---विज्ञापन---

दुनिया angle-right

नाती-पोतों को लेकर बुजुर्गों का बदल रहा नजरिया, उनके ‘शौक’ पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

Grandparents New Lifestyle: एक उम्र के बाद लोग अपने परिवार के साथ बिजी हो जाते हैं। वहीं, दादा-दादी बनने के बाद वह जीवन में अपने नाती-पोतों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, लेकिन आधुनिक युग में यह नजरिया बदलता जा रहा है।

---विज्ञापन---

Grandparents New Lifestyle: भारत में बच्चों की शादी के बाद माता-पिता की इच्छा अपने नाती-पोतों का मुंह देखने की होती है। अपने बच्चों के बाद जो उनको सबसे अजीज होते हैं, वह उनके नाती-पोते ही होते हैं। एक उम्र के बाद लोगों का ज्यादातर समय अपने ग्रेंडचाइल्ड्स के साथ ही गुजरता है, लेकिन अब इसके उलट ट्रेंड चलने लगा है। दरअसल, ब्रिटेन-अमेरिका समेत कई देशों में बुजुर्ग लोग अपने नाती-पोतों के बजाय अपना समय दूसरी जगह पर बिताना पसंद कर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि उनको बच्चों से प्यार है, लेकिन उनके साथ ही रहना चाहते। जानिए आखिर यह ट्रेंड क्या है और एक्सपर्ट का इस पर क्या कहना है?

पोते-पोतियों से प्यार है, लेकिन साथ नहीं रहना

अमेरिका जैसे विकसित देशों में परिवार में बच्चे एक उम्र के बाद ही अपना घर छोड़ देते हैं। इसी कल्चर के बीच एक नया कल्चर बन रहा है। जिसमें  दादा-दादी अपने नाती-पोतों के साथ नहीं रहना चाह रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन-अमेरिका समेत कई देशों में इन दिनों इस तरह का कल्चर तेजी से बढ़ा है। लंदन की 77 साल की कॉन्सटेंस पूरी तरह से अपना वक्त अपनी पसंद के काम करने में बिता रही हैं।

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: कोरोना जैसी घातक बीमारी से 50 लोगों की मौत, इस देश में रहस्यमयी बीमारी से मचा कोहराम

बुजुर्ग खुद को दे रहे महत्व

मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर कॉन्सटेंस का कहना है कि वह इन दिनों पियानो सीखने के अलावा, परफॉर्म भी करती हैं। इसके अलावा वह आर्ट प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले रही हैं। उनका मानना है कि उन्हीं चीजों से जुड़ी रहना चाहती हैं, जो उनके लिए मायने रखती हैं। वह कहती हैं कि उनको महसूस हुआ कि लोग उनसे अलग उम्मीदें रखते हैं। उनका मानना है कि मुझे पोते-पोतियों के साथ अपना वक्त बिताना चाहिए। इस पर कॉन्सटेंस का कहना है कि पोते-पोतियों से उन्हें प्यार है, लेकिन उनको अपने विचारों पर काम करना है।

---विज्ञापन---

इस पर एक्सपर्ट का क्या कहना है?

बुजुर्गों के इन तरह के फैसले पर मनोवैज्ञानिक कैरल फिशमैन का कहना है कि बुजुगों को यह कहने की पूरी आजादी देनी चाहिए कि वह दादी-नानी की पारंपरिक भूमिका नहीं निभाना चाहते हैं। भले ही उन्हें अपने नाती-पोतों से प्यार है, पर इसके लिए वे समझौता नहीं कर सकते हैं। उनका कहना है कि पूरे जीवन में इन लोगों ने भी खुद के लिए पैसे बचाए हैं, उससे वह दूसरों पर निर्भर हुए बिना अपना जीवन जी सकते हैं।

मशहूर लेखिका ईष डिस्की का कहना है कि ‘उन्हें खुद के लिए बेहतर फैसले लेने दें। वह भी अपने मन मुताबिक जीवन जीने के पूरे हकदार हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि उनके इस बदलाव को हमें अपनाने की जरूरत है।

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: Gold Card क्या? जिससे मिलेगी अमेरिका की नागरिकता, अब नहीं होगी डंकी रूट से जाने की जरूरत!

First published on: Feb 28, 2025 11:39 AM

End of Article

About the Author

Shabnaz

शबनाज़ खानम एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो वर्तमान में न्यूज़24 में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने इंडिया डेली लाइव, ज़ी न्यूज़ सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में विभिन्न पदों पर ज़िम्मेदारियां निभाई हैं। शबनाज़ ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। उन्हें डिजिटल और टीवी दोनों में काम करने का 5 साल का अनुभव प्राप्त है और वे अपने संपादन कौशल, बारीक नज़र और विस्तृत कहानी को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। काम के अलावा, उन्हें सिनेमा और लाइफस्टाइल पर बातचीत करना बेहद पसंद है, जो उनकी कहानी कहने की गहरी रुचि को दर्शाता है।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola