हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

क्या 70 साल के इंसान में आ जाएगी 25 साल के नौजवान जैसी ताकत?

Bharat Ek Soch : कुदरती नियमों को चुनौती देने के लिए विज्ञान दिन-रात काम कर रहा है। लोगों को मृत्यु के चक्र से छुटकारा मिल सके, इसे लेकर आधुनिक विज्ञान तेजी से रिसर्च कर रहा है।

विज्ञापन
Bharat Ek Soch

Bharat Ek Soch : हजारों साल से इंसान की दो अधूरी ख्वाहिशें रही हैं- एक पारस पत्थर हासिल करने की। कहा जाता है कि पारस पत्थर से किसी धातु का स्पर्श कराया जाता है- वो सोना बन जाती है। दूसरा- उस अमृत को हासिल करने की जिसे पीने के बाद इंसान अमर हो जाता है। ये दोनों चीजें इंसान को हजारों साल से रोमांचित करती रही हैं। लेकिन, विज्ञान कुदरत के नियमों को चुनौती देने के लिए दिन-रात काम कर रहा है। ऐसे में आधुनिक विज्ञान तेजी से उस दिशा में काम कर रहा है, जिसमें लोगों को मृत्यु के चक्र से छुटकारा दिलाया जा सके। मतलब, इंसान के जन्म की तारीख और समय तो तय होगा। लेकिन, मृत्यु उसकी इच्छा पर निर्भर करेगी?

अमेरिकी अरबपति ब्रायन जॉनसन भी मौत को मात देने की कोशिश कर रहे हैं- वो 47 साल की उम्र में 17 जैसा दिखना चाहते हैं। जॉनसन चाहते हैं कि उनके शरीर के सभी अंग ठीक उसी तरह काम करें- जैसा 17 साल की उम्र के किसी नौजवान के करते हैं। Immortality यानी अमर होना सिर्फ इंसान की कोरी कल्पना रही है या मृत्यु को टालना संभव है? क्या आने वाले वर्षों में विज्ञान इतनी तरक्की कर लेगा कि 70 साल के इंसान के शरीर में 25 साल के नौजवान जैसी ताकत आ जाएगी? क्या बढ़ती उम्र के साथ होने वाली गंभीर बीमारियों को शरीर से दूर रखा जा सकेगा? विज्ञान की मदद से किसी इंसान की जिंदगी कितनी लंबी की जा सकती है? अगर इंसानों की जिंदगी और लंबी होने लगी तो हमारे सामाजिक चक्र में किस तरह के बदलाव करने पड़ सकते हैं।

यह भी पढ़ें : कैसा होगा 2047 का विकसित भारत? कितने और क्यों अहम हैं अगले 23 साल?

विज्ञापन

एंटी एजिंग एक्सपेरिमेंट्स के लिए जाने जाते हैं ब्रायन जॉनसन

ब्रायन जॉनसन पूरी दुनिया में अपनी एंटी एजिंग एक्सपेरिमेंट्स (Anti Ageing Experiments) के लिए जाने जाते हैं। यहां तक की उन्होंने यंग ब्लड थेरेपी (Young Blood Therapy) के लिए अपने बेटे और पिता के साथ प्लाज्मा की अदला-बदली की। जॉनसन के बेटे की उम्र 17 साल और पिता की 70 साल है। वो रोजाना 100 से अधिक स्पलीमेंट्स लेते हैं, भरपूर मात्रा में सब्जियां खाते हैं। दुनिया में जहां भी जाते हैं- अपना खाना-पानी साथ लेकर चलते हैं। उनके सोने, उठने-बैठने, खाने-पीने सबका टाइम तय है, जिसका वो बहुत ही कड़ाई से पालन करते हैं। ये अमेरिकी बिजनेस टायकून का Don’t Die मिशन को लेकर जुनून ही है कि अगर किसी शहर की हवा खराब हुई यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index) गंभीर है- वो अपनी यात्रा टाल देते हैं। ऐसे में सबसे पहले समझते हैं कि ब्रायन जॉनसन मौत को मात देने के लिए किन-किन तरीकों को अपना रहे हैं।

