Rajesh Bharti
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Evil Experiments Part 3 : तरह-तरह के प्रयोग के लिए इंसान के साथ क्रूरता भरे बर्ताव के लिए जापान भी कम चर्चाओं में नहीं रहा है। हिटलर की नाजी सेना की तरह जापानी सेना ने भी कई क्रूर प्रयोग किए। ये प्रयोग ऐसे थे जिनके बारे में जानकर आप भी सिहर उठेंगे। जापानी सैनिक प्रयोग के नाम पर जिंदा कैदियों के शरीर को चीर डालते थे। इससे कैदियों को असहनीय दर्द होता था। वे दर्द से तब तक चिल्लाते थे, जब तक मर नहीं जाते थे। कई खतरनाक बैक्टीरिया को लेकर भी इंसानों पर प्रयोग किए।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान की आर्मी यूनिट 731 में काफी कैदियों को शामिल किया गया था। इसका कोड नाम क्वांटुंग सेना का महामारी निवारण और जल शोधन विभाग था। इस यूनिट की कमांड शिरो इशी नाम के एक सर्जन डॉक्टर के हाथों में थी। इसे डॉक्टर डेथ भी बोला जाता है। इन्हें जापान के इस डेथ कैंप का वास्तुकार माना जाता है।
इन यूनिट में शामिल ये कैदियों के साथ प्रयोग के नाम पर काफी क्रूर बर्ताव किया गया। इसमें पुरुषों, महिलाओं और बच्चों तक को शामिल किया गया था। प्रयोग के नाम पर इन्हें कई तरह के खतरनाक वायरस से संक्रमित किया गया, महिलाओं का रेप किया गया, फ्लेमेथ्रोवर (ऐसा उपकरण जिससे आग निकलती है) को लेकर प्रयोग किए गए। यहां तक की इन्हें प्लेग बम की तरह भी इस्तेमाल किया गया। इस यूनिट में शामिल कैदियों को प्रयोग के नाम पर मार डाला गया।

शिरो इशी और यूनिट 731 का कैंप जहां प्रयोग के लिए कैदियों को रखा जाता था।
इशी ने 1936 में एक बायलॉजिकल वेलफेयर रिसर्च यूनिट की स्थापना की थी। इसमें युद्ध में इस्तेमाल होने वाले जर्म्स, हथियारों की क्षमता और मानव शरीर की लिमिट पर प्रयोग किए जाते थे। लेकिन हकीकत में यहां यह हर लिमिट को क्रॉस किया जाता था।
इशी जापान के सम्राट हिरोहितो के लिए काम करता था और इसे हिरोहितो की ओर से इसके लिए फंड मिलता था। जिन कैंपों में इंसान पर ये प्रयोग किए जाते थे वहां किसी भी बाहरी शख्स को आने की अनुमति नहीं थी। अगर कोई हवाई जहाज इस एरिया के आसपास भी आता था, तो उसे जापान एयर फोर्स द्वारा मार गिराया जाता था। जिन कैदियों पर प्रयोग किए जाते थे, उन्हें हेल्दी चीजें खिलाई जाती थीं ताकि प्रयोग के लिए इनका शरीर हेल्दी रहे। इन्हें डाइट में चावल, मीट, फिश और कई बार शराब भी दी जाती थी।
बीमारी का असर देखने के लिए महिलाओं के साथ कैदियों द्वारा जबरदस्ती रेप करवाया गया। दरअसल, पुरुषों को सिफिलिस से संक्रमित किया गया। सिफिलिस बैक्टीरियल सेक्शुअल ट्रांसमिटिड इंफेक्शन (SIT) है। इसके बाद उन्हें महिला कैदियों के साथ रेप करने को मजबूर किया गया। इसका उद्देश्य यह देखना था कि यह रोग कैसे फैलता है। इससे महिलाओं को जबरदस्ती प्रेग्नेंट किया गया। यहां यह देखना था कि पैदा होने वाले बच्चों में यह रोग कैसे फैलता है। हालांकि जो भी बच्चा पैदा हुआ, वह जीवित नहीं बचा।
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