US-Pakistan Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट्स पर कड़ी निगरानी के लिए 397 मिलियन डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपये) जारी किए हैं। यह रकम जारी करने के पीछे यह सुनिश्चित करना है कि पाकिस्तान इन विमानों का इस्तेमाल आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए करे। दरअसल, 2019 में पुलवामा अटैक को लेकर पाकिस्तान पर आरोप लगे थे कि उसने अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमानों का हमले में इस्तेमाल किया था। जानिए अब अमेरिका ने यह फैसला क्यों लिया है?
14 फरवरी 2019 को पुलवामा अटैक
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकी हमला हुआ, जिसके बाद भारत ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के शिविरों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इसके बाद फिर से पाकिस्तान की तरफ से जवाबी हमले हुए। इस जंग में पाक वायु सेना (PAF) ने F-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान पर अंतिम उपयोग शर्तों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया।
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इसमें कहा गया कि अमेरिका के दिए F-16 विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी उद्देश्यों के लिए थे, लेकिन इनका गलत इस्तेमाल किया गया। हालांकि, अमेरिका ने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन बाद में पुष्टि की गई कि अमेरिका ने अगस्त 2019 में पाकिस्तान को इसको लेकर फटकार लगाई थी। इसके बाद अब अमेरिका का निगरानी का फैसला काफी बड़ा माना जा रहा है।
अमेरिका कैसे करेगा निगरानी?
अमेरिका का दावा करते हुए कहा कि मजबूत निगरानी तंत्र से आने वाले समय में किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकने का काम किया जाएगा। जिसके लिए अमेरिका ने खास प्लान बनाया है:
टेक्निकल सिक्योरिटी टीम (TST)- अमेरिकी वायुसेना कर्मियों और ठेकेदारों से बनी यह टीम F-16 के उपयोग पर 24 घंटे निगरानी रखने के लिए पाकिस्तान में ही तैनात की जाएगी।
रिस्ट्रिक्टेड बैस एक्सेस: पाकिस्तान को उन ठिकानों तक पहुंच सीमित की जाएगी, जहां F-16 विमान तैनात होंगे। जिससे चीनी डिजाइन वाले JF-17 विमानों से उनकी दूरी को सुनिश्चित किया जा सके।
ऑपरेशनल अप्रूवल्स: पाकिस्तान के बाहर सभी F-16 संचालन या संयुक्त अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए अप्रूवल लेना होगा। यह अप्रूवल अमेरिकी सरकार का होगा।
हथियार कंट्रोल: AMRAAM मिसाइलों को निर्दिष्ट ठिकानों (Designated Bases) तक ही सीमित रखा जाएगा। इससे जोखिम कम हो जाएगा।
बेस लिमिटेशन्स: F-16 केवल शाहबाज एयरबेस (Jacobabad) और मुशफ एयरबेस (Sargodha) पर ही तैनात किए जा सकेंगे।
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