अपनी सेहत और उम्र को लेकर एक्टिव रहते हैं ब्रायन जॉनसन

ब्रायन जॉनसन बहुत पैसे वाले हैं- वो हमेशा अपनी सेहत और उम्र के बारे सोचते रहते हैं। खुद को जवान बनाए रखने के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च कर सकते हैं। अपनी दिनचर्या और खानपान का रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए मोटी तनख्वाह पर कई कर्मचारी रखे होंगे। सेहत से जुड़े हर मसले पर सलाह के लिए उसके सामने हमेशा डॉक्टरों का एक्सपर्ट पैनल तैयार रहता होगा। लेकिन, एक सवाल ये भी जवान रहने के जुनून में कहीं जॉनसन अपनी जिंदगी जीना ही तो नहीं भूल गए हैं? लेकिन, एक बड़ा सच ये भी है कि वैज्ञानिक कुछ ऐसा खोजने में लगे हैं- जो हमारी उम्र को आज के मुकाबले कई गुना बढ़ा दे। दुनिया के जाने माने लेखक मैक्स टैगमार्क की एक किताब है- Life 3.0: Being Human in the Age of Artificial Intelligence… इस किताब में टैगमार्क जीवन को तीन हिस्सों में बांटते हैं। पहला- बैक्टीरियल लाइफ…जिसमें विकसित होते प्राणियों को रखते हैं। दूसरे हिस्से में विकसित इंसानों की बात करते हैं। तीसरे हिस्से में इंसान को बायोलॉजिकल से अधिक टेक्निकल बताते हैं। इसमें हम मशीनों को अपने शरीर के अंगों की तरह इस्तेमाल करेंगे। अभी इंसान जीवन के विकास के तीसरे चरण से गुजर रहा है। मसलन, अगर दिल काम नहीं कर रहा है- तो आर्टिफिशियल हार्ट यानी पेसमेकर के जरिए जिंदगी चल रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इंसान के शरीर में ऐसे नैनो बोट्स सेट किए जा सकते हैं- जो शरीर को बुड्ढा बनाने वाली प्रक्रिया रोक दे या कुछ समय के लिए टाल दे?

विज्ञापन

‘2030 तक अमर हो जाएगा इंसान’ 

अमेरिका के एक मशहूर कंप्यूटर साइंटिस्ट, कारोबारी, लेखक और भविष्यदृष्टा हैं- Reymond Kurzewil… इनका दावा है कि 2030 तक यानी अगले पांच-छह वर्षों में इंसान अमर हो जाएगा। इनके दावों के सही साबित होने का ट्रैक-रिकॉर्ड बहुत बेहतर रहा है। कर्जबेल का दावा है कि एज-रिवर्सिंग नैनोबोट्स की मदद से इंसान अपनी कोशिकाओं को नष्ट होने से बचा सकेगा। इसे भी Immortality का ही नाम दिया जा रहा है। इसी तरह कुछ वैज्ञानिक इस प्रयोग में जुटे हैं- जिससे बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारियों को ठीक किया जा सके? जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को डबल किया जा सके। सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की बुनियादी पहुंच और जीवन स्तर में बदलाव का ही नतीजा है कि आजादी के समय जहां देश में लोगों की जीवन प्रत्याशा 32 साल थी, वो अब 70 साल पार कर गई है।

