Sunday, September 25, 2022
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Amroha News: धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत यूपी में पहली बार हुई सजा, 5 साल के लिए अफजल गया जेल

अतिरिक्त महानिदेशक, अभियोजन आशुतोष पांडे ने कहा कि धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत राज्य में यह पहली सजा है। संभल के रहने वाले अफजल को दोषी ठहराए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया है।

Amroha News: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले की अदालत ने शनिवार को एक 26 वर्षीय युवक को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। युवक पर राज्य के धर्मांतरण विरोधी कानून (UP’s anti-conversion law) के तहत पिछले साल अप्रैल में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि दूसरे समुदाय की एक 16 वर्षीय लड़की का कथित रूप से अपहरण किया गया था। आरोपी अफजल की गिरफ्तारी के बाद लड़की को भी बरामद किया गया था।

प्रदेश में पहली बार हुई है इस कानून में सजा

अतिरिक्त महानिदेशक, अभियोजन आशुतोष पांडे ने बताया कि धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत राज्य में यह पहली सजा है। संभल जिले के रहने वाला और जमानत पर बाहर आया अफजल अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद शुक्रवार को हिरासत में लिया गया है। वहीं अमरोहा के विशेष अधिवक्ता बसंत सिंह सैनी ने बताया कि अफजल ने लड़की से अपना परिचय ‘अरमान कोहली’ के रूप में दिया था। उसकी असली पहचान बाद में सामने आई थी।

पिछले साल दो अप्रैल को दर्ज हुआ था मुकदमा

बसंत कुमार सैनी ने बताया कि शनिवार को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिला राघव ने अफजल को पांच साल कैद की सजा सुनाई। अदालत में अभियोजन पक्ष के कुल सात गवाहों से पूछताछ की गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला पिछले साल 2 अप्रैल का है। एक लड़की के पिता ने स्थानीय पुलिस से कहा कि उनकी बेटी दो दिन पहले किसी काम के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं आई। पीड़ित पिता ने बताया कि पड़ोसियों ने देखा कि मेरी बेटी को एक व्यक्ति के साथ देखा था।

किशोरी के पिता ने पुलिस से लगाई थी गुहार

पिता ने पुलिस को यह भी बताया कि उसकी बेटी किसी अफजल नाम के युवक के संपर्क में थी, जो पौधे खरीदने के लिए उसकी नर्सरी जाता था। इसके बाद पुलिस ने अफजल के खिलाफ धर्मपरिवर्तन और अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए अफजल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। वह अपने किसी रिश्तेदार के घर में रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने किशोरी को भी बरामद कर लिया। मामले में धर्म के गैरकानूनी धर्मांतरण पर यूपी निषेध अध्यादेश, 2020, 28 नवंबर, 2020 को लागू हुआ।

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