राइट टू हेल्थ बिलः राजस्थान में डाॅक्टरों का प्रदर्शन जारी, विरोध में आज ओपीडी सेवाएं रहेगी बंद
Edited By Rakesh Choudhary

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Jaipur News: राजस्थान में बुधवार को राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में पूरे राज्य में मेडिकल सेवाएं बंद रहेगी। राज्य में बुधवार को पीएचसी, सीएचसी, जिला हाॅस्पिटल और मेडिकल काॅलेज से जुड़े अस्पतालों में ओपीडी बंद रहेगी। इधर सरकार ने भी रेजिडेंट डाॅक्टर्स पर कार्रवाई करने का मन बना लिया है।
इधर निजी चिकित्सकों के समर्थन में मंगलवार को सरकारी मेडिकल काॅलेज के टीचर्स भी आ गए हैं। इसमें सीनियर प्रोफेसर, प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर रैंक की फैकल्टी शामिल है। हालांकि इस दौरान केवल ओपीडी सर्विस बंद रहेगी। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों और आईसीयू में भर्ती मरीजों को इलाज पूरा दिया जाएगा।
इधर सरकार ने रेजिडेंट डाॅक्टर्स पर कार्रवाई का मन बना लिया है। मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने आज एक ऑर्डर जारी करते हुए प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को उनके कॉलेज में पढ़ रहे ऐसे रेजिडेंट्स डॉक्टर्स का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए कहा है, जो आंदोलन के दौरान मरीजों के परिजन से दुर्व्यवहार कर रहे हों, राजकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हों और अपने कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही बरत रहे हों।
राजस्थान बीजेपी के विरोध के बाद भी राइट टू हेल्थ बिल 21 मार्च को विधानसभा से पास हो गया। राजस्थान देश का पहला राज्य है जहां ये बिल पास हुआ। इस बिल में सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज की गारंटी है। इमरजेंसी की हालत में प्राइवेट हॉस्पिटल को भी फ्री इलाज करना होगा। प्राइवेट हॉस्पिटल में इमरजेंसी में फ्री इलाज के लिए अलग से फंड बनेगा।
बिल पर अपनी बात रखते हुए स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि इमरजेंसी की हालत में प्राइवेट अस्पताल को भी फ्री में इलाज करना होगा। प्राइवेट हाॅस्पिटल में इमरजेंसी इलाज के लिए अलग से फंड बनेगा।
लापरवाही करने पर जिला और राज्य स्तर पर प्राधिकरण बनेगा। दोषी पाए जाने पर 10 से 25 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। प्राधिकरण के फैसले को किसी सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
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