इंसान की उम्र 140 हो जाएगी तो फिर क्या होगा

क्या कभी आपके दिमाग में ये बात आई है कि अगर इंसान अमर हो जाएगा या जीवन प्रत्याशा 70 साल से बढ़कर 140 साल हो जाएगी तो क्या होगा? क्या विज्ञान हमें महाभारत के किरदार भीष्म की तरह बना देगा, जिन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान था यानी जिनमें मौत का समय खुद तय करने की शक्ति थी। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया में नौकरी से रिटायरमेंट की जगह धरती पर जिंदगी जीने की सीमा तय करनी पड़ सकती है। बड़ी आबादी की भूख मिटाने के लिए और अन्न की जरूरत होगी? ऐसे में अधिक अनाज उत्पादन के साथ-साथ ऐसी टैबलेट के आविष्कार पर भी जोर होगा- जिन्हें लोग नाश्ता, लंच या डिनर की जगह ले सकेंगे। सौर मंडल में ऐसे ग्रह भी खोजने पड़ सकते हैं, जहां इंसानी आबादी के रहने लायक आबोहवा मौजूद हो।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें : Indian’s Health And Fitness: जब खुद नहीं रहेंगे फिट तो विकसित कैसे बनेगा भारत?

अमरत्व और अमृत पाने की लालसा पुरानी है

एक बड़ा सच ये भी है कि उम्र को हराने की जंग, इंसान को जिंदगी से ही दूर करने लगी है। लोग जिंदगी के मर्म को ही भूलने लगे हैं कि जिंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए। पूरी दुनिया में अमरत्व और अमृत पाने की लालसा बहुत रोमांचक और पुरानी है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों में हनुमान, बाली, व्यास, विभीषण, परशुराम, कृपाचार्य, अश्वत्थामा को अमर बताया गया है। कहा जाता है कि आज भी अश्वत्थामा इस दुनिया में भटक रहे हैं। परशुराम का जिक्र त्रेतायुग की रामायण में भी और महाभारत में भी। इसी तरह हनुमानजी का जिक्र रामायण में भी है महाभारत में भी। ऐसे में एक सवाल ये भी उठता है कि कहीं लंबी उम्र को हमारे पौराणिक ग्रंथों में अमरत्व तो नहीं कहा गया और जिंदगी बढ़ाने वाले संतुलित खान-पान को अमृत।

विज्ञापन

अमर होने के लिए भारत आया था सिकंदर

हिमालय घाटी में हजारों साल से एक कहावत मशहूर है- यूनान से लड़ते हुए सिकंदर भारत आया था- एक ऐसे सरोवर की तलाश में, जिसका पानी पीते ही इंसान अमर हो जाता था। बहुत खोजबीन के बाद सिकंदर उस सरोवर तक पहुंचा। जैसे ही उसने पानी पीने की कोशिश की। एक बहुत ही कर्कश आवाज में कौआ चिल्लाया। इस पानी को मत पीओ। सिकंदर ने देखा- उस कौए की चोंच सोने की थी, शरीर ब्रज की तरह दमक रहा था। सिकंदर को ऐसा लगा, जैसे कौए का चक्रवर्ती राजा उसके सामने है। सिकंदर ने सवाल किया- इस सरोवर का पानी क्यों न पिएं। कौए ने जवाब दिया- तुम भी मेरी तरह हो जाओगे। अमर… हमेशा के लिए अमर। जिंदगी से परेशान। मैं हजारों साल से इस सोने की चोंच, वज्र जैसे शरीर और कर्कश आवाज के साथ धरती पर हूं। कोई बदलाव नहीं, ये भी कोई जीवन है।

यह भी पढ़ें : Parliament Winter Session: संसद में हंगामे का जिम्मेदार कौन, क्या ऐसे बनेगा 2047 का विकसित भारत?

