Thursday, December 1, 2022
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Raksha Bandhan 2022: रक्षा बंधन पर भद्रा का साया, जानें- कब राखी बांधना रहेगा शुभ

भद्रा को लेकर पुराणों में एक कथा मिलती है। उसके मुताबिक भद्रा सूर्यदेव की पुत्री और शनि की बहन हैं। कहते हैं जिस तरह से शनि का स्वभाव थोड़ा सख्त था उसी तरह भद्रा भी स्वभाव से थोड़ी कड़क मिजाज थी।

Raksha Bandhan 2022: इस साल रक्षाबंधन की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन की स्थिति है। सावन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस सावन मास की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 11 अगस्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर शुरू होकर और 12 अगस्त सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

 

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ऐसे में 11 अगस्त के दिन ही राखी का त्योहार मनाया जाएगा। लेकिन इस दिन भद्र काल सुबह से ही शुरू हो जाएगा, जो रात 08 बजकर 51 मिनट पर खत्म होगा। इसके बाद राखी का त्योहार मनाया जा सकता है, ऐसे में 12 अगस्त को सुबह 7 बजे तक पूर्णिमा तिथि होने के कारण कुछ लोग 12 अगस्त को राखी मनाने की सोच रहे हैं। दरअसल रात को भाइयों को राखी नहीं बांधी जाती। इसलिए 12 अगस्त को ही राखी बांधना शुभ माना जा रहा है।

ऐसे में अगर आप भी 12 अगस्त को ही राखी बांधने की सोच रहे हैं तो सुबह 7 बजकर 5 मिनट से पहले भाइयों को राखी बांधी जा सकती है।

इस बीच ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का कहना है भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं रहेगा, लेकिन पूंछ भद्रा के समय राखी बांधी जा सकती है। पूंछ भद्रा 11 अगस्त शाम 5 बजकर 17 मिनट से शुरू होगी और 06 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इस दौरान राखी बांधना शुभ रहेगा।

इसके साथ ही कुछ लोगों का कहना है कि 12 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि रहेगी, इसलिए उस पूरे दिन पूर्णिमा तिथि का वास माना जाएगा। ऐसे में इस दिन भाई बहन पूरे दिन रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं।

जानें- भद्रा कौन है और क्या है इसकी कथा

भद्रा को लेकर पुराणों में एक कथा मिलती है। उसके मुताबिक भद्रा सूर्यदेव की पुत्री और शनि की बहन हैं। कहते हैं जिस तरह से शनि का स्वभाव थोड़ा सख्त था उसी तरह भद्रा भी स्वभाव से थोड़ी कड़क मिजाज थी। भद्रा को काफी क्रोधी स्वभाव का बताया गया है। इनके स्वभाव को काबू करने के लिए ही ब्रह्माजी ने उन्हें पंचांग में विष्टि करण के रूप में जगह दी।

दरअसल, भद्रा देवी एक समय पूरे संसार को अपना निवाला बनाने वाली थी। इसी वजह से वह सभी कार्यों में बाधा डालने लगी। इसके बाद उन्हें ब्रह्मा जी ने समझाया और उन्हें करणों में 7वें करण विष्टि के रूप में जगह दी। कहा जाता है कि भद्रा का तीनों लोकों में वास होता है। ये हर समय तीनों लोकों में विचरण करती रहती है। जहां जिस लोक में भद्रा होती है उस समय उस लोक में शुभ काम नहीं किया जाता है। इसकी वजह यह है कि भद्रा काल में किए गए काम का परिणाम शुभ नहीं होता है।

 

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रक्षाबंधन के दिन भद्रा का पृथ्वी पर वास रहेगा इसलिए कहा जा रहा है कि भद्रा के समय रक्षाबंधन का पर्व मनाना शुभ नहीं होगा। विशेष स्थिति में भद्रा पुच्छ काल में 11 अगस्त को शाम 5 बजकर 18 मिनट से लेकर 6 बजकर 20 मिनट तक के समय भाई बहन चाहें तो राखी का पर्व त्योहार मना सकते हैं।

 

 

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