अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऑटो टैरिफ से पूरी इंडस्ट्री हिल गई है। यह टैरिफ विदेशों से अमेरिका पहुंचने वाले ऑटो पार्ट्स पर लगाया गया है। अमेरिका में लिए गए इस फैसले का असर भारत में भी नजर आ रहा है, क्योंकि भारत भी अमेरिका को ऑटो पार्ट्स भेजता है। आज बाजार खुलते ही इस सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियों के शेयरों में लाली छा गई।
भारत क्या भेजता है?
अमेरिका कई देशों से करीब 300 अरब डॉलर के ऑटो कंपोनेंट का आयात करता है, इसमें भारत का नाम भी शामिल है। भारत से इंजन पार्ट्स, ट्रांसमिशन कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम सहित कई तरह के प्रोडक्ट अमेरिका जाते हैं। ऐसे में ट्रंप के टैरिफ कार्ड से भारत का प्रभावित होना लाजमी है। डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को विदेशी वाहनों और विदेश निर्मित ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया, आज जैसे ही शेयर बाजार खुला उसका असर नजर आने लगा।
इन कंपनियों के शेयर गिरे
टाटा मोटर्स के शेयर शुरुआती कारोबार में 5% से अधिक गिर गए। इसी तरह, आयशर मोटर्स में लगभग 2%, हुंडई इंडिया में 1.7%, संवर्धन मदरसन में 6.4% और सोना बीएलडब्ल्यू में 4.4% से अधिक की गिरावट आई। जबकि बालकृष्ण इंडस्ट्रीज 3.4% तक नीचे चला गया। भारत भले ही बड़ी संख्या में अपनी कारें अमेरिका नहीं भेजता, लेकिन हमारे ऑटो पार्ट्स अमेरिकी वाहनों के लिए दिल का काम करते हैं। इसलिए टैरिफ की खबर ने उससे जुड़ी कंपनियों को प्रभावित किया है।
टाटा का ऐसा है रिश्ता
टाटा मोटर्स अमेरिका को सीधे तौर पर वाहन निर्यात नहीं करती, लेकिन अपनी ब्रिटिश सहायक कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) के माध्यम से वहां मौजूद है। इस कंपनी का बेस यूरोप है और अब वहां से अमेरिका जाने वालीं कारों पर 25% टैरिफ लगेगा। JLR की कुल बिक्री में अमेरिका का योगदान 22% है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से कंपनी को लगे झटके का अनुमान लगाया जा सकता है। यह झटका टाटा मोटर्स को भी प्रभवित करेगा, इसलिए कंपनी के शेयर गिर रहे हैं। इसी तरह, बाइक के शौकीन अमेरिकियों के बीच लोकप्रिय आयशर मोटर्स की रॉयल एनफील्ड 650 सीसी मोटरसाइकिल की मांग में कमी देखी जा सकती है, क्योंकि टैरिफ से कीमतें चढ़ना तय है ।
यहां भी दिखी तपिश
ऑटो कम्पोनेंट आपूर्तिकर्ता भी ट्रंप के टैरिफ से परेशानी में आ गए हैं। सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स, जो अपना 66% राजस्व अमेरिका और यूरोप से प्राप्त करती है, को मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि वैश्विक वाहन निर्माता लागत का बोझ आपूर्तिकर्ताओं पर डाल रहे हैं। कंपनी चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है, तथा उसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में इन बाजारों से अपने राजस्व का 50% से अधिक प्राप्त करना है।
दुनियाभर में दिखा असर
केवल भारत ही नहीं, डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ ने दुनियाभर के ऑटो मार्केट को हिला दिया है। जापानी वाहन निर्माता कंपनियों टोयोटा, निसान और होंडा के शेयरों में 3% से 3.7% तक की गिरावट देखने को मिली है। इसी तरह, दक्षिण कोरियाई कंपनी हुंडई का शेयर भी 3.4% नीचे आ गया है। जानकारों का मानना है कि विदेशी वाहनों और विदेशी निर्मित ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ लगाने से ऑटो इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित होगी। इसका खामियाजा अमेरिकी जनता को भी उठाना पड़ेगा, क्योंकि उसके पसंदीदा वाहनों के दाम भी बढ़ जाएंगे।
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