पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है। बीजेपी ने मैदान पर उतर तैयारियां भी शुरू कर दीं है लेकिन विपक्ष यानी कांग्रेस में अभी तक कंफ्यूजन है। कंफ्यूजन चुनाव में गठबंधन या अकेले लड़ने की। कांग्रेस अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि टीएमसी से गठबंधन कर लिया जाए, पिछली बार की तरह लेफ्ट के साथ तालमेल किया जाए। या फिर रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियों ‘यदि तुम्हारी पुकार सुनकर कोई न आए, तो अकेले ही चलो’ को साकार करते हुए अकेले ही चुनाव मैदान में उतरा जाए। पार्टी के सामने ये 3 विकल्प हैं, जिन पर सूबे के नेता बंटे हुए हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी और बीजेपी सत्ता की लड़ाई में आमने सामने है, लेकिन कांग्रेस अभी तक तय नहीं कर पा रही है कि बंगाल के चुनाव में कैसे उतरेगी। पार्टी के भीतर अभी तक यही तय नहीं हो पाया है. कि एकला चलो या गठबंधन। फिलहाल उसके सामने तीन विकल्प मौजूद हैं, लेकिन तीनों को लेकर पार्टी के नेता एकमत नहीं हैं बल्कि बंटे हुए हैं।
टीएमसी की और से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गए हैं। शुक्रवार को भी अभिषेक बनर्जी ने एक बड़ी रैली की। दूसरी ओर बीजेपी की ओर से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाला हुआ है। हाल ही में अमित शाह का बंगाल दौरा खत्म हुआ है. शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी और बंगाल सरकार को आड़े हाथों लिया था।
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कांग्रेस के पास तीन विकल्प मौजूद?
1- टीएमसी के साथ गठबंधन
कांग्रेस के पास सबसे बड़ा विकल्प टीएमसी के साथ गठबंधन का है. 2024 लोकसभा चुनाव के वक्त टीएमसी ने कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें ऑफर की थीं, जिससे आहत कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ समझौता किया है।
हालांकि टीएमसी ने ये भी कहा कि, वो इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनी रहेगी। ऐसे ही विधानसभा चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी ने साफ किया है कि बंगाल में उसे बीजेपी से लड़ने के लिए कांग्रेस की जरूरत नहीं है, बाकी अंतिम फैसला ममता करेंगी। हालांकि हम इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं।
यानी अल्पसंख्यक मतों को एकमुश्त अपने पाले में करने के लिए वो कांग्रेस से गठबंधन तो चाहती है, लेकिन अपनी शर्तों पर. इसकी वजह है हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी का संभावित गठबंधन. वहीं केंद्र में कांग्रेस के नेताओं का एक तबका भी केंद्रीय राजनीति के तहत ममता से गठबन्धन चाहता है।
2. एकला चलो रे
कांग्रेस के बंगाल अध्यक्ष शुभंकर सरकार चाहते हैं, लेफ्ट का अब बंगाल में ताकत नहीं रहा. इसलिए हमको अकेले लड़कर पहले बीजेपी से मुख्य विपक्षी दल का दर्जा छीनना चाहिए।
3. लेफ्ट के साथ गठबन्धन
ममता के धुर विरोधी पूर्व बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी चाहते हैं कि, ममता और बीजेपी पर बराबर हमलावर रहते हुए लेफ्ट के साथ तालमेल हो. हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में भी दोनों गठबंधन में लड़े थे, लेकिन नतीजा सिफर रहा था। बंगाल चुनाव को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि चुनाव में जब हम जाएंगे तो वहां के वोटर से हम क्या कहेंगे, तब सुनियेगा, अभी हम क्या जवाब दें।
फैसले में देरी से चुनाव पर पड़ेगा असर
हाल में कांग्रेस आलाकमान ने इस संबंध में सभी पक्षों से राय ले ली है और अब कांग्रेस आलाकमान को जल्दी से जल्दी बंगाल को लेकर फैसला करना होगा। बंगाल में इसी साल चुनाव होने हैं, ऐसे में कांग्रेस को तीन विकल्पों में से किसी एक रास्ते को चुनना होगा. अगर इसमें देरी होती है तो इसमें कोई शक नहीं कि उसका फायदा विरोधियों को मिलेगा।
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