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पश्चिम बंगाल

IPAC रेड मामले में ED ने SC में क्यों दिया आर्टिकल 32 का हवाला? ममता सरकार ने लगाया ‘कैविएट’, जानें क्या है ये

पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही हंगामा बरपा हुआ है. कोयला घोटाले की जांच अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. वहीं, अब ED ने कोलकाता स्थित IPAC दफ्तर और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर हुई रेड के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

Author Written By: Versha Singh Updated: Jan 10, 2026 21:42

पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही हंगामा बरपा हुआ है. कोयला घोटाले की जांच अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. वहीं, अब ED ने कोलकाता स्थित IPAC दफ्तर और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर हुई रेड के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस मामले में ED ने संविधान के आर्टिकल 32 का सहारा लिया है. वहीं, ED का ये कदम राजनीति के हिसाब से बेहद गंभीर माना जा रहा है और एजेंसी ने सीधे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

ED ने अपने बयान में कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रेड वाली जगह में घुस कर वहां पर मौजूद अहम सबूतों और दस्तावेजों को वहां से हटा दिया. साथ ही बंगाल की पुलिस को भी घेरे में लिया गया है और कहा गया कि बंगाल पुलिस ने हमारी जांच में बाधा डाली है.

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वहीं, दूसरी ओर ममता बनर्जी भी बिल्कुल एक्टिव मोड में दिखाई दे रही हैं. ममता बनर्जी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल की है. कोलकाता हाईकोर्ट में हंगामे के चलते सुनवाई टलने के बाद अब सबकी नजरें दिल्ली पर टिकीं हैं. वहीं, अब ये मामला एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदलता हुआ नजर आ रहा है.

क्या है बंगाल सरकार की कैविएट याचिका?

मिली जानकारी के अनुसार, ममता सरकार को इस बात का पूरा अंदाजा था कि ईडी सुप्रीम कोर्ट जाएगी. इसलिए राज्य सरकार ने पहले ही वहां कैविएट याचिका दाखिल कर दी. आपको बता दें कि कैविएट एक तरह से कानूनी सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है. इसका सीधा मतलब होता है कि सुप्रीम कोर्ट बंगाल सरकार का पक्ष सुने बिना कोई आदेश नहीं देगा. आमतौर पर किसी के भी द्वारा ये याचिका एक तरफा कार्रवाई को रोकने के लिए लगाई जाती है. ममता सरकार चाहती है कि एजेंसी के दावों पर कोई भी फैसला सुनाने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए.

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क्या है आर्टिकल 32 जिसके तहत ED ने खटखटाया SC का दरवाजा?

आपको बता दें कि आर्टिकल 32 को भारतीय संविधान की आत्मा कहा जाता है. इसके तहत कोई भी नागरिक या संस्था मौलिक अधिकारों के हनन पर सीधे सुप्रीम कोर्ट का रूख कर सकती है. आमतौर पर जांच एजेंसियां हाईकोर्ट जाती हैं लेकिन ईडी ने दावा किया है कि बंगाल में उसकी निष्पक्ष जांच करने की आजादी छीन ली गई है. एजेंसी का यह भी कहना है कि बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों को उनकी शक्ति का प्रयोग करने से रोका है जो संवैधानिक अधिकारों के हनन का मामला है. साथ ही ईडी ने कहा कि राज्य की मशीनरी ने कानून का उल्लंघन किया है. इसलिए ईडी ने सीधे दिल्ली में स्थित सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार लगाई है.

यह भी पढ़ें- ‘ज्यादा तंग किया तो खोल दूंगी पोल’, सीएम ममता बनर्जी की अमित शाह को धमकी; बोलीं- मेरे पास है पेन ड्राइव

ED ने ममता बनर्जी पर क्या लगाए हैं आरोप?

ED ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 28 पन्नों की याचिका दाखिल की है. जिसमें उसने ममता बनर्जी के खिलाफ कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं. एजेंसी का दावा है कि प्रतीक जैन के घर पर ईडी की रेड के दौरान ही सीएम ममता बनर्जी भी वहां पहुंची थीं. आरोप है कि उन्होंने वहां से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अहम कागज अपने कब्जे में ले लिए और उन्हें अपने साथ लेकर चलीं गईं. ED के अनुसार ये कागजात कोयला घोटाले की मनी ट्रेल को साबित करने के लिए बेहद जरूरी थे. एजेंसी ने ममता बनर्जी के इस कदम को उनकी जांच में दखल करार दिया है.

IPAC और कोयला घोटाले का क्या है कनेक्शन?

कथित तौर पर कोयला घोटाले की जांच के दौरान करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का पता चला है. जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले की बड़ी रकम एक विशेष कोल कंपनी को भेजी गई है. यह कंपनी राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC से जुड़ी हुई बताई जा रही है. इसी लिंक की जानकारी और पता लगाने के लिए ईडी ने प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की थी. बीजेपी ने भी सवाल उठाया है कि सरकारी दस्तावेज एक प्राइवेट एजेंसी के पास क्या कर रहे थे. क्या बंगाल के अफसर किसी प्राइवेट संस्था को रिपोर्ट कर रहे हैं?

First published on: Jan 10, 2026 09:28 PM

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