दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद में ईमानदारी की एक ऐसी मिसाल देखने की मिली है, जिसकी आज के दौर में उम्मीद करना भी बेमानी होगी. एक कबाड़ी ने लालच से ऊपर उठते हुए 15 लाख रुपये का सोना उसके असली मालिक तक पहुंचा दिया. सोने से भरा यह पैकेट उन्हें, महीनों पहले एक घर से खरीदे गए पुराने सामान में मिला था.
उस पैकेट में 100 ग्राम सोने के गहने थे. यह पैकेट अशोक शर्मा का था. उन्होंने दिवाली की सफाई के दौरान गलती से इसे बेच दिया था.
एसीपी बल्लभगढ़, जितेश मल्होत्रा के कार्यालय में औपचारिक रूप से कबाड़ी ने असली मालिक को सोना सौंपा. एसीपी शर्मा ने बताया कि उनके परिवार ने चोरी से बचने के लिए सोने के गहनों को एक डिब्बे में रख दिया था. फिर पिछले साल जनवरी में कुंभ मेले में जाने से पहले घर पर एक बोरी के अंदर रख दिया गया था. दिवाली की सफाई के दौरान, बोरी को गलती से कबाड़ मान लिया गया और कबाड़ी को बेच दिया गया.
जब परिवार ने कबाड़ी से संपर्क किया, तो वे तुरंत गहनों का पता नहीं लग सका. जिसके बाद परिवार निराश हो गया. करीब चार महीने बाद, हाजी अख्तर खान नाम के कबाड़ी को कबाड़ की छंटाई के दौरान कागज में लिपटा सोना मिला. बिना किसी देरी के, उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और गहने एसीपी मल्होत्रा के कार्यालय ले आए, जहां इसे शर्मा को लौटा दिया गया.
दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद में ईमानदारी की एक ऐसी मिसाल देखने की मिली है, जिसकी आज के दौर में उम्मीद करना भी बेमानी होगी. एक कबाड़ी ने लालच से ऊपर उठते हुए 15 लाख रुपये का सोना उसके असली मालिक तक पहुंचा दिया. सोने से भरा यह पैकेट उन्हें, महीनों पहले एक घर से खरीदे गए पुराने सामान में मिला था.
उस पैकेट में 100 ग्राम सोने के गहने थे. यह पैकेट अशोक शर्मा का था. उन्होंने दिवाली की सफाई के दौरान गलती से इसे बेच दिया था.
एसीपी बल्लभगढ़, जितेश मल्होत्रा के कार्यालय में औपचारिक रूप से कबाड़ी ने असली मालिक को सोना सौंपा. एसीपी शर्मा ने बताया कि उनके परिवार ने चोरी से बचने के लिए सोने के गहनों को एक डिब्बे में रख दिया था. फिर पिछले साल जनवरी में कुंभ मेले में जाने से पहले घर पर एक बोरी के अंदर रख दिया गया था. दिवाली की सफाई के दौरान, बोरी को गलती से कबाड़ मान लिया गया और कबाड़ी को बेच दिया गया.
जब परिवार ने कबाड़ी से संपर्क किया, तो वे तुरंत गहनों का पता नहीं लग सका. जिसके बाद परिवार निराश हो गया. करीब चार महीने बाद, हाजी अख्तर खान नाम के कबाड़ी को कबाड़ की छंटाई के दौरान कागज में लिपटा सोना मिला. बिना किसी देरी के, उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और गहने एसीपी मल्होत्रा के कार्यालय ले आए, जहां इसे शर्मा को लौटा दिया गया.