स्थानीय गैस के दाम कैसे होते हैं तय, सरकारी पैनल करेगा फॉर्मूला की समीक्षा, मिलेगी उपभोक्ताओं को राहत?

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नई दिल्ली: ‘उपभोक्ता को उचित मूल्य’ सुनिश्चित करने के प्रयास में भारत सरकार ने स्थानीय रूप से उत्पादित गैस के मूल्य निर्धारण के फार्मूले की समीक्षा करने के लिए एक पैनल का गठन किया है। इसे मुद्रास्फीति को कम करने और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक कदम के रूप में भी देखा जा सकता है। रॉयर्टस की एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी गई।

पिछले कुछ समय से भारत में गैस की स्थानीय कीमतें रिकॉर्ड उच्च स्तर पर हैं और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक गैस की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए इसके और बढ़ने की उम्मीद है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा गठित नए पैनल को सितंबर के अंत तक अपनी रिपोर्ट देनी है। हालांकि, अक्टूबर से शुरू होने वाले स्थानीय गैस की कीमतों के अगले छह महीने के संशोधन में पैनल की सिफारिशें प्रतिबिंबित नहीं होंगी, क्योंकि कार्यान्वयन के लिए कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक है।

आसान भाषा में कहा जाए तो भले ही भारत सरकार ने स्थानीय रूप से उत्पादित गैस के मूल्य निर्धारण फार्मूले की समीक्षा के लिए एक पैनल का गठन किया है, लेकिन उपभोक्ताओं को अगले छह महीनों में कोई राहत मिलने की संभावना नहीं है, जब तक कि कैबिनेट नए फॉर्मूले को मंजूरी नहीं देता।

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