अगर आपको लग रहा है कि पिछले कुछ दिनों से आपकी सब्जी की टोकरी और रसोई का सामान कुछ ज्यादा महंगा पड़ रहा है, तो आप अकेले नहीं हैं. पूरी दुनिया के लोग ऐसा महसूस कर रहे हैं.
मौसम के बदलते मिजाज और दुनिया भर में चल रहे युद्ध ने महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर आम इंसान की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के नए आंकड़े बताते हैं कि जुलाई 2026 में दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों के दाम पिछले 3 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. आइए समझते हैं कि ग्लोबल मार्केट में क्या चल रहा है और इसका असर आपकी रोजमर्रा की थाली पर कैसे पड़ रहा है.
दुनिया भर में क्यों महंगे हो रहे हैं खाने-पीने के दाम?
एफएओ (FAO) का फूड प्राइस इंडेक्स बढ़कर 131.1 अंक पर पहुंच गया है, जो जनवरी 2023 के बाद का सबसे बड़ा उछाल है. इसके पीछे 3 सबसे बड़े कारण हैं:
- मौसम और अल-नीनो की मार: भयंकर गर्मी और सूखा पड़ने से मुख्य उत्पादक देशों में फसलों की पैदावार घटी है.
- युद्ध का संकट: खाड़ी क्षेत्र (ईरान) और काला सागर क्षेत्र (यूक्रेन) में जारी तनाव की वजह से अनाज और सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हुई है.
- क्रूड ऑयल और बायोडीजल: कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पाम ऑयल और सोया ऑयल जैसे वनस्पति तेलों की कीमतें भी बढ़ गई हैं.
गेहूं, चीनी और तेल: सब कुछ हुआ महंगा!
काला सागर से जहाजों की आवाजाही रुकने और भीषण गर्मी से फसल खराब होने के कारण अनाज सूचकांक में हर महीने 3.4% का उछाल आ रहा है. अकेले गेहूं की कीमत 5.8% बढ़ी है. वहीं वनस्पति तेलों के दाम बढ़कर 4 साल के उच्चतम स्तर पर हैं. यूरोप और एशिया में खराब मौसम तथा ब्राजील में इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के बढ़ते इस्तेमाल से चीनी 5.6% महंगी हुई है. राहत की बात ये है कि चिकन और मीट की कीमतों में 2.8% की मामूली गिरावट देखी गई है.
आपकी थाली पर क्या पड़ा असर?
क्रिसिल (CRISIL) की रोटी राइस रेट रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 में आम आदमी की थाली सालाना आधार पर 9% तक महंगी हो गई है. जुलाई 2025 में जो वेज थाली 28.1 रुपये की थी, वह अब बढ़कर 29.1 रुपये की हो गई है. नॉन-वेज थाली की कीमत 53.5 रुपये से बढ़कर सीधे 58.3 रुपये (9% बढ़ोतरी) पर पहुंच गई है.
बेमौसम बारिश से प्याज की फसल खराब हुई, जिससे प्याज 20% महंगा हुआ. इसके अलावा खाद्य तेल में 11% और रसोई गैस सिलेंडर में 10% की तेजी आई है. जबकि आलू (12% सस्ता) और टमाटर (2% सस्ता) होने से आम जनता को थोड़ी राहत जरूर मिली है.
क्या आरबीआई (RBI) बढ़ाएगा आपकी EMI?
महंगाई का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आपकी बैंक ईएमआई (EMI) पर पड़ता है. अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि जुलाई में भारत की खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.50% हो सकती है, जो जून में 4.38% थी. अगर ऐसा होता है, तो यह लगातार दूसरा महीना होगा जब महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के तय लक्ष्य (4%) से ऊपर रहेगी.
हालांकि, जानकारों का मानना है कि जुलाई में मानसून की अच्छी बारिश से आगे चलकर फसलों की पैदावार सुधरेगी, जिससे आने वाले महीनों में थोड़ी राहत मिल सकती है.
वैश्विक उथल-पुथल और मौसम के अप्रत्याशित मिजाज के कारण आने वाले कुछ हफ्ते रसोई के बजट के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं. ऐसे में समझदारी इसी में है कि गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम लगाई जाए और अपने मासिक बजट को थोड़ा संभलकर मैनेज किया जाए.
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