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टायर पर लिखे R, P, J, V का क्या मतलब? 90% लोग नहीं जानते इनमें छुपी है आपकी सुरक्षा

क्या आप भी बिना समझे टायर खरीद लेते हैं? टायर पर लिखे छोटे-छोटे नंबर और लेटर आपकी गाड़ी की स्पीड, सेफ्टी और परफॉर्मेंस से सीधे जुड़े होते हैं. गलत स्पीड रेटिंग या साइज वाला टायर हाई स्पीड पर खतरा बन सकता है. नया टायर लेने से पहले इन कोड्स का मतलब जरूर जान लें, वरना छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है.

Author Written By: Mikita Acharya Updated: Feb 18, 2026 14:48
टायर के नंबर में छिपी है गाड़ी की सेफ्टी.
टायर के नंबर में छिपी है गाड़ी की सेफ्टी.

क्या आपने कभी अपनी बाइक या कार के टायर को ध्यान से देखा है? टायर की साइड पर लिखे नंबर और इंग्लिश लेटर सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होते, बल्कि इनमें टायर की ताकत, स्पीड क्षमता और सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी छिपी होती है. अगर इनका सही मतलब समझ लिया जाए तो न सिर्फ सही टायर चुनना आसान हो जाता है, बल्कि हाई स्पीड और खराब सड़कों पर भी आपकी सुरक्षा काफी हद तक बढ़ जाती है.

स्पीड रेटिंग क्या होती है और क्यों जरूरी है

टायर पर P, J, V जैसे लेटर लिखे होते हैं, जिन्हें स्पीड रेटिंग कहा जाता है. यह बताती है कि टायर तय वजन के साथ अधिकतम कितनी स्पीड तक सुरक्षित तरीके से चल सकता है. उदाहरण के लिए, P रेटेड टायर 150 किमी/घंटा तक और J रेटेड टायर 100 किमी/घंटा तक सुरक्षित माना जाता है. अगर इससे ज्यादा स्पीड पर लगातार चलाया जाए तो टायर में ज्यादा गर्मी पैदा होती है, रबर नरम पड़ने लगता है और फटने का खतरा बढ़ जाता है. खासकर बाइक में यह जोखिम ज्यादा होता है क्योंकि वाहन हल्का होता है और भारतीय सड़कों पर गड्ढे भी आम हैं.

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टायर साइज के नंबर का मतलब

टायर पर अक्सर 205/55 R16 जैसे नंबर लिखे होते हैं. इसमें 205 टायर की चौड़ाई (मिलीमीटर में) होती है. चौड़ा टायर बेहतर ग्रिप देता है, लेकिन माइलेज थोड़ा कम कर सकता है. इसके बाद 55 लिखा होता है, जिसे एस्पेक्ट रेशियो कहते हैं. यह बताता है कि टायर की ऊंचाई उसकी चौड़ाई का कितना प्रतिशत है. कम एस्पेक्ट रेशियो वाले टायर बेहतर कंट्रोल देते हैं, जबकि ज्यादा रेशियो वाले टायर आरामदायक राइड के लिए बेहतर होते हैं.

R और रिम साइज की जानकारी

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R का मतलब रेडियल टायर होता है, जो आजकल लगभग सभी गाड़ियों में इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद लिखा नंबर, जैसे 16, बताता है कि यह टायर 16 इंच के रिम पर फिट होगा. रिम साइज बदलने से गाड़ी की हैंडलिंग, कम्फर्ट और माइलेज पर असर पड़ सकता है, इसलिए हमेशा कंपनी द्वारा सुझाए गए साइज का ही इस्तेमाल करना चाहिए.

लोड इंडेक्स और स्पीड लेटर को समझें

टायर पर 91V जैसे नंबर और लेटर भी लिखे होते हैं. इसमें 91 लोड इंडेक्स होता है, जो बताता है कि टायर अधिकतम कितना वजन उठा सकता है. वहीं V स्पीड रेटिंग है, यानी यह टायर किस अधिकतम गति तक सुरक्षित रहेगा. कम लोड क्षमता या गलत स्पीड रेटिंग वाला टायर लगाने से सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है.

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DOT डेट और टायर की उम्र क्यों देखें

टायर खरीदते समय उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर देखें, जिसे DOT कोड में लिखा जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, टायर को 5-6 साल के भीतर बदल देना चाहिए, भले ही उसकी ग्रिप ठीक दिखाई दे. समय के साथ रबर सख्त हो जाता है और अचानक फेल होने का खतरा बढ़ जाता है.

सही एयर प्रेशर और ग्रिप का महत्व

टायर में सही हवा होना भी उतना ही जरूरी है. आमतौर पर बाइक या कार में 28–36 PSI के बीच प्रेशर रखा जाता है, लेकिन सही जानकारी के लिए वाहन की मैन्युअल देखना बेहतर होता है. इसके अलावा, अच्छा ट्रैक्शन वाला टायर बारिश या फिसलन भरी सड़कों पर बेहतर पकड़ देता है, जिससे दुर्घटना का खतरा कम होता है.

क्यों जरूरी है सही टायर का चुनाव

गलत साइज, कम लोड क्षमता या कम स्पीड रेटिंग वाला टायर लगाने से माइलेज, परफॉर्मेंस और सबसे अहम आपकी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. इतना ही नहीं, कंपनी की सिफारिश से अलग टायर लगाने पर कई मामलों में वारंटी और इंश्योरेंस क्लेम भी प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए नया टायर लेते समय हमेशा कंपनी के बताए साइज और रेटिंग का ही चुनाव करें. सही टायर आपकी गाड़ी की परफॉर्मेंस बढ़ाता है और हर सफर को सुरक्षित बनाता है.

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First published on: Feb 18, 2026 01:53 PM

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