Thursday, 22 February, 2024

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सपा विधायकों में रार, एक बोले-स्वामी प्रसाद मौर्य विक्षिप्त, जवाब मिला-मनोज पांडेय भाजपा के एजेंट

SP MLA Manoj Pandey Vs Swami Prasad Maurya (Parvez Ahmad): ऊंचाहार से विधायक व विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय अपने ही दल के स्वामी प्रसाद मौर्य को विक्षिप्त बता रहे हैं तो स्वामी प्रसाद मौर्य भी पलटवार में नहीं चूक रहे हैं। उन्होंने सोमवार को कहा कि मनोज पांडेय भाजपा के एजेंट हैं। उनकी विचारधारा व इतिहास भी याद दिला दिया।

Edited By : Swati Pandey | Updated: Feb 12, 2024 20:12
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Samajwadi Party MLA Manoj Pandey and Swami Prasad Maurya
स्वामी प्रसाद मौर्य, सपा MLA मनोज पांडेय

SP MLA Manoj Pandey Vs Swami Prasad Maurya (Parvez Ahmad): भारतीय जनता पार्टी से सियासी चुनौती में पिछड़ती दिख रही समाजवादी पार्टी के विधायकों में अब घमासान छिड़ गया है। ऊंचाहार से विधायक व विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय अपने ही दल के महासचिव व विधान परिषद सदस्य स्वामी प्रसाद मौर्य को विक्षिप्त बता रहे हैं तो स्वामी प्रसाद मौर्य भी पलटवार में नहीं चूक रहे हैं। उन्होंने सोमवार को कहा कि मनोज पांडेय भाजपा के एजेंट हैं। उनकी विचारधारा व इतिहास भी याद दिला दिया।

स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर

बहुजन समाज पार्टी के विचारों के साथ राजनीति में बड़े स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। उनके साथ मौर्य, कश्यप समाज के कई प्रभावी नेताओं ने भी बसपा को अलविदा कह दिया था। 2017 में वह भाजपा के टिकट पर विधायक बने। योगी आदित्यनाथ सरकार में उन्हें श्रम मंत्री बनाया गया। 2022 के चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा पर पिछड़ा, दलित विरोधी होने का आरोप लगाया और मंत्री पद से त्यागपत्र देकर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।

कैसे शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई?

सपा के टिकट पर फाजिलनगर विधानसभा का चुनाव लड़े हालांकि वह ऊंचाहार से चुनाव लड़ना चाहते थे क्योंकि वह इस सीट से एक बार विधायक रह चुके थे। लेकिन सपा ने इस सीट पर मनोज पांडेय को प्रत्याशी बनाया और वह जीत भी गए। स्वामी मौर्य फाजिलनगर विधानसभा का चुनाव भाजपा प्रत्याशी से हार गए। जिसके बाद सपा ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य बना दिया। जिससे मनोज पांडेय और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच की राजनीतिक लड़ाई बढ़ गई।

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सपा के पीडीए पॉलिटिक्स का राग छेड़ने से पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहले आंबेडकरवाद का झंडा बुलंद किया और हिन्दू देवी देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी शुरू कर दी। इत्तेफाक से मनोज पांडेय भी सपा में आने से पहले भाजपा में थे और मौर्य भी भाजपा से ही सपा में आए थे। लिहाजा दोनों के बीच रार छिड़ी रहती थी। इधर, स्वामी प्रसाद मौर्य ने जब मनुवाद को निशाने पर लेते हुए धार्मिक टिप्पणी शुरू की तो सपा विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनकी बयानबाजी को सपा से इतर बताया गया लेकिन विधानसभा के बजट सत्र से एक दिन पहले मनोज पांडेय ने मीडिया से कहा कि सपा नेतृत्व के रोकने के बाद भी स्वामी प्रसाद मौर्य आपत्तिजनक बयानबाजी कर रहे हैं। वह विक्षिप्त हो गए हैं।

मनोज पांडेय भाजपा के एजेंट: स्वामी प्रसाद मौर्य

इस व्यक्तिगत टिप्पणी पर सपा की ओर से भी बयान नहीं आया लेकिन आज स्वामी प्रसाद मौर्य ने मनोज पांडेय पर पलटवार किया। कहा कि दलितों, पिछड़ों को जिन लोगों ने उत्पीड़ित किया। समान अधिकार नहीं दिया। वही लोग उन पर टिप्पणी कर रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य यहीं नहीं रूके उन्होंने मनोज पांडेय को सीधे भाजपा का एजेंट कह दिया।

लोकसभा चुनाव की बेला में जब दो दिन पहले ही राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भाजपा के दिल जीतने का बयान दिया और मुजफ्फरनगर में अजित सिंह की प्रतिमा के अनावरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शामिल कराकर समाजवादी पार्टी को सीधा झटका दिया है। बसपा लगातार सपा पर हमलावर है। कांग्रेस के साथ भी एक कदम आगे और दो कदम पीछे वाले हालात हैं। ऐसे में सपा के ही दो विधायकों का एक दूसरे पर सीधा हमला चौंकाने वाला है।

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सपा की राजनीति को गंभीरता से जानने वालों का कहना है कि पार्टी में अनुशासन खत्म हो गया है। दलीय अनुशासन स्थापित करने का कोई मैकेनिज्म नहीं है। ऐसे में विधायकों का आपस में टकराव चुनाव में समाजवादी पार्टी का नुकसान करेगा। सपा के प्रदेश प्रवक्ता चांद खां का कहना है कि समाजवादी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र हैं, हर किसी को अपनी बात करने का हक है लेकिन विधायकों के बयानों को दलीय नीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। सपा नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। इस मामले में जल्द ही सपा नेतृत्व कार्रवाई करेगा।

First published on: Feb 12, 2024 07:59 PM

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