Parmod chaudhary
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Tonk News: (केजे श्रीवत्सन, जयपुर) कहा जाता है कि अंधविश्वास और आस्था में एक बारीक सी लकीर होती है। लकीर के इस पार आस्था और उस पार अंधविश्वास की गहरी खाई होती है। दुनिया जहां चांद पर बसने की बात कर रही है। वहीं, 21वीं सदी के भारत में आज भी अंधविश्वास अपनी गहरी जड़ें जमाए हुए है। ऐसा ही एक मामला अब राजधानी जयपुर से 100 किलोमीटर दूर सरकारी अस्पताल में सामने आया है। जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल मामला टोंक जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल से जुड़ा हुआ है।
टोंक जिले के दूनी के माधोराजपुरा गांव से आए कुछ ग्रामीण सीधे सआदत अस्पताल के वार्ड में पहुंचे और एक बेड के पास अंधविश्वास और पाखंड से जुड़े टोने-टोटके करने शुरू कर दिए। तथाकथित आत्मा को मुक्ति दिलाने का अंधविश्वास से जुड़ा खेल चलता रहा। यह देखकर अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार भी हैरान रह गए। सबसे बड़ी हैरान कर देने वाली बात यह रही कि अस्पताल प्रबंधन से जुड़े किसी भी अधिकारी और कर्मचारी ने इस पाखंड को लेकर कोई सवाल नहीं किया।
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मीडिया ने जरूर ग्रामीणों से मामले की जानकारी ली। परिजन जय सिंह मीणा ने बताया कि माधोराजपुरा निवासी उनके पिता की सआदत अस्पताल के वार्ड में करीब 17 साल पहले मौत हो गई थी। तभी से उनकी आत्मा यहां कैद थी और घर के लोगों को परेशान कर रही थी। इसलिए वे आज उन्हें लेने आए हैं।
अंधविश्वास या… pic.twitter.com/XXiTIgJURO
— parmod chaudhary (@parmoddhukiya) July 16, 2024
कोटा मेडिकल कॉलेज के महाराव भीमसिंह चिकित्सालय में पहले भी एक ऐसा मामला सामने आया था। तीन साल पहले चितौड़गढ़ के एक शख्स की मौत हुई थी। जो करंट से झुलस गया था। उसके परिजन भी अस्पताल में आत्मा लेने के लिए आए थे। उनका कहना था कि मौत के बाद घर में अशांति छाई हुई है। किसी ने उनको परिजन की आत्मा अस्पताल से लाने के लिए कहा था।
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