ गया है। TOI की रिपोर्ट में एक पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के हवाले से बताया गया है कि निजी अस्पतालों पर खर्च में वृद्धि चिंताजनक है, क्योंकि यह सीजीएचएस डॉक्टरों द्वारा प्रिवेंटिव केयर की उपेक्षा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि CHGS की स्थापना जिस उद्देश्य से की गई थी, वह उससे भटक गई है। वर्तमान में यह निजी अस्पतालों के लिए रेफरल एजेंसियों में तब्दील हो गई है।

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क्या है CGHS?

केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) केंद्र सरकार की एक स्वास्थ योजना है। इस स्कीम का लाभ केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को मिलता है। इस योजना के अंतर्गत सरकारी कर्मचारियों को अस्पताल में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। CGHS का लाभ लेने के लिए पात्र व्यक्ति के पास CGHS कार्ड होना चाहिए। यह कार्ड CGHS की ऑफिशियल वेबसाइट पर दिया फार्म भरकर और मांगे गए दस्तावेज जमा करके हासिल किया जा सकता है।

क्या है प्रक्रिया?

देश भर के सीजीएचएस-सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज प्राप्त किया जा सकता है। इसमें ओपीडी से लेकर अस्पतालों में इलाज और दवा खर्च तक सबकुछ शामिल है। अस्पताल आपातकाल के समय किसी सीजीएचएस लाभार्थी को एडमिट करने से इंकार नहीं कर सकते। वहीं, गैर-सूचीबद्ध अस्पतालों और डायग्नोसिस सेंटर में किए गए उपचार के लिए रीइंबर्समेंट क्लेम किया जा सकता है। क्लेम अस्पताल से छुट्टी की तारीख से अधिकतम 6 महीने के भीतर कर्मचारी के संबंधित विभाग और सीजीएचएस वेलनेस सेंटर के सीएमओ को पेश करना होगा। इसके लिए लाभार्थी को जरूरी दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

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Neeraj

First published on: Apr 01, 2025 11:42 AM

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