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केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सरकार ने किया बड़ा ऐलान, जानें काम की बात

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर आई है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने मेडिकल रीइम्बर्समेंट (Medical Reimbursement) के नियमों में ढील देते हुए दावों के निपटारे की सीमा को दोगुना कर दिया है.

Author Written By: Vandana Bharti Updated: Feb 20, 2026 07:32
केंद्रीय कर्मचारि‍यों के ल‍िए बड़ी राहत की खबर आई है.

अगर आप केंद्रीय कर्मचारी या पेंशनभोगी हैं, तो इलाज के भारी-भरकम बिलों के रीम्बर्समेंट के लिए फाइलों के चक्कर काटने का दौर अब पुराना होने वाला है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 फरवरी, 2026 को एक ऑफिस मेमोरेंडम (OM) जारी कर मेडिकल क्लेम की मंजूरी की सीमा बढ़ा दी है. अब मंत्रालयों और विभागों के विभाग प्रमुख (HOD) बिना Integrated Finance Division (IFD) की सलाह लिए 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम को सीधे मंजूरी दे सकेंगे.

पहले यह सीमा केवल 5 लाख रुपये थी. यानी 5 लाख रुपये से ऊपर का बिल होते ही फाइल लंबी प्रक्रिया के लिए ऊंचे अधिकारियों के पास भेजनी पड़ती थी.

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अब 10 लाख रुपये तक के दावों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगा, जिससे कर्मचारियों को लंबे इंतजार से छुटकारा मिलेगा.

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दो शर्तों का रखना होगा ध्यान
सरकार ने 10 लाख रुपये की इस नई लिमिट के लिए दो साफ शर्तें रखी हैं:

  1. क्लेम में CGHS या CS(MA) नियमों में किसी भी तरह की ढील (Relaxation) नहीं मांगी गई हो.
  2. रीम्बर्समेंट की राशि पूरी तरह से CGHS/CS(MA) द्वारा निर्धारित दरों (Rates) के अनुसार हो.

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इसका सीधा मतलब ये हुआ क‍ि अगर अस्पताल का बिल सरकारी रेट से ज्यादा है और आप उसमें छूट चाहते हैं, तो फाइल पहले की तरह ही उच्च स्तर पर प्रोसेस होगी. लेकिन अगर बिल सरकारी रेट के भीतर है, तो काम रॉकेट की रफ्तार से होगा.

सेटलमेंट लिमिट में भी बड़ा उछाल
मंत्रालय ने एक और अहम बदलाव किया है. जिन मामलों में कोई छूट नहीं मांगी जाती और भुगतान पूरी तरह CGHS दरों पर होता है, वहां सेटलमेंट लिमिट 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है. यह कदम भारी-भरकम बिलों के पेमेंट में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए उठाया गया है.

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आवेदन कैसे और कहां करें?
क्लेम पास कराने के लिए प्रक्रिया को काफी सरल बनाया गया है. खासकर पेंशनभोगियों के लिए ये नियम जानना जरूरी है क‍ि इलाज या डिस्चार्ज के 6 महीने के भीतर अपने वेलनेस सेंटर के CMO को आवेदन देना होगा.

मेडिकल रीम्बर्समेंट क्लेम फॉर्म और चेकलिस्ट

  • डिस्चार्ज समरी की कॉपी और रेफरल/परमिशन स्लिप
  • इमरजेंसी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)
  • अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीदें
  • वैलिड CGHS कार्ड की कॉपी और बैंक डिटेल के लिए कैंसिल चेक

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एंबुलेंस के खर्च पर क्या है नियम?
क्या आप जानते हैं कि एंबुलेंस का खर्च भी वापस मिल सकता है? जी हां! लेकिन इसके लिए एक शर्त है क‍ि शहर के भीतर एंबुलेंस का खर्च तभी मिलेगा जब डॉक्टर यह लिखकर दे कि मरीज को किसी अन्य वाहन से ले जाना जानलेवा हो सकता था या उसकी हालत बिगड़ सकती थी.

बता दें क‍ि सरकार के इस फैसले से लाखों कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिलेगी. अब बड़े इलाज के बाद पैसों की वापसी के लिए महीनों का इंतजार नहीं करना होगा.

First published on: Feb 20, 2026 07:32 AM

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