ADAS Technology: आज की कारें सिर्फ चलाने का साधन नहीं रहीं, बल्कि स्मार्ट और सेफ्टी से भरपूर मशीन बन चुकी हैं. इन्हीं नई तकनीकों में से एक है ADAS (Advanced Driver Assistance Systems), जो ड्राइविंग को आसान और सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है. यह सिस्टम ड्राइवर की मदद करता है, खतरे की पहले से चेतावनी देता है और जरूरत पड़ने पर खुद भी एक्शन ले सकता है. अगर आप नई कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो ADAS के बारे में जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.
ADAS क्या है और कैसे काम करता है
ADAS एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है जो ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर की मदद करता है. यह कार के आसपास के माहौल पर लगातार नजर रखता है और किसी खतरे की स्थिति में तुरंत अलर्ट देता है या जरूरत पड़ने पर खुद ब्रेक या स्टीयरिंग को नियंत्रित करता है. यह सिस्टम रियल टाइम में काम करता है और कई स्टडी के अनुसार दुर्घटनाओं की संभावना को 30 से 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है.
किन तकनीकों का इस्तेमाल होता है
ADAS में कई तरह की आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें कैमरे वाहन के सामने और आसपास की तस्वीरें लेते हैं, रडार दूरी और स्पीड मापता है, LiDAR आसपास का 3D मैप बनाता है और अल्ट्रासोनिक सेंसर पार्किंग में मदद करते हैं. इन सभी से मिलने वाले डेटा को ECU या SoC प्रोसेस करता है और AI की मदद से फैसला लिया जाता है. इसके बाद सिस्टम ड्राइवर को बीप, वाइब्रेशन या स्क्रीन अलर्ट देता है, या जरूरत पड़ने पर सीधे ब्रेक या स्टीयरिंग को एक्टिव कर देता है.

ADAS के लेवल क्या होते हैं?
SAE International ने ड्राइविंग ऑटोमेशन को छह स्तरों में बांटा है.
लेवल 0- कोई ऑटोमेशन नहीं
इस स्तर पर गाड़ी पूरी तरह ड्राइवर के नियंत्रण में होती है. सभी काम जैसे ब्रेक, एक्सिलरेशन और स्टीयरिंग ड्राइवर को ही करना पड़ता है.
लेवल 1- ड्राइवर असिस्टेंस
इसमें गाड़ी कुछ कामों में ड्राइवर की मदद करती है, जैसे क्रूज़ कंट्रोल या लेन में रखने की सुविधा. लेकिन गाड़ी का पूरा कंट्रोल अभी भी ड्राइवर के पास रहता है.
लेवल 2- आंशिक ऑटोमेशन
इस लेवल पर गाड़ी स्टीयरिंग और स्पीड दोनों को कुछ हद तक खुद कंट्रोल कर सकती है. फिर भी ड्राइवर को हर समय सतर्क रहना और जरूरत पड़ने पर तुरंत कंट्रोल लेना जरूरी होता है.
लेवल 3- कंडीशनल ऑटोमेशन
इस स्तर पर कुछ खास परिस्थितियों में गाड़ी खुद चल सकती है. लेकिन सिस्टम के कहने पर ड्राइवर को तुरंत कंट्रोल संभालने के लिए तैयार रहना पड़ता है.
लेवल 4- हाई ऑटोमेशन
इस लेवल पर गाड़ी ज्यादातर परिस्थितियों में बिना ड्राइवर के चल सकती है. कुछ सीमित हालात या जगहों पर ही ड्राइवर की जरूरत पड़ती है.
लेवल 5- फुल ऑटोमेशन
यह सबसे एडवांस स्तर है. इसमें गाड़ी पूरी तरह खुद चलती है और ड्राइवर की बिल्कुल जरूरत नहीं होती. स्टीयरिंग या पैडल की भी आवश्यकता नहीं रहती.
ADAS के प्रमुख फीचर्स
आज की कारों में कई उपयोगी ADAS फीचर्स मिलते हैं. Adaptive Cruise Control आगे चल रही गाड़ी से दूरी बनाए रखता है और स्पीड खुद एडजस्ट करता है. Automatic Emergency Braking टक्कर की आशंका होने पर खुद ब्रेक लगा देता है. Lane Departure Warning और Lane Keep Assist लेन से बाहर जाने पर चेतावनी देते हैं और स्टीयरिंग सही करते हैं. Blind Spot Monitoring उन जगहों पर नजर रखता है जो मिरर में नहीं दिखतीं. इसके अलावा Forward Collision Warning, Pedestrian Detection, Traffic Sign Recognition, Auto High Beam, Parking Assistance और Driver Monitoring System जैसे फीचर्स भी सुरक्षा बढ़ाते हैं.
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ADAS के फायदे
ADAS तकनीक का सबसे बड़ा फायदा सुरक्षा है. रिपोर्ट्स के अनुसार इससे दुर्घटनाएं 40 से 60 प्रतिशत तक कम हो सकती हैं. लंबी ड्राइव के दौरान थकान कम होती है और Adaptive Cruise Control जैसे फीचर्स से फ्यूल की बचत भी होती है. कई मामलों में ADAS वाली कार पर इंश्योरेंस प्रीमियम में छूट भी मिल सकती है.

कुछ चुनौतियां भी हैं
हालांकि ADAS काफी उपयोगी है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं. खराब मौसम, धूल या गंदगी की वजह से सेंसर सही तरीके से काम नहीं कर पाते. अगर ड्राइवर सिस्टम पर ज्यादा निर्भर हो जाए तो उसकी सतर्कता कम हो सकती है. इसके अलावा ADAS सिस्टम का मेंटेनेंस और रिपेयर महंगा होता है. भारत में कई जगह रोड मार्किंग और सड़क की स्थिति सही न होने से कुछ फीचर्स पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते.
क्या आपको ADAS वाली कार लेनी चाहिए?
मौजूदा समय में ADAS सिर्फ महंगी कारों तक सीमित नहीं रहा है. अब कम कीमत वाली कई गाड़ियों में भी यह फीचर मिलने लगा है. अगर आप सुरक्षा और आराम दोनों को महत्व देते हैं, तो ADAS वाली कार आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. आने वाले समय में यही तकनीक सेमी और फुल ऑटोनॉमस ड्राइविंग की नींव बनेगी.
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