इमाम रजा की दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक हुए अयातुल्ला अली खामेनेई, अंतिम यात्रा में उमड़ी लाखों की भीड़

Ali Khamenei Funeral Mashhad: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मशहद स्थित पवित्र इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है. एक सप्ताह तक चले शोक सभाओं के बाद संपन्न हुए इस अंतिम संस्कार में लाखों शोकाकुल लोग सड़कों पर उतरे. इस बीच खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर गहरा गया है.

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Ali Khamenei Funeral Mashhad: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को एक हफ्ते चले राष्ट्रव्यापी और अंतरराष्ट्रीय शोक कार्यक्रमों के बाद पवित्र शहर मशहद में स्थित इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है. 28 फरवरी 2026 को तेहरान स्थित उनके आधिकारिक आवास पर हुए अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे जाने के 4 महीने बाद उनके पार्थिव शरीर को इराक के नजफ और करबला तथा ईरान के कोम और तेहरान से होते हुए अंतिम विश्राम स्थल लाया गया. इस मौके पर लाखों शोकाकुल ईरानी नागरिकों ने भाग लिया, हालांकि उनके बेटे और नए सर्वोच्च नेता चुने गए मोजतबा खामेनेई हमले में घायल होने के बाद से अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और अंतिम यात्रा में अनुपस्थित रहे.

लाखों की भीड़ और अमेरिका विरोधी नारे

अंतिम यात्रा के दौरान खामेनेई के पार्थिव शरीर को एक विशेष वाहन पर रखकर मशहद की मुख्य सड़कों से इमाम रजा दरगाह ले जाया गया. काले कपड़ों में लिपटे लाखों लोगों ने ईरानी झंडे, दिवंगत नेता की तस्वीरें और क्रांति से जुड़े लाल बैनर हाथों में थाम रखे थे. भीड़ ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. पूरे शहर में “हमें उठ खड़ा होना होगा” जैसे सरकारी संदेशों वाले पोस्टर लगाए गए हैं.

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तेहरान के बजाय ‘मशहद’ का धार्मिक चयन क्यों?

आमतौर पर ईरान के शीर्ष राजनीतिक व धार्मिक नेताओं को राजधानी तेहरान में दफनाया जाता है, खामेनेई को उसी मशहद शहर में दफनाया गया है, जहां उनका जन्म हुआ था और उन्होंने शुरुआती धार्मिक शिक्षा ली थी. 9वीं शताब्दी में बनी इमाम रजा की दरगाह शिया समुदाय के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां हर साल दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. खामेनेई को उनकी जन्मभूमि मशहद में दफनाना यह दर्शाता है कि ईरान की सत्ता युद्ध के इस दौर में जनभावनाओं को इस्लामिक राष्ट्रवाद और शिया अकीदत के साथ जोड़कर एकजुट रखना चाहती है.

इराक से जनाजा गुजारने का रणनीतिक संदेश

खामेनेई के ताबूत को इराक के पवित्र शहरों नजफ और करबला ले जाया गया. जिस इराक से ईरान ने 1980 के दशक में 8 साल खूनी जंग लड़ी थी, वहां खामेनेई के जनाजे को राजकीय सम्मान मिलना इस बात का सबूत है कि मध्य पूर्व में शिया-गठबंधन राजनीतिक सीमाओं से परे कितना मजबूत हो चुका है.

खाड़ी क्षेत्र में फिर बढ़ा सैन्य टकराव

खामेनेई की अंतिम विदाई के बीच मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जंग के बादल फिर मंडराने लगे हैं. अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है. करीब तीन सप्ताह पहले दोनों पक्षों के बीच बने नाजुक युद्धविराम और परमाणु वार्ता की संभावनाओं पर इस ताजा घटनाक्रम से पानी फिरता दिख रहा है.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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