विज्ञापन

इंसान का शरीर मरता है, आत्मा नहीं : श्रीमद्भागवत गीता

दरअसल, इस कहावत के जरिए संदेश देने की कोशिश होती रही है कि कुदरत ने जीवन और मृत्यु का जो चक्र बनाया है, उसमें हर किसी को अपना किरदार निभाना है। श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है कि इंसान का शरीर मरता है- आत्मा नहीं। इसलिए भारतीय परंपरा में इंसान की लंबी उम्र से अधिक अच्छे कर्मों पर जोर दिया गया है। बहुत हद तक संभव है कि आने वाले वर्षों में विज्ञान इतना तरक्की कर ले कि इंसान की मौजूदा उम्र दोगुनी हो जाए। लेकिन, हमेशा के लिए अमर होना दूर की कौड़ी दिख रही है।

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Anurradha Prasad

अनुराधा प्रसाद के लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं...मिशन है। अपनी साढ़े तीन दशक की टेलीविजन पत्रकारिता में हर तरह का प्रयोग देखा...हर बदलाव की साक्षी रहीं... एक तेज-तर्रार रिपोर्टर से सफल मीडिया उद्यमी बनीं....अपनी तेज नज़र, दूरदर्शी सोच और कलम के दम पर मीडिया जगत में एक दमदार हस्ताक्षर हैं। अनुराधा प्रसाद जी न्यूज़ 24 की एडिटर-इन-चीफ और बीएजी नेटवर्क की सीएमडी हैं  । बतौर टेलीविजन पत्रकार हर भारतीय की आवाज बुलंद करने की ईमानदार कोशिश किया और हमेशा Think First के फलसफे पर आगे बढ़ने में यकीन करती हैं। न्यूज़ 24 पर इतिहास गवाह है...सीरीज के जरिए दर्शकों को अतीत के पन्नों से रू-ब-रू करवाती रही हैं.. तो भारत भाग्य विधाता जैसी सीरिज के जरिए उन संस्थाओं और व्यक्तियों से दर्शकों का परिचय कराया- जो आजाद भारत में लोकतंत्र को  मजबूत और गणतंत्र को बुलंद बनाने में खामोशी से कर्मयोगी की भूमिका में हैं। इसी तरह भारत एक सोच के जरिए वक्त से आगे की सोच से भी दर्शकों का साक्षात्कार कराती रही हैं । ये अनुराधा प्रसाद की मुखर और प्रखर सोच का ही नतीजा है कि न्यूज़ 24 पर माहौल क्या है-कार्यक्रम में आम आदमी की आवाज को  पूरी तवज्जो मिलती है...तो India’s Tiger जैसी टेली सीरीज के जरिए उन गुमनाम जासूसों के योगदान से भी दर्शकों तो मिलवाने का भगीरथ प्रयास हो रहा है, जो खामोशी से अपना काम कर नेपथ्य में चले गए । मंथन का मंच सजा कर समाज और सिस्टम के असरदार लोगों की सोच से दर्शकों का साक्षात्कार कराती रही हैं । 1990 के दशक में प्रसारित आपके The horse's mouth और Let’s Talk शो ने भारतीय टेलीविजन को चर्चित शख्सियतों के इंटरव्यू का नया अंदाज दिया...तो आमने-सामने में आपके तीखे सवालों का देश के ज्यादातर सियासतदानों ने सामना किया। आपकी अगुवाई में बीएजी नेटवर्क ने सामाजिक सरोकार और जागरूकता के संदेश वाले कई कार्यक्रम बनाए तो चुनावी मौसम में नेताओं के चाल, चरित्र और चेहरे को भी रोचक अंदाज में दर्शकों के सामने रखने का सफल प्रयोग किया । अनुराधा प्रसाद भारत में टेलीविजन पत्रकारिता में पहली पीढ़ी की पत्रकार हैं...जिन्होंने अपनी बुलंद सोच और नए-नए शोज से भारतीय टेलीविजन न्यूज़ का चेहरा बदला । अनुराधा प्रसाद भारत को समर्पित एक ऐसी शख्सियत हैं... जो पत्रकारिता के जरिए हमेशा समाज को कुछ नया देने के मिशन में पूरी शिद्दत से जुटी रहती हैं...जुटी हुई हैं और जुटी रहेंगी।
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola