Darul Uloom Deoband Fatwa : यूपी के सहारनपुर में स्थित इस्लामिक शिक्षा के केंद्र दारुल उलूम देवबंद को फतवा जारी करना भारी पड़ गया। इसे लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने दारुल उमूल देवबंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। आइए जानते हैं कि दारुल उमूल देवबंद ने क्या फतवा जारी किया है।
क्या है दारुल उलूम देवबंद
दारुल उलूम देवबंद एक इस्लामिक संस्था है, जहां से देशभर के मदरसे संचालित होते हैं। साथ ही पाकिस्तान और बांग्लादेश के भी कुछ मदरसे इस संस्था से संबंद्ध हैं। मदरसों में बच्चों को इस्लामिक शिक्षा दी जाती है। इस संस्था का मुख्यालय उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित है।
दारुल उलूम देवबंद ने क्या जारी किया फतवा
दारुल उलूम देवबंद ने अपनी वेबसाइट पर एक फतवा जारी किया, जिसमें गजवा-ए-हिंद को मान्यता देने की बात कही गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस्लामिक दृष्टिकोण से गजवा-ए-हिंद वैध है और इसका महिमामंडित किया गया। एक व्यक्ति ने गजवा-ए-हिंद के संबंध में दारुल उलूम से सूचना मांगते हुए पूछा कि क्या इसका जिक्र हदीस में है। इस पर दारुल उलूम देवबंद ने जवाब दिया कि साहिहसीता की किताब सुन्नन अल-नसाई में इस पर पूरा चैप्टर है।
जानें फतवे में क्या कहा गया है
दारुल उलूम देवबंद ने फतवे में कहा कि पैगंबर मोहम्मद के करीबी रहे हजरत अबू हुरैरा से एक हदीस (वचन) सुनाई दी थी, जिसमें उन्होंने गजवा-ए-हिंद पर कहा कि मैं अंतिम दम तक लड़ूंगा और अपना सबकुछ कुर्बान कर दूंगा। अगर मर गया तो बलिदानी और जिंदा रहा तो गाजी कहलाऊंगा।
एनसीपीसीआर ने दारुल उलूम देवबंद के खिलाफ लिखा पत्र
दारुल उलूम देवबंद के फतवे के बाद एनसीपीसीआर (NCPCR) ने एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया कि बच्चों के विकास के लिए इस तरह का फतवा जारी करना ठीक नहीं है, इसलिए दारुल उमूल देवबंद के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर सहारनपुर के डीएम ने देवबंद के सीओ और एसडीएम को कार्रवाई करने निर्देश दिए। इसके बाद एसडीएम और सीओ समेत पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। मामले की जांच के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी।