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Calendars of India: शक या विक्रम संवत, भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर कौन-सा है? जानें अन्य पंचांगों की रोचक जानकारी

Calendars of India: भारत में समय की गणना के लिए कई कैलेंडर प्रचलित हैं. क्या आप जानते हैं शक और विक्रम संवत में क्या अंतर है, भारत राष्ट्रीय कैलेंडर कौन-सा है और देश के अन्य पंचांग कौन-कौन से हैं? जानिए इन सभी सवालों के जवाब और रोचक जानकारी.

Author Written By: Shyamnandan Updated: Dec 25, 2025 20:51
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Calendars of India: भारत एक ऐसा देश है जहां समय की गणना का बहुत पुराना इतिहास रहा है. हमारे यहां अलग-अलग क्षेत्रों में कई तरह के कैलेंडर या ‘संवत’ प्रचलित हैं. ये केवल तारीखें नहीं बताते, बल्कि त्योहार, कृषि, धार्मिक पर्व और सामाजिक आयोजन तय करने में भी मदद करते हैं. हर कैलेंडर की अपनी पहचान और कहानी है. अंग्रेजी नया साल 2026 शुरू होने वाला है. आइए इस अवसर जानते हैं, भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर कौन-सा है- शक या विक्रम संवत, और इस देश में कौन-कौन से कैलेंडर प्रचलित हैं?

विक्रम संवत: प्राचीन और धार्मिक कैलेंडर

विक्रम संवत भारत के सबसे पुराने कैलेंडरों में से एक है और इसका नाम राजा विक्रमादित्य से जुड़ा है. इसे चंद्र-सौर प्रणाली पर आधारित कैलेंडर माना जाता है, जिसमें चांद और सूरज दोनों की गणना का उपयोग होता है. वर्ष की शुरुआत आमतौर पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है, जो आम तौर पर मार्च-अप्रैल में आता है. विक्रम संवत ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 57 वर्ष आगे चलता है, इसलिए इसका वर्ष गिनती अलग रहती है.

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विक्रम संवत कैलेंडर धार्मिक त्योहारों, शुभ मुहूर्त और पूजा-अनुष्ठानों के लिए उत्तर भारत में बहुत उपयोगी है. विक्रम संवत में वर्ष 12 महीनों और दो पक्षों, शुक्ल और कृष्ण में बांटा जाता है. इस संवत का उपयोग धार्मिक जीवन में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके माध्यम से त्योहारों की तिथियों, उपवासों, अनुष्ठानों और विवाह जैसे आयोजनों का निर्णय किया जाता है.

शक संवत: भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर

भारत सरकार ने शक संवत को राष्ट्रीय पंचांग के रूप में 22 मार्च 1957 से आधिकारिक रूप से अपनाया. यह कैलेंडर पूरी तरह सूर्य-आधारित है और वैज्ञानिक रूप से बहुत सटीक माना जाता है. इसका वर्ष प्रथम चैत्र से शुरू होता है और आम तौर पर अंग्रेजी कैलेंडर के साथ-साथ चलता है. सरकारी गजट, समाचार, सरकारी छुट्टियां और सरकारी दस्तावेजों में इसी शक संवत का प्रयोग होता है.

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शक संवत में महीनों और दिनों की गिनती सौर चक्र के अनुसार होती है और इसका निर्माण ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुरूप आसान समझ के लिए किया गया था. इसी वजह से यह शहरी और प्रशासनिक कामों में अधिक उपयोगी है.

क्षेत्रीय कैलेंडर: तमिल, बंगाली और मलयालम

भारत में विभिन्न राज्यों की अपनी सांस्कृतिक पहचान भी कैलेंडरों में दिखती है:

तमिल कैलेंडर: तमिल संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा, जिस पर कृषि, त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन तय होते हैं. इसका नया वर्ष 14 अप्रैल को मनाया जाता है.

बंगाली कैलेंडर: बंगाल क्षेत्र में यह मुख्य कैलेंडर है और 14 या 15 अप्रैल को बंगाली नववर्ष ‘पोइला बोइशाख’ होता है, जिस दिन व्यापारी नई बही-खाता शुरू करते हैं.

मलयालम कोल्लम संवत: केरल का स्थानीय कैलेंडर, जिसकी शुरुआत लगभग 17 अगस्त को होती है और इसे समुद्री व्यापार के इतिहास से जोड़ा जाता है.

गुजराती कैलेंडर: यह एक चंद्र-सौर कैलेंडर है जिसमें महीने की शुरुआत अमावस्या (अमांत प्रणाली) से होती है. गुजराती नव वर्ष (बेस्तु वर्ष), दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है. इस प्रकार इसका पहला महीना ‘कार्तक’ यानी कार्तिक मास होता है.

आपको बता दें कि ये सभी कैलेंडर स्थानीय जीवन, कृषि चक्रों और मौसम परिवर्तन को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं.

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अन्य कैलेंडर: उगादी, नानकशाही और कोशुर कैलेंडर

उगादी पंचांग: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में प्रचलित है. इसे मार्च-अप्रैल में नववर्ष के रूप में मनाया जाता है.

नेपाली कैलेंडर (विक्रम संवत): नेपाल में भी विक्रम संवत राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में उपयोग में है और इसका नव वर्ष 13-14 अप्रैल को आता है.

नानकशाही कैलेंडर: सिख समुदाय द्वारा गुरु नानक देव जी के प्रकाश वर्ष से गणना के लिए उपयोग किया जाता है.

कोशुर कैलेंडर: कोशुर कैलेंडर कश्मीरी हिंदू समुदाय द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक चंद्र आधारित पंचांग है. इसकी शुरुआत भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है, जिसे ‘नवरेह’ कहते हैं.

तिब्बती कैलेंडर: यह चंद्र-सौर प्रणाली पर आधारित है और बौद्ध दर्शन से गहरी रूप से जुड़ा है. इसमें धार्मिक तिथियों और त्योहारों की गणना होती है.

इस प्रकार भारत का कैलेंडर सिस्टम केवल तारीख बताने वाला साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, धर्म, कृषि और सामाजिक जीवन की पहचान भी है. हर कैलेंडर की अपनी अलग भूमिका और महत्व है, जो भारतीय जीवन को समय के साथ जुड़ा रखता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Dec 25, 2025 08:51 PM

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