Sunday, January 29, 2023
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UP News: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास को ED ने किया गिरफ्तार

Abbas Ansari Arrested: अब्बास अंसारी को अगस्त में एक विशेष एमपी-एमएलए अदालत द्वारा हथियार लाइसेंस मामले में भगोड़ा घोषित किया गया था।

Abbas Ansari Arrested: बाहुबली मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) के बेटे और मऊ के सदर से विधायक अब्बास अंसारी (Abbas Ansari) को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। अब्बास को ईडी ने शुक्रवार रात मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अरेस्ट किया है। अब्बास अंसारी ने इस साल की शुरुआत में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सहयोगी ओम प्रकाश राजभर की अगुवाई वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, विधायक का नाम उनके पिता के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम मामले की जांच के दौरान सामने आया। ईडी ने मऊ विधायक के खिलाफ पिछले महीने लुकआउट नोटिस जारी किया था, जब उन्होंने कई मौकों पर समन को छोड़ दिया था।

हथियार लाइसेंस मामले में घोषित किया गया था भगोड़ा

अब्बास अंसारी को अगस्त में एक विशेष एमपी-एमएलए अदालत द्वारा हथियार लाइसेंस मामले में भगोड़ा घोषित किया गया था। मीडिया से बात करते हुए उनके वकील मोहम्मद फारूक ने कहा, ‘अब्बास अंसारी को ईडी ने आज दूसरी बार बुलाया और वह दोपहर करीब 2 बजे आए थे। पूछताछ रात 11 बजे तक चली जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। यह नहीं बता सकता कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया और क्यों ले जाया गया।”

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्तार अंसारी की भूमिका

वर्तमान में बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में चुने गए थे और न केवल यूपी बल्कि अन्य राज्यों में भी 50 से अधिक आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। 10 सितंबर, 2021 को एक बड़ी घोषणा में, मायावती ने घोषणा की कि अंसारी सहित किसी भी माफिया डॉन को 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मैदान में नहीं उतारा जाएगा, जो राजनीति के अपराधीकरण का मुकाबला करने के उनके इरादे का संकेत देता है।

सिगबतुल्लाह अंसारी जहां मोहम्मदाबाद से पूर्व विधायक हैं, वहीं उनके दूसरे भाई अफजल अंसारी गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से बसपा सांसद हैं। 2010 में सभी अंसारी भाइयों को बसपा से निष्कासित किए जाने के बाद उन्होंने कौमी एकता दल का गठन किया, जो बाद में 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी में विलय हो गया।

सितंबर में, अंसारी को आर्म्स एक्ट के एक मामले में दोषी ठहराए जाने और जेलर को धमकी देने और बंदूक तानने के लिए 5 साल और 7 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

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