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अतीक और अशरफ की हत्या की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, यूपी में छह साल में 183 मुठभेड़ों की भी जांच की मांग

Uttar Pradesh: गैंगस्टरअतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में हत्याकांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई है। वकील विशाल तिवारी की ओर से ये याचिका दायर […]

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Uttar Pradesh: गैंगस्टरअतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में हत्याकांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की गई है। वकील विशाल तिवारी की ओर से ये याचिका दायर की गई है। याचिका में 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में हुई 183 मुठभेड़ों की भी जांच की मांग की गई है।

गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस की मौजूदगी में शनिवार की रात प्रयागराज के एक अस्पताल ले जाने के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। याचिका में अतीक की हत्या का जिक्र करते हुए कहा गया कि पुलिस द्वारा इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा है।

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शनिवार देर रात हुई थी अतीक-अशरफ की हत्या

याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी जनहित याचिका कानून के शासन के उल्लंघन और उत्तर प्रदेश द्वारा की जा रही दमनकारी पुलिस बर्बरता के खिलाफ है। बता दें कि अतीक और अशऱफ की हत्या से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) ने कहा था कि योगी सरकार के छह साल के कार्यकाल में 183 अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर किया गया है।

‘यूपी पुलिस ने डेयरडेविल्स बनने की कोशिश की है’

वकील की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि यूपी पुलिस ने डेयरडेविल्स बनने की कोशिश की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी जनहित याचिका कानून के शासन के उल्लंघन और उत्तर प्रदेश द्वारा की जा रही दमनकारी पुलिस बर्बरता के खिलाफ है।

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याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने विकास दुबे के कानपुर मुठभेड़ से संबंधित एक मामले में भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उसने कहा कि इसी तरह की घटना अतीक के मामले में भी दोहराई गई, जिसमें उसके बेटे असद की मुठभेड़ में मौत हुई है, जबकि अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की निजी हमलावरों द्वारा तब हत्या कर दी गई जबकि वे पुलिस हिरासत में थे। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी ने याचिका में कहा है कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा हैं।

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First published on: Apr 17, 2023 08:05 AM

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