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नौकरी-पोस्टिंग से लेकर ट्रांसफर तक…फर्जी प्रोटोकॉल अधिकारी ने बताया योगी के दफ्तरों में कैसे चलता धोखाधड़ी का खेल

Uttar Pradesh STF दोनों बदमाश सरकारी नौकरी, पार्टी में पद दिलाने और ट्रांसफर पोस्टिंग का झांसा देकर तीन- चार वर्षों में अलग अलग शहरों के लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं।

Uttar Pradesh STF: यूपी एसटीएफ को लखनऊ मामले में बड़ी सफलता मिली। यूपी एसटीएफ ने विभूतिखंड इलाके से दो शातिरों को गिरफ्तार कर गिरोह का भंडाफोड किया। बता दे कि यूपी एसटीएफ ने रविवार को विभूतिखंड इलाके से  सरकारी  अफसर और सुकरात विवि का वीसी बनकर ठगी करने वालों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई अहम दस्तावेज बरामद किये।

सरकारी नौकरी, पार्टी में पद दिलाने के बहाने करते थे ठगी

जानकारी के मुताबिक आरोपी बड़े अफसरों के संपर्क में थे। आध्यात्मिक योग शिविर लगाकर बड़े अफसर से संपर्क करते थे।एएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि पकडे गये दोनों बदमाश सरकारी नौकरी, पार्टी में पद दिलाने और ट्रांसफर पोस्टिंग का झांसा देकर तीन- चार वर्षों में अलग अलग शहरों के लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। पुलिस ने दोनों के पास से ठगी के दौरान प्रयोग करने वाले कई अहम दस्तावेज भी बरामद किये है। यूपी एसटीएफ के अधिकारी ने बताया कि पीलीभीत के बीसलपुर निवासी रामशंकर गुप्ता उर्फ आशीष कुमार गुप्ता और दिल्ली अशोक विहार निवासी अरविंद त्रिपाठी उर्फ गणेश त्रिपाठी उर्फ गुरुजी को ​गिरफ्तार किया गया है।

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पुलिस ने बताया कि रामशंकर ने अपना फर्जी नाम डॉक्टर आशीष कुमार गुप्ता रखा। रामशंकर डॉक्टर होने के बहाने लोगों को झांसे में लेकर ट्रांसफर पो​स्टिंग, ठेका-पट्टा, नौकरी आदि लगवाने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे चुके हैं। वहीं दूसरा आरोपी अरविंद त्रिपाठी योग गुरु है। जो कई बड़े नेताओं व अफसरों के संपर्क में था। आरोपी विवि का वीसी बनकर लोगों से ठगी करता था। पुलिस दोनों आरोपियों से गिरोह में जुड़े अन्य लोगों के विषय में जानकारी जुटी रही है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 14 फर्जी आई कार्ड और दो आधार कार्ड बरामद किए।

कार पर उत्तर प्रदेश शासन लिखवा रौब दिखाते

पुलिस ने बताया आरोपियों की गाड़ी पर उत्तर प्रदेश शासन लिखा हुआ, जिसके जरिए ये लोगो पर अपना रौब जमाते थे। अपनी गाड़ी में दो लोगों को पीआरडी की वर्दी पहनाकर साथ भी रखते थे, जिससे लोगों का भरोसा जीत सके। आरोपियों का कई बड़े दफ्तरों में भी आना-जाना था। बड़े विभागों में भी जान-पहचान है।

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First published on: Oct 16, 2023 12:44 PM

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