Tea Startups In India: भारत जैसे देश में जहां दिन की शुरुआत चाय के साथ होती है, वहां टी स्टॉल पर भीड़ लाजमी है। हम भारतीय चाय के प्रति दीवाने हैं और इस दीवानगी का एक उदाहरण महाकुंभ में देखने को मिला। जहां चाय पॉइंट नामक कंपनी ने महज 24 घंटे में ही 1 लाख से ज्यादा कप चाय बेच डाली। वैसे, तो महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में चाय की चुस्कियां जमकर ली जाती हैं, लेकिन एक दिन में 1 लाख कप चाय बेचना तभी मुमकिन है जब चाय का स्वाद कुछ खास हो। चाय पॉइंट की चाय की खासियत पर बात करने से पहले कंपनी की सक्सेस स्टोरी पर एक नजर डाल लेते हैं।
मिला उम्मीद से ज्यादा
चाय पॉइंट ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में लिमिटेड एडिशन स्टोर्स खोले थे। भारी भीड़ के मद्देनजर कंपनी को अच्छी कमाई की उम्मीद थी, लेकिन उसे उम्मीद से ज्यादा मिला। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने एक दिन में एक लाख से ज्यादा कप चाय बेची और एकदम से सुर्खियों में आ गई। Chai Point का कहना है कि वह अलग-अलग शहरों की बिक्री को मिलाकर हर दिन लगभग 10 लाख कप चाय बेचती है। जबकि महाकुंभ में महज 24 घंटे में ही उसने एक लाख से ज्यादा कप चाय बेच डाली।
ऐसे आया आइडिया
चाय पॉइंट’ हार्वर्ड के प्रोफेसर तरुण खन्ना और उनके छात्र अमूल्य सिंह बिजराल के दिमाग की उपज है। इसका आइडिया उन्हें मुंबई में चाय की चुस्कियां लेते हुए आया। दरअसल, एक कैफे में बैठकर चाय पीते हुए उनकी नजर सड़क पर प्लास्टिक के कप में चाय बेच रहे लड़के पर पड़ी। उन्होंने सोचा कि लाखों लोग हर दिन इस तरह चाय पीते हैं, जहां साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता। क्यों न लोगों को अच्छी क्वालिटी की चाय पिलाई जाए और उस लड़के जैसे ‘छोटू’ को रोजगार दिया जाए। यहां से चाय पॉइंट का कांसेप्ट उनके दिमाग में आया, जिसे उन्हें धरातल पर उतार दिया।
इस तरह हुई शुरुआत
चाय पॉइंट ने अपना पहला आउटलेट 2010 में बेंगलुरु के कोरमंगला में खोला था। कंपनी की चाय बेंगलुरु वालों को इतनी पसंद आई कि खन्ना और सिंह ने इसे दूसरे शहरों तक पहुंचाने का फैसला लिया। अगले दो सालों में कंपनी ने दिल्ली, मुंबई और पुणे में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और वहां भी उसकी चाय हिट हो गई। आज, चाय पॉइंट के पूरे देश में 170 से ज्यादा स्टोर हैं। कंपनी की योजना अगले दो सालों में 300 अतिरिक्त स्टोर खोलने की है।
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
कंपनी चाय के पारंपरिक बिजनेस में टेक्नोलॉजी का भी जमकर इस्तेमाल कर रही है। उसने ऑफ़िस, एयरपोर्ट और अस्पतालों जैसे स्थानों पर स्मार्ट टी वेंडिंग मशीनें लगाईं हैं, जिन्हें बॉट्स भी कहा जाता है। ये मशीनें ग्राहकों की पसंद को याद रख सकती हैं, ताकि उन्हें हर बार एक जैसी चाय मिल सके। चाय पॉइंट ने अभी तक 5000 से ज्यादा स्मार्ट मशीनें लगाई हैं, जिन्हें बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
अब आएगा IPO
लगातार मिल रही सफलता से उत्साहित चाय पॉइंट अब अपना आईपीओ लाने वाली है। माना जा रहा है कि इसी साल मई में कंपनी का IPO आ सकता है। कंपनी में संस्थापकों, कर्मचारियों और शुरुआती एंजल इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। बाकी हिस्सेदारी संस्थागत निवेशकों के पास है। कंपनी फ़्रैंचाइजी मॉडल पर काम नहीं करती, बल्कि अपने स्टोर्स खोलती है। उसे विदेशों में भी आउटलेट खोलने के ऑफ़र मिले हैं, जिन पर भविष्य में फैसला लिया जा सकता है।
स्वाद का सीक्रेट फॉर्मूला
अब जानते हैं कि आखिर चाय पॉइंट की चाय में ऐसा क्या खास है, जिसने लोगों को दीवाना बना दिया है। प्रोफेसर खन्ना का कहना है कि जैसे कोक या पेप्सी का अपना सीक्रेट फॉर्मूला होता है, वैसे ही हमारा भी एक खास फॉर्मूला है। हम खास तरीके से चाय बनाते हैं। अब ये फॉर्मूला क्या है, इसके बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया और वैसे भी ऐसे सीक्रेट कोई बताता भी नहीं है।
इनका भी है क्रेज
चाय पॉइंट अकेले ऐसी कंपनी नहीं है, जो चाय को लेकर भारतीयों की तलब से जमकर कमाई कर रही है। कई ऐसे स्टार्टअप हैं, जिन्होंने थोड़े से समय में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। चायोज, MBA चायवाला आदि ऐसे ही कुछ नाम हैं। चायोज की शुरुआत 2012-13 में नितिन सलूजा ने की थी। IIT बॉम्बे से ग्रेजुएशन सलूजा ने अमेरिका से लौटने के बाद अपना स्टार्टअप खोला, जो आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। MBA चायवाला को प्रफुल्ल बिल्लौरे ने 2017 में शुरू किया था। इसी तरह कौशल दुगर्र ने 2012 में टी बॉक्स की शुरुआत की, 2014 में पंकज जज शुरू हुए चाय ठेला के 9 राज्यों में 28 आउटलेट्स हैं। 2016 में इंदौर में अनुभव दुबे और आनंद नायक ने चाय सुट्टा बार खुला था, जिसके 600 से ज्यादा आउटलेट्स हैं।