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कितनी पुरानी कार खरीदना है सबसे बेहतर? Second Hand Car लेने के पहले ये 10 बातें जान लीं, तो कभी पछताना नहीं पड़ेगा

सेकंड हैंड कार खरीदना फायदे का सौदा भी हो सकता है और भारी नुकसान का कारण भी. अगर कार की उम्र, कंडीशन और दस्तावेजों पर सही ध्यान न दिया जाए, तो सस्ती कार भी महंगी पड़ सकती है. जानिए पुरानी कार खरीदते समय किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि आपका फैसला सही साबित हो.

Author Written By: Mikita Acharya Updated: Jan 8, 2026 15:40
second hand car
Second Hand Car लेने के पहले ये जान लें ये बातें. (Photo-News24 GFX)

Second Hand Car Buying Tips: आज के समय में नई कार की बढ़ती कीमतों के बीच सेकंड हैंड कार लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है. सही उम्र और अच्छी कंडीशन वाली पुरानी कार न सिर्फ बजट में फिट बैठती है, बल्कि कम खर्च में बढ़िया परफॉर्मेंस भी देती है. हालांकि, बिना सही जानकारी के सेकंड हैंड कार खरीदना नुकसान का सौदा भी साबित हो सकता है. इसलिए अगर आप पुरानी कार लेने का मन बना रहे हैं, तो खरीदारी से पहले इन जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है.

कितनी पुरानी कार खरीदना है सबसे बेहतर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक 2 से 5 साल पुरानी कार सबसे बेहतर विकल्प मानी जाती है. इस उम्र तक कार की कीमत में सबसे ज्यादा गिरावट आ चुकी होती है, लेकिन फीचर्स और परफॉर्मेंस अभी भी अच्छे रहते हैं. मेंटेनेंस खर्च भी ज्यादा नहीं आता. 5 से 7 साल पुरानी कार भी ली जा सकती है, लेकिन इसके लिए अच्छे मैकेनिक से पूरी जांच कराना जरूरी होता है. वहीं 10 से 12 साल पुरानी कारों में फीचर्स पुराने हो जाते हैं और खर्च बढ़ सकता है. 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल और 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल कारों पर कई शहरों में प्रतिबंध भी है.

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कार खरीदते समय किन बातों पर ध्यान देना जरूरी

डिप्रेशिएशन से फायदा

नई कार खरीदते ही उसकी कीमत तेजी से गिरती है. आमतौर पर 2 से 3 साल में कार अपनी कीमत का 20 से 30 प्रतिशत तक खो देती है. यही वजह है कि इसी उम्र की कारें सेकंड हैंड मार्केट में काफी सस्ते में मिल जाती हैं और खरीदार को सीधा फायदा होता है.

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कार की कंडीशन जांचना 

पुरानी कार खरीदते समय सिर्फ बाहरी लुक पर न जाएं. इंजन की आवाज, सस्पेंशन, ब्रेक, टायर, बॉडी और इंटीरियर की हालत को ध्यान से जांचें. बेहतर होगा कि किसी भरोसेमंद मैकेनिक से पूरी जांच जरूर कराएं ताकि बाद में कोई बड़ा खर्च न उठाना पड़े.

ओडोमीटर और माइलेज पर रखें नजर

कम चली हुई कार आमतौर पर बेहतर मानी जाती है, लेकिन सिर्फ कम माइलेज ही सब कुछ नहीं होता. भारत में औसतन 10 से 15 हजार किलोमीटर प्रति साल चलना सामान्य माना जाता है. कई बार ज्यादा चली हुई लेकिन समय पर सर्विस कराई गई कार भी अच्छी कंडीशन में होती है, इसलिए सर्विस रिकॉर्ड जरूर देखें.

रिसर्च करना है पहला कदम

सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले बाजार की अच्छी तरह रिसर्च करें. दोस्तों से सलाह लें, सोशल मीडिया और ऑनलाइन फोरम्स पर असली यूजर्स के अनुभव पढ़ें और यह जानने की कोशिश करें कि जिस मॉडल को आप खरीदना चाहते हैं, उसमें कोई आम समस्या तो नहीं है. 

  • वाहन निरीक्षण रिपोर्ट देखें- कार की असली हालत जानने के लिए वाहन निरीक्षण रिपोर्ट बेहद अहम होती है. इसमें पेंट, इंजन, टायर, इंटीरियर और दस्तावेजों की जांच की जाती है. इससे आपको पहले ही अंदाजा हो जाता है कि आगे चलकर कितना खर्च आ सकता है.
  • बॉडी और बाहरी हिस्से में क्या देखें- कार को दिन के उजाले में देखें और पेंट के रंग में फर्क, डेंट, खरोंच या ओवरस्प्रे पर ध्यान दें. गलत फिटिंग या जरूरत से ज्यादा बॉडी फिलर इस्तेमाल होना कार के एक्सीडेंट इतिहास की ओर इशारा कर सकता है.
  • केबिन और इंटीरियर की हालत- कार का केबिन वही जगह है जहां आप सबसे ज्यादा समय बिताएंगे. सीटें, डैशबोर्ड, बटन, एसी वेंट और प्लास्टिक पार्ट्स की हालत जरूर देखें. ज्यादा घिसावट या टूट-फूट आगे चलकर अतिरिक्त खर्च बढ़ा सकती है.
  • टायर और कांच भी जांच- टायर आमतौर पर 30 से 50 हजार किलोमीटर तक चलते हैं. अगर कार ज्यादा चली है और टायर पुराने हैं तो खर्च तय है. साथ ही सभी खिड़कियों पर लिखा निर्माण वर्ष एक जैसा होना चाहिए, वरना कार के अतीत पर सवाल उठ सकते हैं.
  • इंजन बोनट की जांच- बोनट खोलकर इंजन की आवाज, कंपन और वायरिंग पर ध्यान दें. VIN या चेसिस नंबर से छेड़छाड़ के निशान खतरे की घंटी हो सकते हैं. स्टार्ट और बंद करते समय इंजन का व्यवहार भी बहुत कुछ बता देता है.
  • टेस्ट ड्राइव जरूरी- टेस्ट ड्राइव के बिना कार खरीदना सबसे बड़ी गलती हो सकती है. ब्रेक, गियर, सस्पेंशन और राइड क्वालिटी को अलग-अलग रास्तों पर चलाकर परखें. कोई भी असामान्य आवाज या झटका भविष्य की बड़ी परेशानी बन सकता है.
  • ये दस्तावेज जरूर जांचें- आरसी, बीमा, पीयूसी सर्टिफिकेट और सर्विस रिकॉर्ड जरूर देखें. अगर पुराने बिल और सर्विस बुकलेट सही हालत में हैं तो कार पर भरोसा बढ़ता है और ट्रांसफर प्रक्रिया भी आसान होती है.

कीमत और मोलभाव कैसे करें

पुरानी कार की कीमत सिर्फ मॉडल और साल से नहीं, बल्कि बाजार की मांग से तय होती है. थोड़ी रिसर्च से आपको सही कीमत का अंदाजा हो जाएगा और आप बेहतर मोलभाव कर पाएंगे.
अगर सही जानकारी और समझदारी के साथ सेकंड हैंड कार खरीदी जाए, तो यह एक बेहतरीन और किफायती फैसला साबित हो सकता है. 

ये भी पढ़ें- Second Hand Luxury Car: सेकेंड हैंड BMW-Mercedes लेने का प्लान? पहले जान लें फायदे और नुकसान

First published on: Jan 08, 2026 03:35 PM

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